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साहित्यकार को मानवीय संवेदनाअाें के प्रति सजग रहना जरूरी: जैन
नगर के कवि निर्मल चंद निर्मल की 21वीं काव्य कृति जगत मेला चला चल का विमोचन मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन सागर इकाई द्वारा आदर्श संगीत महाविद्यालय में रविवार को हुअा।
इस माैके पर निर्मल को उनके 90वें जन्मदिन का जिक्र करते हुए समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने कहा कि इस उम्र में भी निर्मलजी का साहित्य के प्रति प्रेम व समर्पण अभिभूत कर देने वाला है। उन्होंने कहा कि कविता श्रंगार की वस्तु नहीं है। निर्मलजी का मन बेहद निर्मल है, वे लगातार सक्रिय हैं। दर्शन के काव्य का संपूर्ण जगत में मान होता है। मुख्य अतिथि भाेपाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. उदय जैन ने कहा कि किसी भी साहित्यकार के लिए बड़ा मुकाम हासिल करने के लिए मानवीय संवेदनाअाें के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है। निर्मलजी के साहित्य में यह साफ झलकता है। निर्मलजी के जीवन और साहित्यिक अवदान से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेना चाहिए। अध्यक्षता कर रहे प्रो. सुरेश आचार्य ने कहा कि अच्छी कविता के लिए अपने समय, समाज, संस्कृति और साहित्य की जानकारी होना अनिवार्य है। इस मायने में निर्मलजी बहुपठ और बहुश्रुत हैं। इसीलिए उनकी रचनाएं काव्य के इतिहास में अपना स्थान अवश्य बनाएंगी। विशिष्ट अतिथि डॉ. लक्ष्मी पांडेय ने कहा कि जिस दार्शनिकता की पृष्ठभूमि पर सारे जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन होता है। उसी आधार पर चल अचल को जोड़कर यह संसार बनता है। निर्मलजी के संस्कारी व्यक्तित्व ने उनकी संतानों को भी संस्कारी बनाया है यह उनकी कविता की ही उपलब्धि है। पुस्तक पर समीक्षा लेख प्रस्तुत करते हुए आयोजक संस्था मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन सागर की उपाध्यक्ष डॉ. चंचला दवे ने कहा कि किसी भी कृति की समीक्षा साहित्य की संवाहक होने के साथ परिष्कारक भी होना चाहिए। यह कविता संग्रह उदार भावों की प्रतिस्थापना, मानवीय मूल्यों का संरक्षण, विकास एवं उन सब में जीवन के लिए जगह बनाने का काम करता है। यह संग्रह कवि के लक्ष्यों को सुंदरता से पूर्ण करता है। टीकाराम त्रिपाठी ने कहा कि मैंने उनकी समस्त कृतियों का अध्ययन किया है, उनका रचना कर्म उच्च स्तरीय और पठनीय है। स्वर संगम समिति के अध्यक्ष हरि सिंह ठाकुर ने जीवन परिचय का वाचन किया। कवि निर्मल ने सभी का आभार जताया। लोक गायक देवीसिंह राजपूत ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उमाकांत मिश्र ने कार्यक्रम परिचय दिया। संचालन प्रदीप पांडेय एवं कपिल बैसाखिया ने किया। आभार आरके तिवारी ने माना।