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सागर में जैन समाज के 60 मंदिर, इनमें से तीन में मूलनायक के रूप में विराजमान हैं भगवान महावीर, पटनागंज में 800 साल पुरानी है प्रतिमा

Sagar News - संदीप तिवारी/हेमंत जैन | सागर सागर शहर में जैन समाज के 60 मंदिर हैं। इन सभी में जैन समाज के विभिन्न तीर्थंकरों के...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:00 AM IST
Sagar News - mp news 60 temples of jain society in the ocean three of them are situated in the form of a masterpiece lord mahavir 800 years old in patnaganj
संदीप तिवारी/हेमंत जैन | सागर

सागर शहर में जैन समाज के 60 मंदिर हैं। इन सभी में जैन समाज के विभिन्न तीर्थंकरों के साथ ही भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। परंतु तीन मंदिर ऐसे हैं, जिनमें जैन धर्म के चौबीसवें एवं अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की मूलनायक के रूप में प्रतिमाएं विराजमान हैं। मूलनायक प्रतिमाएं यानी जिस प्रतिमा के नाम पर मंदिर की स्थापना की जाती है। वही मूलनायक प्रतिमा कहलाती हैं। सागर में मंगलगिरी, नेहानगर औैर परकोटा वन वे पर स्थित जैन मंदिर में भगवान महावीर स्वामी की मूलनायक प्रतिमाएं विराजमान हैं। सागर जिले के जैन मंदिरों में स्थापित ज्यादातर प्रतिमाएं 900 से लेकर 1000 साल तक पुरानी हैं। इन प्रतिमाओं का निर्माण 10वीं सदी से लेकर 19वीं सदी के बीच किया गया था।

यह खुलासा कुछ साल पहले डाॅ. वीएस वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान भोपाल द्वारा किए गए सर्वे में हुआ था। संस्थान द्वारा किए गए सागर जिले के जैन मंदिरों के सर्वेक्षण में एक हजार से अधिक ऐतिहासिक प्रतिमाओं की जानकारी सामने आई है। संस्थान द्वारा 70 मंदिरों का अध्ययन उनमें प्रतिष्ठित 1300 प्रतिमाओं का डॉक्यूमेंटेशन किया गया है। इन प्रतिमाओं में 183 पाषाण, 482 संगमरमर 635 धातु की हैं, जिनकी स्थापना 10 वीं शती ईसवी से 19 वीं सदी के बीच अलग-अलग तारीखों में की गई थी।

शहर-जिला

मंगलगिरी

परकोटा वन-वे

नेहा नगर

पटनागंज रहली

देश और दुनिया में जैन धर्म और भगवान महावीर स्वामी के दुलर्भ मंदिर और प्रतिमाएं हैं

राजस्थान में महावीरजी के नाम से प्रसिद्ध है मंदिर

संपूर्ण भारत में जैन धर्म के पवित्र स्थानों में से एक मंदिर राजस्थान में श्री महावीरजी नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर श्री भगवान महावीर स्वामी का भव्य विशाल मंदिर है। यह दिगंबर जैन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। गंभीर नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में 24वें तीर्थंकर श्रीवर्धमान महावीरजी की मूर्ति विराजित है। यहां खुदाई में भगवान महावीर की प्राचीन मूर्ति निकली। यह मंदिर मूल रूप से सफेद और लाल पत्थरों से बना है जिसके चारों ओर छत्रियां बनी हुई हैं। यहां वर्ष में सिर्फ एक बार महावीर जयंती पर ही मेला लगता है।


ब्रिटिश संग्रहालय में है पहले और अंतिम तीर्थंकर की दुनिया इकलौती प्रतिमा

आदिनाथ भगवान और महावीर भगवान की एक ही पत्थर पर खड़गासन प्रतिमा। दुनिया भर में ये इकलौती प्रतिमा है जिसमें प्रथम तीर्थंकर और अंतिम तीर्थंकर एक साथ एक ही पत्थर पर हैं। यह प्रतिमा 11वीं-12वीं शताब्दी की है। इसमें बाईं तरफ भगवान आदिनाथ और दाहिनी तरफ भगवान महावीर हैं। ये पहले उड़ीसा में थी। सन 1830 में जोन ब्रिज ने इसे खरीदा था। उनके मृत्यु के बाद प|ी ने 1872 में इस प्रतिमा को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में दान कर दिया।


अमेरिका के सेनफ्रांसिसको में भी है महावीर स्वामी का मंदिर

अमेरिका के शहर सेनफ्रांसिसको में भी जैन मंदिर है। वहीं रह रहे खुरई के नेहा और पीयूष गुरहा ने यह तस्वीर भेजकर बताया है कि वहां पर महावीर जयंती मनाई जाएगी।

देश का छठा बड़ा धर्म है जैन धर्म

जैन ग्रंथों के अनुसार वर्तमान में प्रचलित जैन धर्म भगवान आदिनाथ के समय से प्रचलन में आया। यहीं से जो तीर्थंकर परंपरा प्रारंभ हुई वह भगवान महावीर या वर्धमान तक चलती रही जिन्होंने ईसा से 527 वर्ष पूर्व निर्वाण प्राप्त किया था। भारत में जैन धर्म छठा सबसे बड़ा धर्म है। भारत की 1.028 अरब जनसंख्या में 45 लाख लोग जैन धर्म के अनुयायी हैं। लक्षद्वीप काे छाेड़कर देश में हर राज्य में जैन धर्मावलंबी हैं।

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