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निरस्त दो सवालों से बिगाड़ेगा 10वीं का गणित, सवाल हटाने पर परीक्षार्थियों ने कहा- इसमें हमारी क्या गलती है

एक वर्ष पहले
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हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूल की बोर्ड परीक्षाएं 2 मार्च से शुरू हो गई हैं और 31 मार्च तक चलेंगी। इस साल इन परीक्षाओं के तहत होने वाले पेपरों की कॉपियों का मूल्यांकन भी परीक्षाओं के दौरान ही शुरू हो जाएगा।

माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार पहले चरण में 21 मार्च से कॉपियों की जांच शुरू होगी। इसमें कक्षा 10वीं-12वीं में 2 से 17 मार्च के दौरान हुए विषयों के पेपर की कॉपियों को शामिल किया जाएगा। इनमें 10वीं के सामान्य संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, तृतीय भाषा सामान्य उर्दू, मराठी, गुजराती, पंजाबी सिंधी, गणित तथा विज्ञान विषय शामिल हैं। हायर सेकंडरी के विशिष्ट भाषा हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, सामान्य भाषा में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, मराठी, उर्दू, अन्य विषयों में इंफोरमेटिक प्रेक्टिस, इतिहास, फिजिक्स,
व्यवसाय अध्ययन, एली ऑफ साइंस एंड मेथेमेटस यूजफुल फॉर एग्रीकल्चर, गृहप्रबंध पोषण एवं वस्त्र विज्ञान, समाज शास्त्र, कृषि मानविकी, होम साइंस, इनवायरमेंटल एजुकेशन एंड रूरल डेवलपमेंट विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होगा। दूसरे चरण में 4 अप्रैल से 18 से 31 मार्च के दौराने होने वाले विषयों की परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन होगा।

हाईस्कूल में सामान्य भाषाओं में हिंदी, अंग्रेजी, विशिष्ट भाषाओं में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत तथा उर्दू विषय शामिल हैं। हायरसेकंडरी में विशिष्ट भाषा के उर्दू, बायोलॉजी, अर्थशास्त्र, उच्च गणित, बायोटेनोलॉजी, राजनीति शास्त्र, पशुपालन, विज्ञान के तत्व, भारतीय कला का इतिहास, व्यावसायिक अर्थशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, भूगोल, रसायन, फसल उपादन, शरीर रचना क्रिया विज्ञान एवं स्वास्थ्य तथा बुक कीपिंग एंड अकाउंटेंसी विषयों की कॉपियों का मूल्यांकन होगा। तीसरे चरण में 17 अप्रैल से दृष्टिहीन, मूक-बधिर दिव्यांग विद्यार्थियों की दोनों कक्षाओं के सभी विषयों की कॉपियों की चैकिंग की जाएगी।

कॉपियों का मूल्यांकन 21 मार्च से शुरू होगा

भास्कर संवाददाता | सागर

माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की 10वीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान के पेपर में आजाद कश्मीर से जुड़े दो सवाल हटाए गए हैं। मंडल ने इन दोनों प्रश्नों को निरस्त कर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 90 अंक में करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। मंडल के इस फैसले से विद्यार्थी नाराज हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि जो दो
प्रश्न निरस्त किए गए हैं वह ऑब्जेक्टिव हैं और उनके उत्तर बेहद सरल थे। लगभग सभी विद्यार्थी 10 नंबर के इन दोनों प्रश्नों में से 6-10 अंक प्राप्त कर लेते।

एक निजी स्कूल के प्राचार्य ने बताया 5-5 नंबर के दोनों प्रश्नों को निरस्त कर दिया गया है। इसलिए 100 की बजाय 90 नंबर में से मूल्यांकन होगा। ये सवाल नहीं हटाए जाते तो परीक्षार्थियों को 100 में से न्यूनतम 33 अंक प्राप्त करने होते। अब उन्हें 90 में से कम से कम 25 अंक पर लाने होंगे। यानी 90 में से मिले नंबरों को 100 में कन्वर्ट करने पर परीक्षा परिणाम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विद्यार्थियों और उनके परिजन का कहना है कि दोनों प्रश्नों के केवल दो नंबर वाले आपत्तिजनक अंश को ही निरस्त किया जाए। इससे मूल्यांकन 98 अंकों में से होगा और सभी परीक्षार्थियों को 2 अंक का बोनस दे दिया जाए। इससे किसी भी परीक्षार्थी के रिजल्ट पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा और समस्या का समाधान भी हो जाएगा।

मूल्यांकनकर्ताओं के चयन के यह हैं मापदंड

{ परीक्षक को पांच साल या कम से कम तीन साल के अध्यापन का अनभुव हो।

{हाईस्कूल परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए परीक्षक का स्नातक एवं हायरसेकंडरी परीक्षक का संबंधित विषय में स्नातकोत्तर होना जरूरी है।

{ संविदा एवं अध्यापक संवर्ग के शिक्षक जो कम से कम लगातार तीन साल से अध्यापन करा रहे हों उनकी सेवाएं भी ली जा सकती हैं।

{ ऐसे सहायक शिक्षक जो स्नातक एवं स्नातकोत्तर हों तथा तीन साल से 10वीं तथा का 12वीं कक्षा में अध्यापन करा रहे हो उन्हें भी परीक्षक बनाया जा सकता है।

{ निजी स्कूलों के उन शिक्षकों को भी परीक्षक बनाया जा सकता है, जिन्होंने संस्था में लगातार पांच साल या कम से कम तीन साल संतोषजनक काम किया हो।

बोर्ड के निर्णय से
होगा नुकसान


नेहा सोनी, रोहित सिंह, कृष्णा शर्मा, परीक्षार्थी कहना है कि एमपी बोर्ड के निर्णय से परीक्षार्थियों को नुकसान होगा। सरकार और विभाग को जब आपत्ति है तो उस चैप्टर को कोर्स से क्यों नहीं हटाया गया। कम से कम पेपर सेटर को तो निर्देश दिए ही जा सकते थे कि उक्त चैप्टर से कोई सवाल नहीं पूछे जाएं। 2 अंकों के फेर में पूर्णांक से 10 अंक कम हो गए। सरकार को चाहिए कि 98 अंकों के सवालों का मूल्यांकन कर दो अंक बोनस दे।
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