नाटक: मंच पर उतारा भारत-पाकिस्तान के विभाजन का दर्द, दिखा मानवीय मूल्यों का महत्व

Sagar News - डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं प्रदर्शनकारी विभाग द्वारा सोमवार शाम जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई...

Bhaskar News Network

Jul 16, 2019, 09:00 AM IST
Sagar News - mp news drama extraction of india pakistan split on the stage importance of human values showing
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं प्रदर्शनकारी विभाग द्वारा सोमवार शाम जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई नाटक का मंच किया गया। मशहूर कहानीकार और लेखक असगर वजाहत के इस नाटक को भारत पाकिस्तान के विभाजन की पृष्ठभूमि पर लिखा है। जिसका मंचन डॉ. राकेश सोनी के निर्देशन में हुआ। नाटक के लिए ओपन स्टेट पर सेट लगाया गया था, जिसमें विभाजन के समय की झलक साफ नजर आ रही थी। वहीं कब्बालों के साथ नाटक में सूफी संगीत दिया गया। कलाकारों ने नाटक के मंचन के दौरान विभाजन के बाद लखनऊ से लाहौर पहुंचे एक परिवार की कहानी को दर्शकों के सामने रखा। जिसमें सरकारी अधिकारी सिकंदर मिर्जा नाम के एक शख्स को लाहौर में बड़ा मकान मिलता है। लेकिन जब वह इसमें रहने के लिए पहुंचता है तो यहां पहले से एक बूढ़ी हिंदू महिला मिल जाती है, जो विभाजन के समय भारत नहीं पहुंच सकी। इसके बाद मिर्जा परिवार बूढ़ी महिला के साथ रहने लगता है। नाटक में संघर्ष की स्थिति तब बनती है जब एक शहर के गुंडे को हिंदू महिला के घर में होने का पता लगता है। लेकिन मिर्जा परिवार इसके बाद भी महिला को नहीं छोड़ता। जब बूढ़ी महिला की मृत्यु हो जाती हैै। नाटक में मानवीय और सामाजिक मूल्यों के प्रति सजग रहने का संदेश कलाकारों ने बखूबी मंच पर उतारा। इस दौरान विभाग के विद्यार्थी अरविंद गुडेले, करिश्मा गुप्ता, मनोहर राय, मंजरी श्रीवास्तव, कृति रामपाल, बालमुकंद अहिरवार, निक्की, अशवंत, नरेंद्र सिंह, मयंक त्रिवेदी, गोविंद जड़िया, विवेकानंद सोनी आदि ने नाटक पात्रों की भूमिका निभाई। वहीं विश्वविद्यालय के महिला क्लब का भी सहयोग रहा।

भास्कर संवाददाता | सागर

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं प्रदर्शनकारी विभाग द्वारा सोमवार शाम जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई नाटक का मंच किया गया। मशहूर कहानीकार और लेखक असगर वजाहत के इस नाटक को भारत पाकिस्तान के विभाजन की पृष्ठभूमि पर लिखा है। जिसका मंचन डॉ. राकेश सोनी के निर्देशन में हुआ। नाटक के लिए ओपन स्टेट पर सेट लगाया गया था, जिसमें विभाजन के समय की झलक साफ नजर आ रही थी। वहीं कब्बालों के साथ नाटक में सूफी संगीत दिया गया। कलाकारों ने नाटक के मंचन के दौरान विभाजन के बाद लखनऊ से लाहौर पहुंचे एक परिवार की कहानी को दर्शकों के सामने रखा। जिसमें सरकारी अधिकारी सिकंदर मिर्जा नाम के एक शख्स को लाहौर में बड़ा मकान मिलता है। लेकिन जब वह इसमें रहने के लिए पहुंचता है तो यहां पहले से एक बूढ़ी हिंदू महिला मिल जाती है, जो विभाजन के समय भारत नहीं पहुंच सकी। इसके बाद मिर्जा परिवार बूढ़ी महिला के साथ रहने लगता है। नाटक में संघर्ष की स्थिति तब बनती है जब एक शहर के गुंडे को हिंदू महिला के घर में होने का पता लगता है। लेकिन मिर्जा परिवार इसके बाद भी महिला को नहीं छोड़ता। जब बूढ़ी महिला की मृत्यु हो जाती हैै। नाटक में मानवीय और सामाजिक मूल्यों के प्रति सजग रहने का संदेश कलाकारों ने बखूबी मंच पर उतारा। इस दौरान विभाग के विद्यार्थी अरविंद गुडेले, करिश्मा गुप्ता, मनोहर राय, मंजरी श्रीवास्तव, कृति रामपाल, बालमुकंद अहिरवार, निक्की, अशवंत, नरेंद्र सिंह, मयंक त्रिवेदी, गोविंद जड़िया, विवेकानंद सोनी आदि ने नाटक पात्रों की भूमिका निभाई। वहीं विश्वविद्यालय के महिला क्लब का भी सहयोग रहा।

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