दर्पण में तो शरीर दिखता है, प्रभु के दर्शन हाेने पर ही आत्मा के दर्शन हाेंगे : आचार्यश्री

Sagar News - सभी भक्त लोग चौबीसी भगवान की भक्ति करते हुए लीन हो जाते हैं। आत्मा के अलावा मुझ में कुछ भी नहीं है। मंदिर जाने की...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:05 AM IST
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सभी भक्त लोग चौबीसी भगवान की भक्ति करते हुए लीन हो जाते हैं। आत्मा के अलावा मुझ में कुछ भी नहीं है। मंदिर जाने की भावना बनाने में दो उपवास का फल मिलता है। इसी तरह मंदिर की शिखर देने मात्र से 6 माह के उपवास का फल मिलता है। मंदिर के बाहर पहुंचने पर एक वर्ष के उपवास का फल मिलता है। भगवान के पूजन और दर्शन करने से अनंतानंद उपवासों का फल मिलता है।

यह बात आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर काकागंज में चल रहे तीन दिवसीय याग मंडल विधान के दूसरे दिन आचार्यश्री आर्जव सागर महाराज ने कही। आचार्यश्री ने कहा कि कांच का दर्पण तो शरीर को दिखता है। जब प्रभु के दर्शन देखोगे ताे आत्मा के दर्शन होंगे। अगर आप महाराजों के दर्शन करेंगे तो आपके अनेक पापों का क्षय होता है। सभी को अपने पापों के प्रच्छालन के लिए प्रति-श्रमण करना चाहिए। स्वर्ण सुसज्जित वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए शुक्रवार को याग मंडल विधान हुआ। सुबह श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा हुई। प्रथम शांतिधारा संतोष जैन सपन जैन बहेरिया वाले ने एवं द्वितीय शांतिधारा संतोष जैन सौरभ जैन ने की।

इसके बाद आचार्यश्री का पाद प्रच्छालन डाॅ. सुनील जैन ने किया। सभी ने आचार्यश्री की मंगल देशना सुनी। याग मंडल विधान में सभी इंद्र इंद्राणियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। शाम को महाआरती मुनि सेवा संघ के अध्यक्ष श्रीयांश जैन के घर से काकागंज गाजे बाजे के साथ पहुंची। महोत्सव के अंतिम दिन शनिवार को स्वर्ण सुसज्जित वेदी पर श्रीजी विराजमान होंगे । इस मौके पर शहर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे।

गढ़ाकाेटा की हीराबाई का अंकुर कॉलोनी में संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण हुआ

सागर | आचार्यश्री निर्भय सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में शुक्रवार काे अंकुर काॅलाेनी स्थित विद्या भवन में गढ़ाकोटा निवासी प्रेमचंद्र जैन की प|ी हीराबाई 78 वर्ष का संल्लेखना पूर्वक समाधिमरण दोपहर 3.20 बजे हुअा। मनोज जैन लालो ने बताया कि 12 मई को हीराबाई ने आकर संल्लेखना व्रत धारण किया था। उन्होंने जल को छोड़कर अन्य सभी पदार्थों के सेवन का त्याग करके दस प्रतिमा ग्रहण की थी। 5 दिन में कठिन साधना एवं णमोकार मंत्र के साथ आचार्यश्री के संघ सहित सभी का वैरागमयी उद्बोधन पाकर उन्होंने अंतिम सांस ली। ब्रह्मचारी सुनील भैया सागर ने भी बैराग में पाठ सुनाया। हीराबाई के दो बेटे व तीन बेटियां हैं। उन्होंने मकरोनिया अंकुर कॉलोनी से गढ़ाकोटा ले जाया गया। जहां अंतिम संस्कार हुआ। संल्लेखना के समय ब्रह्मचारिणी लवली दीदी बहन एवं उनके परिजन लोग भी मौजूद थे।

शांतिधारा नवग्रहों की बाधा को समाप्त करती है : निर्भय सागर

सागर | अंकुर काॅलाेनी में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि विश्व शांति की भावना से शांतिधारा की जाती है। तन, मन, धन से दुखी प्राणी को भगवान का नाम उच्चारण सुखी करता है। समस्त विश्व में सुख शांति हो आदि व्याधि न हो इसलिए भगवान की प्रतिमा पर जल द्वारा शांतिधारा की जाती है। आचार्यश्री ने कहा कि अनेक अक्षरों से मिलकर बीजाक्षर बनता है। बीजाक्षरों में बहुत शक्ति होती है ऐसी शांतिधारा जब तक बीजाक्षरों मंत्रों के साथ करते हैं तो ध्वनि तरंगें शांति में कारण बनती है। आचार्यश्री ने कहा कि पुदगल तरंगों में ऐसी क्षमता होती है कि वह एक समय में संपूर्ण लोक में व्याप्त हो सकती है। जैन धर्म में शांतिधारा का विशेष महत्व बताते हुए आचार्यश्री ने कहा कि तीर्थंकर पुष्पदंत स्वामी से लेकर धर्मनाथ स्वामी तक धर्म का विच्छेद रहा है। किंतु शांतिनाथ भगवान के बाद जैन धर्म का विच्छेद नहीं हुआ। और आगे धर्म चलता रहे, सुख शांति बनी रहे, इसलिए शांतिनाथ भगवान के मस्तक पर ही शांतिधारा करते हैं।

आचार्यश्री ने नवग्रहों के बारे में कहा कि शांतिधारा में तीर्थंकरों के नामों का उच्चारण करते हैं। क्योंकि तीर्थंकरों के जन्म नक्षत्र और शरीर का रंग नवग्रहों के र|ों के समान है इसलिए इन तीर्थंकरों पर प्रतिदिन शांतिधारा करते हैं तो नवग्रहों की पीड़ा बाधा शांत होती है। कमेटी द्वारा र|करंड श्रावकाचार्य छह ढाला ग्रंथ की वाचना के लिए श्रीफल भेंट कर निवेदन किया।

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