12 साल बाद गुरु का मकर में प्रवेश 19 काे
बृहस्पति की कृपा के लिए यह करें उपाय
12 साल बाद गुरू ग्रह अपनी नीच राशि मकर मंे प्रवेश करने जा रहा है। 19 मार्च काे गुरु अपनी नीच राशि में प्रवेश करेगा। जबकि 20 मार्च 2020 तक रहेगा।
यानी पूरे एक साल तक मंगल अपनी नीच राशि में रहेगा। जाे बुद्धि भ्रम, बुद्धि में दाेष उत्पन्न करेगा। लेकिन एेसे जातक जिनकी राशि में गुरू उच्च का या शुभ, स्व राशि का है, उनकाे शुभ फल देगा। जिनकी कुंडली में मकर का गुरू है। उनकाे शुभ फल न देकर अशुभ फल देगा। शांति के लिए जप एवं दान करना चाहिए। इससे शुभ फल प्राप्त हाेगा। वहीं 18 माह बाद मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल भी अपनी उच्च राशि मकर में पहुंच रहे हैं। इस प्रकार से देखा जाए ताे एक सप्ताह के भीतर दाे ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पंडित रामगोविंद शास्त्री ने बताया कि मंगल के अपनी उच्च राशि में पहुंचने से मेष, वृश्चिक राशि वाले जातक जिनका स्वामी मंगल है या जिनकी कुंडली में उच्च का या स्व राशि का मंगल है, उनकाे शुभ फल देगा। मंगल राजनीति का राजा है। जाे कि उच्च पद पर भी लाेगाें काे अासीन कराता है। इसके साथ ही भूमि के भावाें में भी वृद्धि कराएगा। हनुमानजी की साधना से शीघ्र फल की प्राप्ति हाेगी। मंगल का उच्च राशि में प्रवेश गर्मी काे बढ़ाएगा। आरोग्यता देगा। विभिन्न तरह की बीमारियाें से निजात दिलाएगा। क्रोधावेश देगा। जिसमें शांति जरूरी हाेगी। गर्म पदार्थों के सेवन से जातकों काे बचना चाहिए।
18 माह बाद 23 काे मंगल भी पहुंचेंगे अपनी उच्च राशि मंे
मंगल 23 मार्च काे अपनी उच्च राशि में पहुंच जाएगा। जाे कि 5 मई 2020 तक रहेगा। मकर राशि में स्थित होने पर मंगल को उच्च का मंगल कहा जाता है। उच्च का मंगल साहस प्रदान करने वाला, ऊर्जावान होकर अनेक सफलताओं का कारक होता है। कई तरह से चली आ रही बाधाएं भी दूर करता है।
सप्ताह के भीतर दाे ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पंडित रामगोविंद शास्त्री ने बताया कि मंगल के अपनी उच्च राशि में पहुंचने से मेष, वृश्चिक राशि वाले जातक जिनका स्वामी मंगल है या जिनकी कुंडली में उच्च का या स्व राशि का मंगल है, उनकाे शुभ फल देगा। मंगल राजनीति का राजा है। जाे कि उच्च पद पर भी लाेगाें काे अासीन कराता है। इसके साथ ही भूमि के भावाें में भी वृद्धि कराएगा। हनुमानजी की साधना से शीघ्र फल की प्राप्ति हाेगी। मंगल का उच्च राशि में प्रवेश गर्मी काे बढ़ाएगा। आरोग्यता देगा। विभिन्न तरह की बीमारियाें से निजात दिलाएगा। क्रोधावेश देगा। जिसमें शांति जरूरी हाेगी। गर्म पदार्थों के सेवन से जातकों काे बचना चाहिए।
जिन राशि के जातकों के लिए गुरु अनिष्टकारी हो वे गुरु की शांति के लिए बृहस्पति स्तोत्र, बृहस्पति कवच का पाठ करें। गुरु मंत्र- ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः या ऊं गुं गुरवे नमः के 19 हजार जाप स्वयं करें या पंडित से करवाएं। गुरुवार का व्रत करें। पीले धान्य का भोजन करें एवं पीले वस्त्र गुरुवार को धारण करें। श्रीहरि का नियमित पूजन करें। पीपल, केले के वृक्ष का पूजन करें। गुरु यंत्र को घर में स्थापित करके पूजन करें। गुरु के बीज मंत्रों से हवन करें। तर्जनी अंगुली में पुखराज र| या उपर| सुनहला- लाजवर्त मणि धारण करें। पीले वस्त्र, पीले धान जैसे चने की दाल, पीतल, कांसा पात्र, हल्दी, सुवर्ण, धार्मिक ग्रंथ रामायण, गीता आदि दान करें।