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चित्र प्रदर्शनी में दिखा बापू के लिए कस्तूरबा गांधी का प्रेम

मोहन दास करमचंद गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत में महात्मा गांधी बनने तक की कहानी तो सभी जानते हैं। कई चित्र...

Bhaskar News Network| Last Modified - May 18, 2018, 06:05 AM IST

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चित्र प्रदर्शनी में दिखा बापू के लिए कस्तूरबा गांधी का प्रेम
मोहन दास करमचंद गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत में महात्मा गांधी बनने तक की कहानी तो सभी जानते हैं। कई चित्र भी देखें। लेकिन इस सफर में उनके हर कदम पर साथ रहीं कस्तूरबा गांधी के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं हैं। गांधी को महात्मा बनाने में कस्तूरबा की क्या भूमिका थी, उन्होंने किस तरह दक्षिण अफ्रीका से लेकर आजादी के लिए चले आंदोलनों में गांधीजी का साथ दिया।

इस भूमिका को समझाने के लिए गुरुवार को होटल राम सरोज में एक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। चित्र प्रदर्शनी को ‘बा-बापू के 150 वर्ष’ नाम दिया गया था। जिसमें कस्तूरबा और महात्मा गांधी की 70 तस्वीरों के माध्यम से बापू के जीवन में बा के महत्व को बताया। चित्र प्रदर्शनी का आयोजन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मृति समिति के माध्यम से किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ सागर विवि के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी, निधि जैन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवशंकर केसरी और समाजवादी विचारक रघु ठाकुर ने किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. बद्री प्रसाद ने किया और आयोजन समिति में प्रदीप गुप्ता, अतुल मिश्रा, रामकुमार पचौरी, अखिलेश केशरवानी, डॉ. विनोद तिवारी आदि शामिल रहे।

कस्तूरबा का घर जहां पर उनका जन्म हुआ तथा गांधी जी के साथ विवाह के पूर्व 13 वर्ष की उम्र तक रहीं।

भास्कर संवाददाता | सागर

मोहन दास करमचंद गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत में महात्मा गांधी बनने तक की कहानी तो सभी जानते हैं। कई चित्र भी देखें। लेकिन इस सफर में उनके हर कदम पर साथ रहीं कस्तूरबा गांधी के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं हैं। गांधी को महात्मा बनाने में कस्तूरबा की क्या भूमिका थी, उन्होंने किस तरह दक्षिण अफ्रीका से लेकर आजादी के लिए चले आंदोलनों में गांधीजी का साथ दिया।

इस भूमिका को समझाने के लिए गुरुवार को होटल राम सरोज में एक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। चित्र प्रदर्शनी को ‘बा-बापू के 150 वर्ष’ नाम दिया गया था। जिसमें कस्तूरबा और महात्मा गांधी की 70 तस्वीरों के माध्यम से बापू के जीवन में बा के महत्व को बताया। चित्र प्रदर्शनी का आयोजन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मृति समिति के माध्यम से किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ सागर विवि के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी, निधि जैन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवशंकर केसरी और समाजवादी विचारक रघु ठाकुर ने किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. बद्री प्रसाद ने किया और आयोजन समिति में प्रदीप गुप्ता, अतुल मिश्रा, रामकुमार पचौरी, अखिलेश केशरवानी, डॉ. विनोद तिवारी आदि शामिल रहे।

गांधी जी और कस्तूरबा दक्षिण अफ्रीका में पीके नायडू और उनके परिवार के साथ।

कस्तूरबा गांधी के साथ गोकुलदास (गांधीजी की बहन का बेटा), मणीलाल, रामदास और हरिलाल डरबन दक्षिण अफ्रीका 1899

महात्मा गांधी के पैरों को धोती कस्तूरबा गांधी, बारडोली, गुजरात जनवरी 1939

बैंक की नौकरी छोड़, 3 साल से देशभर में प्रदर्शनी लगा रहे रमेशचंद

बा-बापू की इन दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी केवल सागर में ही नहीं बल्कि पिछले तीन साल से देश के हर शहर में लगाई जा रही है। बा-बापू के संदेश को लेकर देशभर में प्रदर्शनियों का आयोजन करने वाले 68 साल के रमेशचंद शर्मा हैं। रमेशचंद कभी बैंक की नौकरी किया करते थे, लेकिन उन्होंने ग्राम स्वराज अभियान से जुड़ने के लिए नौकरी छोड़ दी और अब 2019 में बा-बापू की 150 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए पिछले तीन साल से देशभर में घूमकर प्रदर्शनी आयोजित कर रहे हैं।

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