Hindi News »Madhya Pradesh »Sagar» हथकरघा उद्योग भारत में रोजगार का स्वदेशी और प्राचीन जरिया है : उमा

हथकरघा उद्योग भारत में रोजगार का स्वदेशी और प्राचीन जरिया है : उमा

वर्तमान समय में डिग्री लेने के बाद अधिकांश युवा सरकारी नौकरी अथवा कारपोरेट सेक्टर में रोजगार की तलाश में भटकते...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 05:30 AM IST

हथकरघा उद्योग भारत में रोजगार का स्वदेशी और प्राचीन जरिया है : उमा
वर्तमान समय में डिग्री लेने के बाद अधिकांश युवा सरकारी नौकरी अथवा कारपोरेट सेक्टर में रोजगार की तलाश में भटकते हैं। ऐसी स्थिति में ऐसे भी युवाओं की कमी नहीं है, जो रोजगार के प्राचीन और स्वदेशी माध्यमों को अपनाकर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे ही माध्यमों में हथकरघा उद्योग भी शामिल है, जो स्वावलंबन की राह है। यह बात केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने रविवार को हबीबगंज जैन मंदिर परिसर में आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से संचालित हथकरघा विक्रय केंद्र व प्रदर्शनी का लोकार्पण करते हुए कही। महापौर आलोक शर्मा ने कहा कि हथकरघा उद्योग देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। केंद्रीय मंत्री भारती ने कहा कि हथकरघा को उद्योग बनाकर युवाओं को स्वावलंबी बनाने का महात्मा गांधी का सपना था। महात्मा गांधी के बाद आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ही ऐसे हैं, जिन्होंने हथकरघा के महत्व को समझा और युवाओं को इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह केंद्र अब इतना बड़ा बन चुका है कि हथकरघा से बनी वस्तुओं को विक्रय केंद्र भी खुल गया है।

शिक्षित युवाओं को जोड़ना होगा

भाजपा नेत्री सुधा मलैया ने हथकरघा परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षित युवाओं को और अधिक जोड़ने की बात कही। पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु और मन्दिर निर्माण कमेटी के प्रियंक जैन ने भी हथकरघा संबंधी योजनाओं की जानकारी दी। आचार्यश्री के चित्र का अनावरण व द्वीप प्रज्ज्वलन मुख्य अतिथियों ने किया। मंगलाचरण सुधा मलैया और संचालन नितिन नांदगावकर ने किया। ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु ने बताया कि केंद्र में अमित जैन का खासा योगदान है, जो बड़े आर्थिक पैकेज वाली नौकरी छोड़कर युवाओं को हथकरघा का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Sagar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×