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साहित्यकाराें ने महाकवि पद्माकर काे लगाई गुलाल फिर खेली हाेली, रात में हास्य और व्यंग्य से हंसाया

एक वर्ष पहले
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रंगों के पर्व होली का उत्साह शहर में हर ओर दिखाई दे रहा है। पांच दिवसीय इस पर्व की शुरुआत नगर के कवि-साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने पिछले 46 वर्षाें की तरह इस बार भी होली की शुरुआत चकराघाट पहुंचकर महाकवि पद्माकर की प्रतिमा पर गुलाल लगाने के बाद की। इसके बाद सभी ने एक-दूजे काे अबीर-गुलाल लगाया। शहर में दिन भर होली का जश्न जारी रहा। रात में तीन बत्ती पर कवि सम्मेलन हुआ।

चकराघाट पर हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार प्राे. सुरेश आचार्य ने कहा कि पद्माकरजी का इस अवसर पर स्नान किया जाना अद्भुत है। युवा पीढ़ी भी इस आयोजन से लगातार जुड़ रही है, यह अच्छी बात है। कार्यक्रम संचालक वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत चौबे ने कहा कि बुंदेलखंड की परंपरा है अपने अतीत को संजोकर रखना। उसी का पालन हम कर रहे हैं। डॉ. रजनीश जैन ने पद्माकर के अछूते छंदों को‌ प्रस्तुत किया। श्यामलम के अध्यक्ष उमाकांत मिश्र ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताया। बुंदेलखंड साहित्य संस्कृति विकास मंच के अध्यक्ष डॉ. सीताराम श्रीवास्तव, होली उत्सव के सहसंयोजक पूरन सिंह राजपूत ने इस कार्यक्रम को विशेष मानते हुए नई पीढ़ी के लिए संदेश बताया।

बुंदेलखंड हिंदी साहित्य संस्कृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष केके बख्शी, सरस्वती नाट्य मंच के राजेंद्र दुबे, प्रलेसं के टीआर त्रिपाठी, लेखक संघ के वृंदावन राय, देवकीनंदन रावत, दिनेश साहू, शिव रतन यादव अादि ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति दी। इस माैके पर पद्माकर समिति के मधुसूदन सिलाकारी, विजय चौबे, संतोष सिलाकारी, रानू ठाकुर, अमित चौबे, शरद जैन गुड्डू, शिखरचंद शिखर, आशीष निशंक, ऋषभ जैन, राजेश नामदेव सहित बड़ी संख्या में लाेग माैजूद थे।

40 कवियों ने पढ़ी रचनाएं, देर रात तक चलता रहा सम्मेलन

बुंदेलखंड हिंदी साहित्य संस्कृति विकास मंच के बैनर तले रंग उत्सव पर पर केंद्रित कवि सम्मेलन तीन बत्ती स्थित सरस्वती वाचनालय में हुअा। इसमें 40 कवियों ने हाेली पर केंद्रित अपनी हास्य-व्यंग्य की रचनाएं प्रस्तुत कर सभी काे खूब हंसाया। अध्यक्षता कर रहे निर्मल चंद निर्मल एवं जेपी पांडे ने कहा कि लगातार हाेते अा रहे इस कार्यक्रम का इंतजार शहरवासी साल भर करते हैं, यही इसकी सफलता का प्रमाण है। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक सुनील जैन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता बनी रहनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि नरेश जैन थे। पूरन सिंह राजपूत और राधा कृष्ण व्यास के संचालन में सत्कार के साथ हास्य व्यंग की बौछार पढ़ती रही। युवा कवि अभिषेक और अरिहंत ने ओज की कविताएं पढीं। शायर अशोक मिजाज, वृंदावन सरल ने जहां होली पर गजलें पढ़ीं वहीं अशोक तिवारी, मुकेश तिवारी, देवकीनंदन रावत, नरेंद्र जैन बिट्टी, दिनेश साहू ने हिंदी बुंदेली के व्यंग सुनाए। आयोजक संस्था की ओर से उमाकांत मिश्र एवं राजेश शास्त्री का सम्मान किया गया। शिवरतन यादव ने फागें सुनाईं। अबरार अहमद ने एकता भाईचारे पर मुक्तक सुनाए। डॉ. अरविंद गोस्वामी, केएल तिवारी अलबेला, राजू चौबे, पीआर मलैया, टीकाराम त्रिपाठी, एम शरीफ, पुष्पदंत हितकर, अारके तिवारी, अशोक तिवारी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में चंद्रकांत चौबे, मुकेश सोनी आदि का विशेष सहयोग रहा। आभार कपिल बैसाखिया एवं सीताराम श्रीवास्तव ने माना।

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