मोदी ने जिनपिंग से कहा- कारोबार और निवेश में संतुलन होना जरूरी

Sagar News - चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दौरा भारतीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम रहा, क्योंकि जिनपिंग ने कश्मीर पर एक शब्द...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:36 AM IST
BAREHATA News - mp news modi told jinping balance in business and investment is necessary
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दौरा भारतीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम रहा, क्योंकि जिनपिंग ने कश्मीर पर एक शब्द भी नहीं बोला। दूसरी सबसे अहम बात चेन्नई समिट में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश रही। इस समिट में दोनों नेताओं के बीच कुल 6 घंटे तक वन-टू-वन मीटिंग हुई। इनमें दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सेवाओं को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा की।

विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि मोदी ने जिनपिंग के सामने बढ़ते व्यापार घाटे का मुद्दा उठाया। इस पर जिनपिंग ने कहा कि वह इस मुद्दे को सुलझाने के लिए ठोस उपाय करेंगे। भारत और चीन व्यापार, निवेश और सेवाओं से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए एक तंत्र स्थापित करेंगे। मोदी ने क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) को लेकर कहा कि भारत इसके प्रति उत्साहित है, लेकिन उसकी चिंताएं भी हैं, जिन्हें दूर करनी ही होगा। मोदी बोले कि कारोबार, सेवा और निवेश में संतुलन होना जरूरी है। इस पर जिनपिंग ने कहा कि भारत की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा। दरअसल, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश का बढ़ना भारत के लिए हमेशा से घाटे का सौदा ही रहा है। फिलहाल चीन, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन वह हमें हमसे 5 गुना ज्यादा सामान बेच रहा है।

आरसीईपी: आरसीईपी 16 देशों का प्रस्तावित साझा बिजनेस ब्लॉक है। इसमें आसियान के 10 सदस्य देशों समेत 6 अन्य देश- भारत, चीन, जापान, द. कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा कर रहे हैं।

मोदी प्लेट

भारत-चीन का ट्रेड कैलकुलेशन

भारत और चीन के बीच 20 साल में कारोबार में गजब की बढ़ोतरी देखने को मिली है। साल 2000 में दोनों देशों के बीच का महज 21,315 करोड़ रुपए का व्यापार होता था, जो 2008 में बढ़कर 3.68 लाख करोड़ रु. का हो गया। इसके साथ ही चीन अमेरिका की जगह भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। 2018 में दोनों देशों के कारोबारी रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। दोनों के बीच 6.78 लाख करोड़ रु. का व्यापार हुआ। चीन में भारत के राजदूत के मुताबिक 2019 के अंत तक भारत-चीन का कारोबार 7 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच जाएगा। कारोबार बढ़ रहा है, इसका यह मतलब नहीं है कि फायदा दोनों को बराबर हो रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 2018 में भारत-चीन के बीच 6.78 लाख करोड़ रु. का कारोबार हुआ, पर इसमें भारत ने जो सामान निर्यात किया, उसकी कीमत 1,338 करोड़ रुपए थी। मतलब, चीन ने भारत से कम सामान खरीदा और उसे 5 गुना ज्यादा सामान बेचा।

भास्कर नॉलेज

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भारत-चीन के बीच इस साल के अंत तक कारोबार 7 लाख करोड़ पहुंच जाएगा

क्योंकि: चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, पर वह हमसे 5 गुना ज्यादा सामान हमें बेच रहा

शी शॉल

कारोबार: भारत को सबसे ज्यादा व्यापारिक घाटा चीन से हो रहा

आपसी कारोबार बढ़ने से चीन को फायदा हुआ है। भारत को यदि किसी देश से सबसे ज्यादा व्यापारिक घाटा हो रहा है तो वह चीन है। 2018 में भारत को चीन के साथ 4.11 लाख करोड़ रु. का व्यापारिक घाटा हुआ। 2017 में यह 3.67 लाख करोड़ रु. था।

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निवेश: चीन, भारत से निवेश करने में भी आगे, स्टार्ट-अप पहली पसंद

चीन ने 2017 मेंे भारत में 14 हजार करोड़ रु. का निवेश किया। चीन भारत के स्टार्ट-अप में काफी निवेश कर रहा है। हालांकि, भारत का चीन में निवेश तुलनात्मक रूप से कम है। भारत ने 2017 में चीन में 6046 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

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