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चैटिंग की ऐसी लत कि परेशान मां-बाप मदद मांगने पहुंचे थाने

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 06:10 AM IST

Sagar News - दोपहर को प्रिंसी को उसके माता-पिता और भाई मोतीनगर थाने लेकर पहुंंचे। जहां टीआई अनिलसिंह मौर्य ने उसे काफी समझाने...

चैटिंग की ऐसी लत कि परेशान मां-बाप मदद मांगने पहुंचे थाने
दोपहर को प्रिंसी को उसके माता-पिता और भाई मोतीनगर थाने लेकर पहुंंचे। जहां टीआई अनिलसिंह मौर्य ने उसे काफी समझाने की कोशिश की। लेकिन वह नहीं मानी। उसकी जिद थी कि वह अब घर नहीं जाना चाहती है। इसके बाद उन्होंने उसे सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश होने के लिए भेज दिया। लेकिन यहां भी बात नहीं बनी। वह सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश रावत के सामने बोली कि मुझे मां-बाप के साथ नहीं रहना। मैं अपनी सहेली के साथ रहूंगी। कोई रास्ता नहीं देख, रावत ने उसे जिला बाल कल्याण समिति के पास काउंसिलिंग के लिए भेज दिया। यहां पहुंचने के बाद भी वह मां-बाप के साथ लौटने को तैयार नहीं हुई। नतीजतन उसने कैँट थाना क्षेत्र के श्यामपुरा गांव में स्थित सेवाधाम अाश्रम में रहने के लिए भेज दिया गया।

पुलिस, सिटी मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति की समझाइश के बाद भी घर लौटने को नहीं हुई तैयार

भास्कर संवाददाता | सागर

मोतीनगर थाना क्षेत्र में रहने वाली एक 16 वर्षीय प्रिंसी (बदला हुआ नाम) को सोशल मीडिया का ऐसा चस्का लगा कि उसे अब अपने मां-बाप के साथ रहना गवारा नहीं है। वह घर से निकल भागने के लिए इतनी आतुर है कि पिछले कुछ महीने में वह दो-तीन बार घर से भाग चुकी है। बीमा कंपनी में एजेंट का काम करने वाले उसके पिता और गृहिणी मां उससे इतनी परेशान हो चुके हैं कि वे गुरुवार को उसे मोतीनगर थाने लेकर पहुंच गए। पिता उमेश जैन का कहना था कि प्रिंसी हम लोगों की कोई बात नहीं सुनती। हमेशा फोन पर अपनी किसी सहेली से बातचीत करती रहती है या फिर वह वाट्सएप पर चैटिंग करती रहती है। अगर उसे टोको तो वह कभी फांसी लगाने की कोशिश करती है तो कभी घर से ही भाग निकलती है।

बोलती है, मुझे भाइयों की तरह आजादी चाहिए

प्रिंसी की मां का कहना है कि वह कहती है कि मुझे अपने भाइयों की तरह कही भी किसी भी जगह आने-जाने की छूट होना चाहिए। अपनी इसी तरह की जिद के चलते वह दो साल से कक्षा 10 वीं में फेल हो रही है। बीते दिनों वह जिद कर अपनी नानी के घर चली गई। 15 दिन वहां गुजारने के बाद लौटी तो घर नहीं अाकर अपनी किसी सहेली के यहां जाकर रुक गई। हम लोगों ने उसे जैसे-तैसे ढूंढा और मना-समझाकर घर लाए।

बाल कल्याण समिति भी हारी, सेवाधाम में रहने के लिए भेजा

सेवाधाम पहुंचने पर बोली, यहां ठीक है, मां-बाप के बिना ये बच्चे भी तो पल रहे हैं

पहले थाना, फिर सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट और फिर बाल कल्याण समिति के सामने रो-धोकर अपना दुखड़ा सुनाने वाली प्रिंसी का चेहरा सेवाधाम अाश्रम में पहुंचते ही खिल उठा। उसने कहा कि सरकार ने जब इतनी अच्छी व्यवस्था कर रखी है तो मैं क्यों वापस जाउंगी। हालांकि आश्रम प्रबंधन ने उसका मोबाइल सेट गेट पर ही जमा करा लिया था। इसके बावजूद वह राजी-खुशी वहां रहने को तैयार हो गई।

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