23 दिन में 11 कराेड़ रु. से ज्यादा की सट्‌टा बुकिंग का अनुमान, पुलिस काे अब तक मिला 35 लाख का हिसाब

Sagar News - मकराेनिया की एस्टेट काॅलाेनी में कम्युनिकेटर मशीन के जरिए अाईपीएल क्रिकेट का सट्टा खिलाने वालाें ने 23 दिनाें में...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:56 AM IST
Sagar News - mp news 11 crore rupees in 23 days estimates of speculative booking of more than 35 lakhs so far
मकराेनिया की एस्टेट काॅलाेनी में कम्युनिकेटर मशीन के जरिए अाईपीएल क्रिकेट का सट्टा खिलाने वालाें ने 23 दिनाें में 11 कराेड़ से ज्यादा की बुकिंग ली थी, एेसा अनुमान लगाया जा रहा है। दरअसल, कटनी, सागर समेत अन्य प्रदेश के अन्य जिलाें में हवाला के जरिए लेनदेन के लिए बुकी रखे गए थे। 23 मार्च से शुरू हुए अाईपीएल के मैचाें में हर दिन करीब 50 लाख का सट्टा लगाया जा रहा था। उधर मकराेनिया पुलिस ने सटाेरियाें काे तीन दिन तक की रिमांड पर लिया है। उनसे पूछताछ अाैर माैके से मिले बुकिंग के रिकाॅर्ड के अनुसार अब तक 35 लाख का ही हिसाब मिला है। इनके अाैर किन शहराें से तार जुड़े थे, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है।

एक सटोरिए की तबीयत बिगड़ी, खेलने वालाें में सागर के लाेग भी शामिल : क्रिकेट सट्टे का मास्टर माइंड कटनी का रहने वाला ऋषांक जायसवाल है। पूछताछ के दाैरान मंगलवार काे आकाश जयसिंघानी का बीपी बढ़ गया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार उसके साथ पकड़े गए रोशन सेवलानी, आकाश जयसिंघानी और उमरिया निवासी राजेश सिंह बिसेन लंबे समय से सट्टा काराेबार से जुड़े हुए हैं। पिछले अाईपीएल सीजन में भी इन्हाेंने कटनी से सट्टे खिलाया था। कटनी के अलावा सागर के भी क्रिकेट प्रेमी सट्टा लगा रहे थे। यहां के कुछ सटाेरियाें की मुंबर्ई, दिल्ली से लेकर दुबई तक पहुंच बताई जा रही है। गाैरतलब है कि मकराेनिया पुलिस ने सागर एस्टेट कॉलोनी से टेली मार्केटिंग में उपयोग होने वाली कम्युनिकेटर मशीन के जरिए मोबाइल फोन पर सट्टा की बुकिंग लेते जिन चार लाेगाें काे पकड़ा था उनके पास से पुलिस को कम्युनिकेटर के अलावा 15 मोबाइल फोन, दो लैंड लाइन फोन, बुकिंग रजिस्टर, 23 सिम व 40 सिम के कवर और 74 हजार 500 रु. नकद मिले थे। जिस मकान में सट्टा चल रहा था उसे सटाेरियाें ने इस तरह से सेफ करके रखा था कि माेबाइल पर हाेने वाली बातचीत बाहर सुनाई न दे।

अाैर भी राज खुलेंगे, दूसरे प्रदेश से जुड़े हाे सकते हैं गिराेह के तार : एडिशनल एसपी राजेश व्यास का कहना है कि सटाेरियाें से अभी तक लगभग 35 लाख का हिसाब मिला है। अभी अाैर भी राज खुल सकते हैं। यह भी पड़ताल चल रही है कि गिराेह के तार दूसरे प्रदेश के किन-किन शहराें से जुड़े थे। उनसे फर्जी तरीके से खरीदी गई माेबाइल सिमाें की साइबर सेल के जरिए जांच चल रही है। सागर में कम्प्युनिकेटर मशीन के जरिए क्रिकेट सट्टा खिलाने का यह पहला मामला सामने अाया है। दूसरे राज्याें में भी इस तरह के केस पकड़े जा चुके हैं।

मोबाइल एप के जरिए भी चल रहा "खेल';

ज्यादातर बच्चे ही हो रहे शिकार

सागर। इस बार आईपीएल सीजन के शुरू होने के साथ कुछ ऐसे मोबाइल एप भी लॉच हुए हैं, जिनमें सट्टे की तरह ही टीम, खिलाड़ी और खेल का पूर्वानुमान लगाकर पहले राशि जमा कराई जाती है। यदि अनुमान सही हुआ तो रुपए दोगुने और गलत हुआ तो जमा की गई राशि एप बनाने वाली कंपनी की हो जाती है। हैरानी की बात तो यह है कि इस तरह की मोबाइल एप का खुलेआ प्रचार-प्रसार िकया जा रहा है, जिसके कारण इस खेल का सबसे ज्यादा शिकार स्कूली बच्चे हो रहे हैं।

इधर भी ध्यान देना होगा





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