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पार्टी से मेंडेट नहीं मिला और नामांकन फॉर्म में 10 से कम प्रस्ताव-समर्थक मिले तो फॉर्म हो जाएगा रिजेक्ट

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से बगावत दिखाकर या अंतिम समय तक मेंडेट मिलने के भरोसे के साथ जिन्होंने पार्टी के...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:51 AM IST
Sagar - mandate was not received from the party and in less than 10 proposals in the nomination form the form will be rejept
विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से बगावत दिखाकर या अंतिम समय तक मेंडेट मिलने के भरोसे के साथ जिन्होंने पार्टी के नाम पर ही नामांकन फाॅर्म भरे हैं, उनका भविष्य 12 नवंबर को तय होगा। इस दिन नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी होना है।

इस दौरान जिन लोगों ने नामांकन फॉर्म में पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ने की जानकारी भरी है, उन्होंने यदि मेंडेट नहीं लगाया तो यह देखा जाएगा कि उनके फॉर्म में कितने प्रस्तावक-समर्थकों के हस्ताक्षर हैं। दरअसल, पार्टी प्रत्याशी के लिए 4 प्रस्तावक-समर्थक तो निर्दलीय के लिए 10 के हस्ताक्षर होना जरूरी है। ऐसे में पार्टी के नाम पर नामांकन भरने वालों के आवेदन में यदि प्रस्तावक और समर्थक 10 से कम हुए और मेंडेट नहीं मिला तो फॉर्म निरस्त हो जाएगा। वहीं पार्टी से मेंडेट नहीं मिला, लेकिन प्रस्ताव-समर्थक 10 से ज्यादा हुए तो तो अभ्यर्थी को निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की अनुमति मिल जाएगी।

हालांकि 14 नवंबर को नाम वापसी के दिन उनके पास एक मौका भी रहेगा कि उन्हें अपना फॉर्म वापस लेना है या निर्दलीय के रूप में ही चुनाव लड़ना है। गौरतलब है कि रहली और बंडा विधानसभा में कांग्रेस ने अपने जो उम्मीदवार घोषित किए हैं, उससे अधिक संख्या में अभ्यर्थियों ने कांग्रेस के नाम पर नामांकन जमा किए हैं। बंडा में जहां पार्टी ने तरवर सिंह लोधी को प्रत्याशी घोषित किया है, वहीं से पूर्व विधायक नारायण प्रजापति ने भी कांग्रेस के नाम पर ही नामांकन फॉर्म जमा किया है। उधर रहली में कांग्रेस ने जहां कमलेश साहू को प्रत्याशी घोषित किया है, वहां से 4 और आवेदन कांग्रेस के नाम पर ही भरे गए हैं। इनमें जिला पंचायत सदस्य ज्योति पटेल, अधिवक्ता राजेंद्र चौबे, सौरभ हजारी एवं बीडी पटेल के नाम शामिल हैं। सागर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी शैलेंद्र जैन के अलावा राजकुमार जैन ने भी बीजेपी के नाम पर ही फॉर्म भरा है। उन्हें डमी अभ्यर्थी कहा जा रहा है। इनके आवेदनों की जांच 12 नवंबर को होगी। इसी के बाद यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कितनों के फॉर्म रिजेक्ट होंगे तो कौन निर्दलीय के रूप में भी लड़ने के लिए पात्र होगा।

बहरहाल इसी पेंच के चलते अब कई लोग पशोपेश में हैं कि यदि पार्टी से मेंडेट नहीं मिला और फॉर्म भी रिजेक्ट हो गया तो उनके पास नाम वापसी की मान-मनव्वल तक के लिए कोई नहीं अाएगा।

ज्योति के हैं बागी सुर, पिता ने भी भरा है निर्दलीय फॉर्म

कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद भी नामांकन जमा करने वाले बंडा से नारायण प्रजापति फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं रहली के भी अन्य चार में 3 अभ्यर्थी चुप हैं। सिर्फ ज्योति पटेल ने ही ताल ठोकी है कि उन्होंने क्षेत्र में हुई पैराशूट लैंडिंग के संबंध में प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ से मिलकर अपना पक्ष रख दिया है। ज्योति के पिता पल्टूराम पटेल ने भी निर्दलीय नामांकन जमा किया है, शायद इसी रणनीति के तहत कि यदि फॉर्म रिजेक्ट हुआ तो वे खुलकर मैदान में आ सकें।

भास्कर संवाददाता | सागर

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से बगावत दिखाकर या अंतिम समय तक मेंडेट मिलने के भरोसे के साथ जिन्होंने पार्टी के नाम पर ही नामांकन फाॅर्म भरे हैं, उनका भविष्य 12 नवंबर को तय होगा। इस दिन नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी होना है।

इस दौरान जिन लोगों ने नामांकन फॉर्म में पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ने की जानकारी भरी है, उन्होंने यदि मेंडेट नहीं लगाया तो यह देखा जाएगा कि उनके फॉर्म में कितने प्रस्तावक-समर्थकों के हस्ताक्षर हैं। दरअसल, पार्टी प्रत्याशी के लिए 4 प्रस्तावक-समर्थक तो निर्दलीय के लिए 10 के हस्ताक्षर होना जरूरी है। ऐसे में पार्टी के नाम पर नामांकन भरने वालों के आवेदन में यदि प्रस्तावक और समर्थक 10 से कम हुए और मेंडेट नहीं मिला तो फॉर्म निरस्त हो जाएगा। वहीं पार्टी से मेंडेट नहीं मिला, लेकिन प्रस्ताव-समर्थक 10 से ज्यादा हुए तो तो अभ्यर्थी को निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की अनुमति मिल जाएगी।

हालांकि 14 नवंबर को नाम वापसी के दिन उनके पास एक मौका भी रहेगा कि उन्हें अपना फॉर्म वापस लेना है या निर्दलीय के रूप में ही चुनाव लड़ना है। गौरतलब है कि रहली और बंडा विधानसभा में कांग्रेस ने अपने जो उम्मीदवार घोषित किए हैं, उससे अधिक संख्या में अभ्यर्थियों ने कांग्रेस के नाम पर नामांकन जमा किए हैं। बंडा में जहां पार्टी ने तरवर सिंह लोधी को प्रत्याशी घोषित किया है, वहीं से पूर्व विधायक नारायण प्रजापति ने भी कांग्रेस के नाम पर ही नामांकन फॉर्म जमा किया है। उधर रहली में कांग्रेस ने जहां कमलेश साहू को प्रत्याशी घोषित किया है, वहां से 4 और आवेदन कांग्रेस के नाम पर ही भरे गए हैं। इनमें जिला पंचायत सदस्य ज्योति पटेल, अधिवक्ता राजेंद्र चौबे, सौरभ हजारी एवं बीडी पटेल के नाम शामिल हैं। सागर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी शैलेंद्र जैन के अलावा राजकुमार जैन ने भी बीजेपी के नाम पर ही फॉर्म भरा है। उन्हें डमी अभ्यर्थी कहा जा रहा है। इनके आवेदनों की जांच 12 नवंबर को होगी। इसी के बाद यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कितनों के फॉर्म रिजेक्ट होंगे तो कौन निर्दलीय के रूप में भी लड़ने के लिए पात्र होगा।

बहरहाल इसी पेंच के चलते अब कई लोग पशोपेश में हैं कि यदि पार्टी से मेंडेट नहीं मिला और फॉर्म भी रिजेक्ट हो गया तो उनके पास नाम वापसी की मान-मनव्वल तक के लिए कोई नहीं अाएगा।

Ãजिन्होंने पार्टी के नाम पर नामांकन भरा है यदि उनके पास मेंडेट नहीं है तो यह देखा जाएगा कि उनके फॉर्म में कितने प्रस्तावक-समर्थक हैं। यदि यह संख्या 10 से कम रही तो फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा। पार्टी उम्मीदवार के लिए कुल 4 प्रस्तावक-समर्थक तो निर्दलीय के लिए 10 प्रस्तावक-समर्थक होना जरूरी है। - आलोक कुमार सिंह, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी

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