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सिविल कोर्ट जुलाई 2019 तक करे भाग्योदय के सामने की जमीन का निराकरण: हाईकोर्ट

Dainik Bhaskar

May 12, 2018, 05:25 AM IST



भास्कर संवाददाता | सागर

भाग्योदय के सामने की जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले में तीन याचिकाओं का हाईकोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी ने निराकरण कर दिया है। हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट को रजिस्ट्रियां शून्य कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा दायर सिविल सूट का निराकरण 31 जुलाई 2019 के पहले करने के आदेश दिए हैं।

अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने बताया कि कलेक्टर सागर ने भाग्योदय के सामने की 30.78 एकड़ नजूल की जमीन की खरीद-फरोख्त मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिका क्रमांक 17127 में प्राथमिक विवाद यह है कि कलेक्टर ने राजस्व बोर्ड द्वारा अनुमति होने के बाद भी रिकॉर्ड बुलाए बिना ही भूमि की बिक्री के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य भूमि राजस्व संहिता की धारा 158(3) में संशोधन के बाद पट्टेदार को भूमि स्वामी माना गया है। धारा 165 (1) के तहत ऐसी संपत्ति बेचने की अनुमति आवश्यक नहीं है। राजस्व बोर्ड द्वारा 6 जून 2016 को आदेश पारित करने के बाद 9 जनवरी 2017 को याचिकाकर्ता से खरीदार ने संपत्ति खरीदी है। इसलिए उनके पास वैध बिक्रीनामा है। याचिका क्रमांक 6389 और 6977 कलेक्टर द्वारा पट्टा रद्द कर नोटिस जारी करने के संबंध में हैं। इस न्यायालय के अनुसार कलेक्टर सागर ने सिविल कोर्ट में रजिस्ट्रियां शून्य घोषित कराने और बिक्रीनामा को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में चल रही है, इसलिए सिविल कोर्ट में संशोधन आवेदन लिखित में पेश कर सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि सिविल कोर्ट दायर प्रकरण में रेवेन्यू बोर्ड के आदेश सहित उक्त भूमि के भूमिस्वामी अधिकार से संबंधित सभी बिंदुओं का निराकरण 31 जुलाई 2019 तक करे। उच्च न्यायालय ने सिविल कोर्ट से फैसला आने तक खरीदारों के कब्जे को भी डिस्टर्ब न करने का आदेश सरकार को दिया है। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि जब तक सिविल कोर्ट से कोई फैसला नहीं आता किसी प्रकार का निर्माण आदि जिससे कि भूमि का स्वरूप परिवर्तन हो नहीं किया जा सकेगा।

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