माेबाइल चलाने व टीवी देखने से क्षणिक सुख की ही अनुभूति होती है : अाचार्यश्री

Sagar News - विषयानुभूति, कषाय अनुभूति और दुखानुभूति को छोड़कर श्रृद्धानुभूति बनाओ। मोबाइल चलाते हुए और टीवी चैनल को देखते...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:05 AM IST
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विषयानुभूति, कषाय अनुभूति और दुखानुभूति को छोड़कर श्रृद्धानुभूति बनाओ। मोबाइल चलाते हुए और टीवी चैनल को देखते हुए व्यापार, खाना और भोग भोगते हुए मनुष्य पाप कमाता है और उसमें क्षणिक सुखानुभूति होती है लेकिन वह सांस्कारिक सुख भी दुख का कारण है। क्योंकि रागमय कारण है और राग मोह द्वेष दुखानुभूति देने वाले है।

यह बात अंकुर कॉलोनी पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान आचार्यश्री निर्भय सागर महाराज ने कही। उन्होंने ने कहा कि परमात्मा के दर्शन पूजन और संत की सत्संग सेवा में जो हमें श्रृद्धानुभूति होती है वहीं हमें सम्यक दृष्टि श्रेष्ठ मानव बनाती है। श्रृद्धा भक्ति हमें मुक्ति पथ पर अग्रसर करती है। आचार्यश्री ने राजा श्रैणिक का उदाहरण देते हुए बताया कि राजा श्रैणिक को चेलना रानी ने दृढ़ धर्म श्रृद्धानी बनाया और धर्म मार्ग पर अग्रसर किया। महिलाओं के आगे इसीलिए धर्मप|ी लगाया जाता है क्योंकि स्वयं भी धर्म करती है और अपने पति एवं परिवार को भी धर्म पर लगाती है। रानी चेलना के कारण राजा श्रैणिक इतना धर्मात्मा हो गया कि वह भविष्य में तीर्थंकर के पथ को प्राप्त करेगा।

आचार्यश्री ने कहा कि बालक बालिकायें बाहर के खूबसूरत साैंदर्य को देखकर आकर्षित होकर प्रेम जाल में फंसकर घर परिवार को छोड़कर जीवन खराब कर रहे हैं, जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि मत फिसलो यार ऊपर की चिकनाई पर। वर्क चांदी का लगा है गोबर की मिठाई पर। आज बाहरी सौंदर्य के पीछे हम भाग रहे हैं। आत्मिक सौंदर्य को प्राप्त करो, क्योंकि शरीर में अंदर गंदगी भरी है और क्षणभर के सुख के लिए जीवन बर्बाद करना कैसी बुद्धिमानी है। क्षुल्लक चंद्रदत्त सागर महाराज ने कहा कि हमें पुण्य से वर्षा योग मिला है। प्रतिदिन धर्मलाभ लेने के लिए अपने संसारिक कार्यक्रमों से कुछ समय निकालो और ज्ञानार्जन करो। हमें जो समय धर्म त्याग, पूजन, दर्शन, सत्संग में देते है, वही समय सार्थक होता है। बाकी सब पाप में जाता है। आचार्य संघ में मुनिश्री शिवदत्त सागर, हेमदत्त सागर, ऐलक सुदत्त सागर एवं क्षुल्लक सूर्यदत्त सागर, चंद्रदत्त सागर शामिल हैं। मुनिसेवा समिति के सदस्य मनोज जैन लालो ने बताया कि 15 अप्रैल सोमवार को दोपहर में 1 बजे से चातुर्मास कलश स्थापना समारोह हाेगा।

चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर : सिद्धचक्र महामंडल विधान में 128 अर्घ्य चढ़ाए गए

सागर। कटरा नमक मंडी स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में आज 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। रविवार की सुबह भक्तांबर विधान के साथ 256 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। विधानाचार्य पंडित उदयचंद शास्त्री और विवेक शास्त्री के निर्देशन में विधान चल रहा है। सायंकाल महाआरती के बाद कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जा रही है। क्षुल्लिका उपासनामति माताजी ने कहा कि जिस किसी भी व्यक्ति के जीवन में परेशानी और समस्याएं हो या कोई रोग लग गया है तो शांतिधारा उसके नाम से की जाये तो वह व्यक्ति जल्द ही स्वस्थ्य हो जाता है। आज शांतिधारा का सौभाग्य निशांत जैन, अरुणिमा जैन, सौधर्म इंद्र राजीव जैन, वंदना जैन एवं अजीत जैन को प्राप्त हुअा। सौधर्म इंद्र परिवार द्वारा महाआरती लाई गई।

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