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महापौर ने झील के मलबे को सूखा समझ पैर रखा तो आधा धंस गया

झील की सफाई के लिए साइट देखने गुरुवार सुबह कदंबघाट बकौली तिराहे के पास पहुंचे महापौर अभय दरे मलबे में गिरते बचे।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:10 AM IST

महापौर ने झील के मलबे को सूखा समझ पैर रखा तो आधा धंस गया
झील की सफाई के लिए साइट देखने गुरुवार सुबह कदंबघाट बकौली तिराहे के पास पहुंचे महापौर अभय दरे मलबे में गिरते बचे। वे समझे थे कि मलबा सूख गया है, लेकिन जैसे ही उन्होंने उस पर पैर रखा तो आधा पैर अंदर चला गया। पास में खड़े निगम कमिश्नर अनुराग वर्मा व पार्षदों ने उन्हें पकड़ा और बाहर निकाला। महापौर का कहना है मैंने यह जानने के लिए जोखिम उठाया कि मलबा सूखा है या नहीं। फिलहाल हम झील में वाहन उतारने की स्थिति में नहीं हैं।

दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष अजय परमार ने डिसिल्टिंग की प्लानिंग में हुई देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब जेसीबी, पोकलिन मशीनों से डिसिल्टिंग का समय नहीं बचा। एक ही बारिश में मशीनें झील में फंस जाएंगी और आप भी।

बेहतर होगा कि इस साल केवल श्रमदान के जरिए विभिन्न दलों व संगठनों के सहयोग से घाटों और किनारे की मिट्टी ही साफ कराएं। यदि शासन की राशि खर्च हुई तो काम के फर्जी बिल ही हाथ लगेंगे। महापौर मोगा बंधान के बाद भट्टो घाट, बरियाघाट, गंगा मंदिर के पास, गणेश घाट, चकराघाट एवं बस स्टैंड स्थित बकौली तिराहा के सामने झील का जायजा लिया। कांग्रेस व जनसहयोग से तालाब के घाटों से निकाली जा रही मिट्टी फिंकवाने के लिए उन्होंने निगम से वाहन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सभी लोग चाहते है कि हमारी ऐतिहासिक धरोहर लाखा बंजारा झील स्वच्छ एवं सुंदर हो इसके लिए सभी लोग स्वेच्छा से सहयोग करना चाहते हैं। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता महेश अहिरवार, पार्षद श्वेता यादव, सीताराम पचकोड़ी, शारदा कोरी, डाॅ.प्रणय कमल खरे, सहायक यंत्री पूरनलाल अहिरवार, राजेश सिंह, अकील खान आदि मौजूद थे।

झील की सफाई के दौरान जायजा लेने के लिए उतरे मेयर का पैर कीचड़ में फंस गया।

भास्कर संवाददाता | सागर

झील की सफाई के लिए साइट देखने गुरुवार सुबह कदंबघाट बकौली तिराहे के पास पहुंचे महापौर अभय दरे मलबे में गिरते बचे। वे समझे थे कि मलबा सूख गया है, लेकिन जैसे ही उन्होंने उस पर पैर रखा तो आधा पैर अंदर चला गया। पास में खड़े निगम कमिश्नर अनुराग वर्मा व पार्षदों ने उन्हें पकड़ा और बाहर निकाला। महापौर का कहना है मैंने यह जानने के लिए जोखिम उठाया कि मलबा सूखा है या नहीं। फिलहाल हम झील में वाहन उतारने की स्थिति में नहीं हैं।

दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष अजय परमार ने डिसिल्टिंग की प्लानिंग में हुई देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब जेसीबी, पोकलिन मशीनों से डिसिल्टिंग का समय नहीं बचा। एक ही बारिश में मशीनें झील में फंस जाएंगी और आप भी।

बेहतर होगा कि इस साल केवल श्रमदान के जरिए विभिन्न दलों व संगठनों के सहयोग से घाटों और किनारे की मिट्टी ही साफ कराएं। यदि शासन की राशि खर्च हुई तो काम के फर्जी बिल ही हाथ लगेंगे। महापौर मोगा बंधान के बाद भट्टो घाट, बरियाघाट, गंगा मंदिर के पास, गणेश घाट, चकराघाट एवं बस स्टैंड स्थित बकौली तिराहा के सामने झील का जायजा लिया। कांग्रेस व जनसहयोग से तालाब के घाटों से निकाली जा रही मिट्टी फिंकवाने के लिए उन्होंने निगम से वाहन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सभी लोग चाहते है कि हमारी ऐतिहासिक धरोहर लाखा बंजारा झील स्वच्छ एवं सुंदर हो इसके लिए सभी लोग स्वेच्छा से सहयोग करना चाहते हैं। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता महेश अहिरवार, पार्षद श्वेता यादव, सीताराम पचकोड़ी, शारदा कोरी, डाॅ.प्रणय कमल खरे, सहायक यंत्री पूरनलाल अहिरवार, राजेश सिंह, अकील खान आदि मौजूद थे।

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