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अाधे-अधूरे सर्टिफिकेट से नौकरी हासिल की, अनुभव प्रमाण पत्र भी खुद लिखकर लगा दिया

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हुई एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जिसमें न केवल आधे-अधूरे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 05:25 AM IST

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    बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हुई एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जिसमें न केवल आधे-अधूरे प्रमाण-पत्रों के आधार पर नियुक्ति की गई, बल्कि आवेदक द्वारा लिखे गए खुद के अनुभव प्रमाण-पत्र को भी सही मान लिया गया। मामले का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत निकाले गए दस्तावेजों से हुआ।

    बीएमसी ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती के लिए 15 मार्च को इंटरव्यू प्रक्रिया आयोजित की थी। यह भर्ती सिर्फ कॉलेज स्तर पर आयोजित की गई थी, इसलिए एक पद के लिए सिर्फ तीन ही आवेदक थे। इसमें डॉ. नीलू जैन, डॉ. सुमित रावत और डॉ. शोहेब अख्तर शामिल थे। कमिश्नर की अध्यक्षता वाली 4 सदस्यीय कमेटी ने डॉ. नीलू जैन का चयन कर उन्हें इस पद के योग्य माना। लेकिन जब आरटीआई में उनके दस्तावेज सामने आए तो इनके फार्म की चेक लिस्ट में अपनी डिग्रियों के अटेंप्ट सर्टिफिकेट, इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट और पीजी कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं थे। जबकि मेरिट लिस्ट में अटेंप्ट सर्टिफिकेट के नंबर थे। वहीं कई आवेदकों को सर्टिफिकेट में कमी के चलते प्रक्रिया से बाहर भी किया गया।

    आवेदक डॉ. नीलू जैन द्वारा 28 फरवरी 2018 को भरे गए आवेदन में सिर्फ श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा का अनुभव प्रमाण संलग्न करना बताया गया है, इसमें बीएमसी में प्रतिनियुक्ति के अनुभव का कोई उल्लेख नहीं था। लेकिन चेकलिस्ट में यह अनुभव प्रमाण पत्र होना पाया गया। इतना ही नहीं जो अनुभव प्रमाण-पत्र लगाया गया है वह भी आवेदक ने खुद ही लिखकर दिया है। ऐसे में अब यह नियुक्ति पूरी तरह से सवालों के घेरे में है।

    वह फार्म जिसमें आवेदक ने अनुभव में केवल रीवा मेडिकल कॉलेज का जिक्र किया है।

    श्रीकांत त्रिपाठी | सागर

    बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हुई एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जिसमें न केवल आधे-अधूरे प्रमाण-पत्रों के आधार पर नियुक्ति की गई, बल्कि आवेदक द्वारा लिखे गए खुद के अनुभव प्रमाण-पत्र को भी सही मान लिया गया। मामले का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत निकाले गए दस्तावेजों से हुआ।

    बीएमसी ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती के लिए 15 मार्च को इंटरव्यू प्रक्रिया आयोजित की थी। यह भर्ती सिर्फ कॉलेज स्तर पर आयोजित की गई थी, इसलिए एक पद के लिए सिर्फ तीन ही आवेदक थे। इसमें डॉ. नीलू जैन, डॉ. सुमित रावत और डॉ. शोहेब अख्तर शामिल थे। कमिश्नर की अध्यक्षता वाली 4 सदस्यीय कमेटी ने डॉ. नीलू जैन का चयन कर उन्हें इस पद के योग्य माना। लेकिन जब आरटीआई में उनके दस्तावेज सामने आए तो इनके फार्म की चेक लिस्ट में अपनी डिग्रियों के अटेंप्ट सर्टिफिकेट, इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट और पीजी कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं थे। जबकि मेरिट लिस्ट में अटेंप्ट सर्टिफिकेट के नंबर थे। वहीं कई आवेदकों को सर्टिफिकेट में कमी के चलते प्रक्रिया से बाहर भी किया गया।

    आवेदक डॉ. नीलू जैन द्वारा 28 फरवरी 2018 को भरे गए आवेदन में सिर्फ श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा का अनुभव प्रमाण संलग्न करना बताया गया है, इसमें बीएमसी में प्रतिनियुक्ति के अनुभव का कोई उल्लेख नहीं था। लेकिन चेकलिस्ट में यह अनुभव प्रमाण पत्र होना पाया गया। इतना ही नहीं जो अनुभव प्रमाण-पत्र लगाया गया है वह भी आवेदक ने खुद ही लिखकर दिया है। ऐसे में अब यह नियुक्ति पूरी तरह से सवालों के घेरे में है।

    आवेदक द्वारा जमा किया गया वह अनुभव प्रमाण पत्र जो उसने खुद अपने हाथ से तैयार किया था।

    मेरे पास सर्टिफिकेट हैं, लेकिन उस समय घर भूल आई थी

    सीधी बात | डॉ. नीलू जैन, एसोसिएट प्रोफेसर बीएमसी

    आपके द्वारा जो आवेदन दिया गया है उसमें अटेंप्ट, इंटर्नशिप कंप्लीशन और पीजी कंप्लीशन सर्टिफिकेट क्यों नहीं लगाए गए?

    - सर्टिफिकेट तो सारे हैं, लेकिन घर पर छूट जाने के कारण लगा नहीं पाई। वैसे आपको यह जानकारी किसने दी?

    आरटीआई में मिले दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है। आपने बीएमसी का अनुभव प्रमाण-पत्र भी अपने हाथ से लिखकर दिया, जबकि आवेदन में यह शामिल नहीं था?

    - ऐसी बात नहीं है, मेरे पास बीएमसी का भी सर्टिफिकेट है। मेरे सारे दस्तावेज सही हैं। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है।

    आपको नियुक्ति देने की वजह आपके रिश्तेदार का आईएएस अफसर होना तो नहीं है?

    -किसी के रिश्तेदार का आईएएस होना गुनाह है क्या। यह नौकरी मुझे अपनी दम पर मिली है।

    डॉ. नीलू जैन के सर्टिफिकेट के संबंध में मुझे याद नहीं है। यह स्क्रूटिनी कमेटी का काम था। इसकी जानकारी देखकर ही बता सकूंगा। -डॉ. जीएस पटेल, डीन बीएमसी

    भास्कर ने भर्ती के दौरान ही जताई थी गड़बड़ी की आशंका

    दैनिक भास्कर ने बीएमसी की इस भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी होने की आशंका इंटरव्यू प्रक्रिया के अगले ही दिन 16 मार्च को प्रकाशित खबर में उजागर की थी, लेकिन अफसर अपनी गलतियां छुपाने के लिए डॉ. नीलू को दस्तावेजों के आधार पर सही बताते रहे। जबकि सूत्र बताते हैं कि डॉ. नीलू जैन के रिश्तेदार आईएएस हैं और इन्हीं के फोन पर अफसरों ने सारे सर्टिफिकेट दरकिनार कर उन्हें नियुक्ति में प्राथमिकता दी है।

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