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विवि में अनियमितताओं के आरोप लगाने वाले चार कर्मचारियों को प्रशासन ने थमाए नोटिस

एक वर्ष पहले
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डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में जारी अनियमितताओं तथा अन्याय के खिलाफ गठित हुए विश्वविद्यालय बचाओ संघर्ष मोर्चा से जुड़े कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासन ने दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभिन्न विभागों में कार्यरत चार कर्मचारियों को छंटनी लिस्ट में डालने की चेतावनी भरे नोटिस जारी किए हैं। कर्मचारियों से तीन दिन में जवाब मांगा गया है।

जानकारी के अनुसार 19 फरवरी को विवि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संदीप बाल्मीकी समेत शहर के अन्य लोगों ने मिलकर विश्वविद्यालय बचाओ संघर्ष मोर्चा का गठन किया था। गठन से लेकर अब तक हुई मोर्चा की बैठकों में कर्मचारी संघ अघ्यक्ष और विवि कर्मचारी बाल्मीकी, जयंत जैन, अशोक मिश्रा तथा पूर्व कोषाध्यक्ष गोपाल रजक शामिल हुए।

मोर्चा की बढ़ती गतिविधियों से बौखलाए विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब इससे जुड़े विश्वविद्यालय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने हाल ही में विश्वविद्यालय के कर्मचारी संदीप बाल्मीकी, जयंत जैन, अशोक मिश्रा तथा गोपाल रजक को चेतावनी भरे नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि कटरा स्थित डॉ. गौर अध्ययन केंद्र के सामने विश्वविद्यालय विरोधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संस्था के कर्मचारी होने के बाद भी इन गतिविधियों में आप शामिल हो रहें हैं। यह आचरण कर्तव्य के प्रति लापरवाही है। तीन दिन में इस नोटिस का जवाब दे कि आपके खिलाफ औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के प्रावधानों के तहत छंटनी की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।

यह विश्वविद्यालय के अफसरों की तानाशाही

विश्वविद्यालय बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अखिलेश केशरवानी ने विवि की इस कार्रवाई को तानाशाही का जीता जागता उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय दमनकारी नीति अपनाकर कुलपति के इशारे पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कर्मचारियों से ऐसी कार्रवाईयों से नहीं डरने का आह्वान किया है।


अनियमितताओं का विरोध दर्ज कराना अपराध हो गया : मोर्चा के संयोजक संदीप बाल्मीकी का कहना है कि विवि की दमनात्मक नीतियों को कंधे से कंधा मिलाकर जवाब दिया जाएगा। व्हिसिल ब्लोअर एक्ट यह प्रावधान है कि संस्था का कोई भी कर्मचारी शिकायत अधिकारियों से कर सकता है और विरोध भी दर्ज करा सकता है।

अध्ययन केंद्र के सामने विश्वविद्यालय विरोधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संस्था के कर्मचारी होने के बाद भी इन गतिविधियों में आप शामिल हो रहें हैं। यह आचरण कर्तव्य के प्रति लापरवाही है। तीन दिन में इस नोटिस का जवाब दे कि आपके खिलाफ औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के प्रावधानों के तहत छंटनी की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
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