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अधूरी "कचरा' प्लानिंग और पूरी राजनीति से फिसली स्वच्छता रैंक

स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के टॉप-3 शहरों के नाम घोषित होने के दूसरे दिन भी अन्य शहरों की रैंकिंग का खुलासा नहीं हो सका।...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 06:10 AM IST
स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के टॉप-3 शहरों के नाम घोषित होने के दूसरे दिन भी अन्य शहरों की रैंकिंग का खुलासा नहीं हो सका। यह लगभग तय हाे चुका है कि हम अपनी पिछली रैंक (23वीं)को भी बचा नहीं पाए। 52 केटेगरी में शामिल शहरों के बाद ही सागर शहर का नंबर लग सकता है। टॉप 60 में भी स्थान मिलने की कम ही उम्मीद है। पिछली बार फास्ट ग्रोइंग एंड मूविंग सिटी का अवार्ड मिला था। इस बार किसी भी केटेगरी में अवार्ड नहीं मिल पाया। इसकी बड़ी वजह है मसवासी ग्रंट में कचरा प्रोसेसिंग प्लांट का न लग पाना और निगम की अधूरी प्लानिंग। महापौर का मानना है कि हफसिली में कचरा प्लांट को लेकर ओछी राजनीति न होती तो आज परिणाम कुछ और होते।

स्वच्छता सर्वे खत्म होते ही शहर में सफाई को लेकर जस के तस हालात बन गए। डस्टबिन से कचरा बाहर गिर रहा है। टायलेट में गंदगी पसरी है। दरवाजे टूट गए। लोग खुले में शौच के लिए जाने लगे। निगम ने सर्वे टीम के जाते ही इस तरफ कभी मुड़कर नहीं देखा और न ही मॉनीटरिंग की।

ऐसे हालात में शहर कैसे देख सकेगा अच्छी रैंकिंग के सपने

सागर क्यों नहीं नं.-1 : क्योंिक हमें आदत नहीं है कचरा पेटी में कचरा डालने की।

अवार्ड सेरेमनी के दौरान पता चलेगी रैंक

Ãनिगम कमिश्नर अनुराग वर्मा का कहना है कि अभी केवल 52 केटेगरी में शामिल शहरों की जानकारी आई है। इन शहरों को अवार्ड सेरेमनी के दौरान अन्य शहरों की रैंकिंग की जानकारी लग सकती है। सागर को पिछली बार जिस केटेगरी में अवार्ड मिला था, वह तो इस बार इसलिए मुमकिन नहीं था, क्योंकि कॉम्पटीशन कई गुना बढ़ गया। देश के 4 हजार शहरों में से शहर का 23 वीं रैंक के ऊपर रैंक आना मुश्किल काम था।

प्लांट पर राजनीति से हुआ शहर का नुकसान

Ãमहापौर अभय दरे का कहना है कि इस बार हमें अवार्ड नहीं मिल पाया है और रैंकिंग भी पहले से गिर जाएगी। इसकी वजह भी सबको पता है। हफसिली में कचरा प्लांट को लेकर हुई ओछी राजनीति से शहर का नुकसान हो रहा है। मसवासी ग्रंट में यदि प्लांट लग गया होता तो प्रदेश के शहरों में सागर की बेहतर रैंकिंग के आसार बन सकते थे।