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80 फीट नीचे उतरा भूजल स्तर, सूखने लगे बोर, 90 नलजल योजनाएं बंद, 1000 हैंडपंपों ने दम तोड़ा

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:35 AM IST

Sagar News - जिले में इस बार गर्मी शुरु होने के पहले ही जल संकट ने दस्तक दी। एक -एक कर बंद हो रहे नलकूपों के कारण गावों में पीने के...

Sagar News - mp news groundwater level dropped below 80 feet bore drying 90 nasal schemes closed 1000 handpumps broke down
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जिले में इस बार गर्मी शुरु होने के पहले ही जल संकट ने दस्तक दी। एक -एक कर बंद हो रहे नलकूपों के कारण गावों में पीने के पानी की समस्या मार्च में ही बढ़ी है। जिम्मेदार अधिकारी पिछले सालों के समान इस बार भी स्थिति को सामान्य बता रहे हैं। हकीकत कुछ और है। पंचायतों एवं गांवों की नल-जल योजनाएं बंद हो जाने से पेय जल की समस्या बढ़ने लगी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार से जिले में 664 नल-जल योजनाएं हैं। इनमें से 584 योजनाओं को विभाग चालू बता रहा है। विभागीय अधिकारी का दावा है कि 123 योजनाओं में स्पाट पर जल प्रदाय होता, केवल 90 नलजल योजनाएं बंद हैं।

ये है सच, जो अधिकारियों को नहीं दिखता : जिले की हर चौथी पंचायत की नलजल योजना से वहां के वाशिंदों को शिकायत है। यानी 584 में से 146 नल जल येाजनाएं बंद हैं। किसी की मोटर खराब तो कहीं पानी कम आने की समस्या से लोग जूझ रहे है। कई जगहों पर तो यह देखने में आया है महीने में मात्र चार-पांच दिन ही नल-जल योजना का पानी लोगों को मिल पाता है और बाकी दिन सप्लाई बंद पड़ी रहती है। ऐसा है जिले की 355 पंचायतों को हाल। जबकि कुल पंचायतें 755 है। वहीं बंद पड़े हैंडपंप नहीं सुधारे गए, नल जल योजनाएं भी लापरवाही की भेंट चढ़ रहीं है। आलम यह है कि पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए हैण्डपंप बंद पड़े हैं, कहीं फाउंडेशन टूटा पड़ा है तो कही नल का आधा हिस्सा ही गायब हो गया है। लोग परेशान है क्योंकि उन्हें कई किलोमीटर दूर से पीने का पानी लेकर आना पड़ रहा है। जिले में भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरने के कारण इस बार फरवरी में ही कुएं, नदी, नाले व तालाब सूख गए हैं। जल स्तर सामान्य सक 80 फीट नीचे गिर चला गया है। जिले में 10822 हैंडपंप में 550 बंद है। जाे चालू हैं उनमें पर्याप्त पानी नहीं है। पीएचई अधिकारी मान रहे है कि जिले में इस बार भी सामान्य से 6 इंच औसत बारिश कम हुई। इससे गर्मी में जलसंकट प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनेगा है। जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो सके, कुओं में जो पानी था उससे किसानों ने सिंचाई कर ली है। इस बार औसत42 इंच से बारिश 6 इंच कम हुई। इसके कारण भी जल स्तर में गिरावट मुख्य कारण माना जा रहा है।

यह हैं वे 5 मुख्य कारण जिससे भूजल स्तर गिरा






पीएचई के कार्यपालन यंत्री एमसी अहिरवार ने कहा गर्मी में ऐसे निपटेंगे पेयजल संकट से गर्मी के मौसम में जिन 410 गावों में पेयजल संकट की स्थिति बनेगी।उन गावों में पेयजल संकट से निपटने 620 लाख की कार्य योजना बनाई गई है।

110 गावों में नए नलकूप का खनन और हैंडपंप लगाएंगे।

35 गावाें की नलजल योजना में नए स्त्रोत नलकूप खुदवाए जाएंगे।

300 गावों में सिंगल फेस माेटर पंप की स्थापना।

1300 हैंडपंपों में राइजर पाइप विस्तार और 700 नलकूपों की हाइड्रोफैक्चरिंग का काम प्रस्तावित किया गया है ।

सुरेंद्र यादव | सागर

जिले में इस बार गर्मी शुरु होने के पहले ही जल संकट ने दस्तक दी। एक -एक कर बंद हो रहे नलकूपों के कारण गावों में पीने के पानी की समस्या मार्च में ही बढ़ी है। जिम्मेदार अधिकारी पिछले सालों के समान इस बार भी स्थिति को सामान्य बता रहे हैं। हकीकत कुछ और है। पंचायतों एवं गांवों की नल-जल योजनाएं बंद हो जाने से पेय जल की समस्या बढ़ने लगी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार से जिले में 664 नल-जल योजनाएं हैं। इनमें से 584 योजनाओं को विभाग चालू बता रहा है। विभागीय अधिकारी का दावा है कि 123 योजनाओं में स्पाट पर जल प्रदाय होता, केवल 90 नलजल योजनाएं बंद हैं।

ये है सच, जो अधिकारियों को नहीं दिखता : जिले की हर चौथी पंचायत की नलजल योजना से वहां के वाशिंदों को शिकायत है। यानी 584 में से 146 नल जल येाजनाएं बंद हैं। किसी की मोटर खराब तो कहीं पानी कम आने की समस्या से लोग जूझ रहे है। कई जगहों पर तो यह देखने में आया है महीने में मात्र चार-पांच दिन ही नल-जल योजना का पानी लोगों को मिल पाता है और बाकी दिन सप्लाई बंद पड़ी रहती है। ऐसा है जिले की 355 पंचायतों को हाल। जबकि कुल पंचायतें 755 है। वहीं बंद पड़े हैंडपंप नहीं सुधारे गए, नल जल योजनाएं भी लापरवाही की भेंट चढ़ रहीं है। आलम यह है कि पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए हैण्डपंप बंद पड़े हैं, कहीं फाउंडेशन टूटा पड़ा है तो कही नल का आधा हिस्सा ही गायब हो गया है। लोग परेशान है क्योंकि उन्हें कई किलोमीटर दूर से पीने का पानी लेकर आना पड़ रहा है। जिले में भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरने के कारण इस बार फरवरी में ही कुएं, नदी, नाले व तालाब सूख गए हैं। जल स्तर सामान्य सक 80 फीट नीचे गिर चला गया है। जिले में 10822 हैंडपंप में 550 बंद है। जाे चालू हैं उनमें पर्याप्त पानी नहीं है। पीएचई अधिकारी मान रहे है कि जिले में इस बार भी सामान्य से 6 इंच औसत बारिश कम हुई। इससे गर्मी में जलसंकट प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनेगा है। जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो सके, कुओं में जो पानी था उससे किसानों ने सिंचाई कर ली है। इस बार औसत42 इंच से बारिश 6 इंच कम हुई। इसके कारण भी जल स्तर में गिरावट मुख्य कारण माना जा रहा है।

रि-चार्जिंग ही समस्या का निदान

भू-जलविद सुबोध ताम्रकार का कहना है कि सागर में ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में भूजल का स्तर तेजी घट रहा है। असल में इस स्थिति का कारण लोगों द्वारा बनाई गई चीजें ही प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर रही हैं। पेड़-पौधे लगातार कम हो रहे, इसके साथ ही नदियां, तालाब और तलैया सूखते जा रहे हैं. इससे भूजल सूखता जा रहा है।सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 56 प्रतिशत कुओं में भूजल का स्तर गिरा है।

जनता की सुनो,अफसर नहीं सुनते






110 गावों में नए नलकूप का खनन और हैंडपंप लगाएंगे।

35 गावाें की नलजल योजना में नए स्त्रोत नलकूप खुदवाए जाएंगे।

300 गावों में सिंगल फेस माेटर पंप की स्थापना।

1300 हैंडपंपों में राइजर पाइप विस्तार और 700 नलकूपों की हाइड्रोफैक्चरिंग का काम प्रस्तावित किया गया है ।

अभी ये हाल हैं तो अप्रैल-मई में क्या होगा

गर्मी शुरू हाेने से पहले ही पथरिया जाट ग्राम पंचायत में पानी की किल्लत शुरु हो गई। इसका सबसे बड़ी कारण पंचायत में लगे 18 हैंड पंपों मेंं से 15 हैंडपंपों का बंद होना। केवल तीन हैंडपंप से पानी निकलता है।अब गांव की महिलाएं यहां एक से डेढ़ किमी दूर से पानी भरकर लाती है। जल संकट की ऐसी ही तस्वीर कर्रापुर, सानौधा, डुंगासरा गांव में नजर आने लगी है। कर्रापुर में नल जल योजना के चार नल कूप में से 2 नल कूप जलस्तर घटने के कारण सूख गए। हैंडपंप सूख गए हैं, जिसके कारण यहां पर पानी की किल्लत होना शुरु हो गई। सरपंच ममता पवार ने बताया पानी की समस्या को लेकर गांव के लोग कई बार पंचायत में शिकायत कर चुके हैं। हमने उनकी शिकायत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के अधिकारियों तक पहुंचाई। लेकिन नए बोर कराने या पुराने बोर की गहराई बढ़ाने के लिए कहीं कुछ नहीं हुआ।






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