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मुख्यमंत्री और सरकार का पतानहीं, फिर भी तैयार हो रहेविधानसभा के सवालों के जवाब

एक वर्ष पहले
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प्रदेश से कांग्रेस की कमलनाथ सरकार की छुट्टी हो चुकी है। लगभग तय है कि अगली सरकार भाजपा की बनेगी लेकिन मुख्यमंत्री कौन और कौन, किस विभाग का मंत्री होगा ये किसी को पता नहीं है। इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर-कर्मचारी विधानसभा के बजट सत्र के लिए लगाए गए सवालाें के जवाब बनाने में जुटे हैं। यह सत्र 16 मार्च से 13 अप्रैल 2020 तक प्रस्तावित था। लेकिन सत्र के पहले ही दिन राज्यपाल के अभिभाषण के बाद यह सत्र 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इधर शुक्रवार को कमलनाथनीत सरकार का इस्तीफा भी हो गया। सवालों का जवाब बनाने में जुटे अधिकारियों का कहना है कि नई सरकार के गठित होने तक ये प्रक्रिया रोकी जाना चाहिए।

सरकार को घेरने जो सवाल लगाए, उनका खुद को क्या जवाब देंगे ?

राजस्व से लेकर पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य विभाग, पीएचई, उद्योग आदि से विभागों से जुडे ये ये सवाल भाजपा और कांग्रेसी विधायकों ने लगाए थे। जिस समय सवाल लगाए थे, उस समय भाजपा विपक्ष में थी, इसलिए उनमें से कुछेक का आशय सरकार को घेरने वाला था। लेकिन चूंकि अब भाजपा खुद ही सरकार बनाने जा रही है तब इन सवालों का जवाबों का क्या होगा। उनका सुर कैसा रहेगा, यह सवाल जवाब बनाने वालों के मन में भी कौंध रहा है। उदाहरण के लिए खुरई से विधायक भूपेंद्रसिंह ने अवैध उत्खनन को लेकर एक सवाल लगाया था, जिसमें उन्होंने खनिज विभाग द्वारा की कार्रवाइयों का ब्योरा पूछा था। गाेपाल भार्गव ने अतिवृष्टि में किसानों को प्रदान की राहत समेत पीएम-किसान के बारे में पूछा था। प्रदीप लारिया ने नई व पुरानी कलेक्टोरेट में कौन-कौन सी शाखाएं शिफ्ट हुईं। खुरई में अंग्रेज जमींदार एवर्ट की जमीन संबंधी विवाद के बारे में सवाल लगाया था।

प्रश्नकाल का नहीं पता लेकिन शून्यकाल और ध्यानाकर्षण उपयोगी

मप्र विधानसभा के वरिष्ठ विधायक शैलेंद्र जैन का कहना है कि ऐसा मौका शायद दशकों बाद आया है, जब सवाल पूछने वाले खुद जवाब देने वाले की भूमिका में आ गए। बहरहाल शून्यकाल और ध्यानाकर्षण के तहत लगाए गए सवालों का जवाब तो विधायकों को डाक के द्वारा दे दिया जाता है, जिसका वह संबंधित विभाग, क्षेत्र के विकास या सुधार में कर लेते हैं। प्रश्नकाल में चुने जाने वाले सवालों काे लेकर जरूर असमंजस की स्थिति रहेगी। बहुत मुमकिन है कि इन्हें अब अगले सत्र तक के लिए ड्राप कर दिया जाए।

Ãविधानसभा के सवालों का जवाब देना अनिवार्य होता है। इस बारे में सीनियर अफसर लगातार रिमाइंडर भेजते हैं। हमारी जवाबदेही समय सीमा में मांगी गई जानकारी भेजना है।
-प्रीति मैथिल नायक,
कलेक्टर, सागर

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