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"शादी के बाद बेटी का गृह-त्याग करना संत होने जैसा'

तिली रोड पर स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में चल रही संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 06:05 AM IST
तिली रोड पर स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में चल रही संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास आस्था भारती ने शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए दहेज प्रथा पर गहरा कटाक्ष किया और कहा कि विवाह के बाद कोई बेटी से यह नहीं पूछता की बेटी क्या छोड़ कर आई, पूछा जाता है तो सिर्फ यही की बहू क्या-क्या दहेज लेकर आई।

जैसे एक महात्मा अथवा संत सांसारिक सुख परिवार की चिंता छोड़कर त्याग करता है वैसे ही एक बेटी विवाह उपरांत संत बनती है वो अपना परिवार माता पिता और अपनी सुख सुविधा त्याग कर जब ससुराल आती है वो किसी संत के त्याग से कम नहीं। भारती ने भक्ति का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि व्यक्ति की पहचान भक्ति से होनी चाहिए यही हमारी सनातन परंपरा कहती है किसी भी व्यक्ति को इसलिए नहीं पहचाना जाना चाहिए कि फलां व्यक्ति करोड़ों का मालिक या फलां भवन का स्वामी है बल्कि इसलिए पहचान होनी चाहिए कि अमुक व्यक्ति वो है जो भगवान की कथा प्रतिवर्ष कथा कराने वाला है या प्रतिदिन मंदिर जाने वाला है इसी जीवन का ध्येय होना चाहिए। इससे पहले इन्होंने परीक्षित श्राप मोचन और सुखदेव के जन्म के सुंदर प्रसंगों का बखान किया ।

भास्कर संवाददाता | सागर

तिली रोड पर स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में चल रही संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास आस्था भारती ने शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए दहेज प्रथा पर गहरा कटाक्ष किया और कहा कि विवाह के बाद कोई बेटी से यह नहीं पूछता की बेटी क्या छोड़ कर आई, पूछा जाता है तो सिर्फ यही की बहू क्या-क्या दहेज लेकर आई।

जैसे एक महात्मा अथवा संत सांसारिक सुख परिवार की चिंता छोड़कर त्याग करता है वैसे ही एक बेटी विवाह उपरांत संत बनती है वो अपना परिवार माता पिता और अपनी सुख सुविधा त्याग कर जब ससुराल आती है वो किसी संत के त्याग से कम नहीं। भारती ने भक्ति का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि व्यक्ति की पहचान भक्ति से होनी चाहिए यही हमारी सनातन परंपरा कहती है किसी भी व्यक्ति को इसलिए नहीं पहचाना जाना चाहिए कि फलां व्यक्ति करोड़ों का मालिक या फलां भवन का स्वामी है बल्कि इसलिए पहचान होनी चाहिए कि अमुक व्यक्ति वो है जो भगवान की कथा प्रतिवर्ष कथा कराने वाला है या प्रतिदिन मंदिर जाने वाला है इसी जीवन का ध्येय होना चाहिए। इससे पहले इन्होंने परीक्षित श्राप मोचन और सुखदेव के जन्म के सुंदर प्रसंगों का बखान किया ।