इंटरव्यू जरा हटके  प्रतीक गौतम

Sagar News - कल रात रिपोर्टर को घर की छत से आवाजें सुनाई पड़ीं। देखने के लिए गया तो एलियंस को सामने पाया। पिछले दिनों एक न्यूज...

Bhaskar News Network

Jun 15, 2019, 06:35 AM IST
BAREHATA News - mp news interview a little away symbol gautam
कल रात रिपोर्टर को घर की छत से आवाजें सुनाई पड़ीं। देखने के लिए गया तो एलियंस को सामने पाया। पिछले दिनों एक न्यूज चैनल ने एक विमान के लापता होने का कारण एलियंस को बता दिया था। उसी बात से नाराज़ होकर कुछ युवा एलियन शिकायत सुनाने आए थे।

रिपोर्टर: पर आप लोग इतनी रात को क्यों आए हैं?

एलियन: सॉरी, वो टाइम जोन अलग है न और हमारे यहां इस टाइम पर ही मम्मी-पापा घर से निकलने देते हैं।

रिपोर्टर: लगता है आप लोगों पर काफी बंदिशें हैं?

एलियन: पहले नहीं थीं, आप लोगों के कारण हैं। हमें चोर बताते हैं आप लोग।

रिपोर्टर: नहीं हैं तो घबराते क्यों हैं? घरवालों को सच बता दीजिए।

एलियन: धरती पर मां-बाप बच्चों की सुनते हैं जो हमारे यहां सुनेंगे? हमारे यहां UFO उड़ाने वाला तेल महंगा है। जब से ऐसी बातें सुनी, गाड़ी मिलनी भी बंद हो गई।

रिपोर्टर: एक गलत बात के कारण तो ये हुआ न होगा, कुछ गलती आपकी भी होगी?

एलियन: कोई गलती नहीं थी, इसके पहले भी आप लोगों ने ही इल्ज़ाम लगाया था कि हम गाय का दूध पीते हैं और गाय चुरा ले जाते हैं।

रिपोर्टर: वो तो काफी पुरानी बात हो गई?

एलियन: उस बात के चक्कर में हमारे यहां गायों पर बैन लग गया है। आपको पता है सारे एलियंस फोटो में हड्डी के ढांचे जैसे क्यों दिखते हैं? क्योंकि हम सच में बिना दूध के कुपोषित हो गए हैं।

रिपोर्टर: आपकी बहुत-सी शिकायतें हैं। ये बताइए हम आपके लिए क्या कर सकते हैं?

एलियन: कम से कम फिल्मों में हमें विलेन मत दिखाया करिए। उस कारण हमें घरवालों के सामने नीचा देखना पड़ता है।

 ह्यूमर ट्यूमर  सौरभ जैन


-तब तो तमिलनाडु में इस पर बैन लग जाएगा?


- रॉबर्ट वाड्रा ने साइट विजिट करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय से अनुमति मांगी है।


- तो भानगढ़ के किले में भूत से टीवी रिपोर्टर की बात वाली कहानी अब पुरानी हो गई है क्या?


- जगन रेड्डी की जगह योगी आदित्यनाथ होते तो इस झंझट को जड़ से ही खत्म करने के लिए मंत्री पद का नाम बदलकर उपमुख्यमंत्री रख देते।


- बड़ा अजीब मुल्क है। इनके राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या तो पद पर रहते हैं या फिर जेल में।


- इस बयान पर कांग्रेस से ज्यादा खुशी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में है।


- इस तूफान के नाम में अपनेपन की फीलिंग आती है, वरना फैनी, हुदहुद तो नाम से ही पराए लगते थे।

 हास्य बत्तीसी  इस्माइल लहरी

 कटाक्ष  देवाशीष

ट्रेन में मसाज के बाद मिले जूते सुरक्षित रखने की सुविधा

भारतीय रेलवे ने हमेशा चौंकाया है। इस बार रेलवे ने ट्रेनों में मसाज की सुविधा और रेलवे स्टेशन पर मसाज पार्लर खुलवाने की बात कहकर चौंका दिया। ट्रेन से मेरी उम्मीदें कम ही होती हैं। ट्रेन में बैठे-बैठे मुझे कच्ची मूंगफली के स्वस्थ दाने भी मिल जाएं तो मैं मान लेता हूं, भारत बुलेट ट्रेन वाले देशों से आगे निकल चुका है।

मेरे लिए ट्रेनों की बेहतरी का मतलब यही है कि मैं आराम से नीचे की अपनी सीट पर पसरा रहूं और कोई बहानेबाज़ कमरदर्द का बहाना मार मेरी सीट न हथिया पाए। जब से मसाजसेवा की बात सुनी, इसमें समाजसेवा नजर आई। अब जाकर राहत मिली है क्योंकि बदनदर्द का बहाना मारने वालों का आख़िरी सहारा भी जाता रहा।

लालच इस कदर बढ़ गया है कि मेरे मन में नई-नई मांगें उठ रही हैं। मैं चाहता हूं, अब रेलवे जल्द ही स्लीपर डिब्बों में शू-रैक भी रखवा दे। इतिहास गवाह रहा है कि स्लीपर क्लास में हमेशा सबसे आलसी लोग सवार हुए हैं। जो चढ़ते ही सिर्फ सो जाना चाहते थे। ऐसे शांतिप्रिय लोगों में भी अगर विवाद की स्थिति आई है, तो उस आदमी के कारण जो शू-रैक के अभाव में अपना जूता चलते पंखे के ऊपर रख देता था।

अगर ये सुविधा दे दी जाती है, तो मैं चाहूंगा ट्रेन में एक जगाने वाला भी हो। ट्रेन के झूले में जिन लोगों को कुंभकरणी नींद आती है कि रात को अपने स्टेशन से निकल जाते हैं, ये आदमी उन्हें जगाने के काम आएगा।

 ये सवाल नॉनसेंस है 

तो बाइक की बैक

सीट के लिए बीवी और मानसून में लड़ाई होती

हम पाठकों से एक नॉनसेंस सवाल पूछते हैं। पिछली बार पूछा था - अगर आप मानसून को बाइक पर बैठाकर ला पाते तो क्या होता? चुनिंदा जवाब :









इस हफ्ते का नॉनसेंस सवाल

अगर क्रिकेट मैच में मशीनों से गेंदबाजी करवाई जाती तो क्या होता?

इस सवाल जवाब मेल करें : Humour@dbcorp.in

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