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सर्जरी और दवाइयों से बैक पेन का ज्यादातर गलत इलाज

Sagar News - कई देशों में विशेषज्ञ एक्सरसाइज व मानसिक सलाह पर जोर देते हैं पीठ, कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण अक्सर...

Jan 18, 2020, 06:35 AM IST
BAREHATA News - mp news mostly wrong treatment of back pain due to surgery and medicines
कई देशों में विशेषज्ञ एक्सरसाइज व मानसिक सलाह पर जोर देते हैं

पीठ, कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण अक्सर रहस्यमय होते हैं। अधिकतर देशों में बैक पेन अपंगता का प्रमुख कारण है। इस कारण यूरोपीय लोगों काे काम छोड़ना पड़ता है। अमेरिका में नशे की दवाइयों-ओपिओइड के आदी होने की यह बड़ी वजह है।

शरीर के पिछले हिस्से की तकलीफों के इलाज पर भारी धनराशि खर्च होती है। अमेरिका में पीठ, रीढ़ और गर्दन के इलाज पर हर साल 6.25 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यह कैंसर के इलाज पर खर्च 8.17 लाख करोड़ रुपए से बहुत कम नहीं है। उत्पादकता में गिरावट, इलाज के खर्च और मरीज को तकलीफ का हिसाब जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 45 लाख करोड़ रुपए से अधिक होता है। दरअसल, इस बीमारी के इलाज में ही घोटाला है।

अमीर देशों में डॉक्टर फौरन लत लगाने वाली दर्दनाशक दवाइयां लिखते हैं। यह प्रक्रिया भारत, ब्राजील, चीन, ईरान, नेपाल और दूसरे देशों में भी शुरू हो चुकी है। वे सबसे पहले एमआरआई कराने की सिफारिश करते हैं। धनी देशों में बैक पेन के लिए 80% एमआरआई गैरजरूरी रहते हैं। स्लिप डिस्क तक के लिए यह स्कैन किए जाते हैं। फिर सर्जरी होती है जिसके फायदों को साबित नहीं किया जा सका है। अमेरिकी बीमा कंपनी सिगना ने पाया कि रीढ़ की डिस्क घिसने के कारण सर्जरी कराने वाले 87% लोग दो साल बाद भी भीषण दर्द से पीड़ित पाए गए। स्पाइनल इंजेक्शनों से भी बहुत फायदा नहीं होता है। मरीज भी घबराकर हर तरह का इलाज स्वीकार कर लेते हैं।

पीठ, कमर, रीढ़, गर्दन की तकलीफों के अधिकतर मामलों में एक्सरसाइज बहुत कारगर रहती हैं। विशेषज्ञ लोगों को बिस्तर में पड़े रहने या ज्यादा बैठने की बजाय सक्रिय रहने की सलाह देते हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, जर्मनी में चिकित्सकों की कई एसोसिएशन ने डॉक्टरों को सर्जरी या दवाइयों की बजाय दूसरा रास्ता अपनाने की सलाह दी है। वे मरीजों को मानसिक सलाह देने की जरूरत बताते हैं।

© 2019 The Economist Newspaper Limited. All rights reserved. From The Economist, translated by DB Corp, published under licence. The original article, in English, can be found on www.economist.com

कई देशों में विशेषज्ञ एक्सरसाइज व मानसिक सलाह पर जोर देते हैं

पीठ, कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण अक्सर रहस्यमय होते हैं। अधिकतर देशों में बैक पेन अपंगता का प्रमुख कारण है। इस कारण यूरोपीय लोगों काे काम छोड़ना पड़ता है। अमेरिका में नशे की दवाइयों-ओपिओइड के आदी होने की यह बड़ी वजह है।

शरीर के पिछले हिस्से की तकलीफों के इलाज पर भारी धनराशि खर्च होती है। अमेरिका में पीठ, रीढ़ और गर्दन के इलाज पर हर साल 6.25 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यह कैंसर के इलाज पर खर्च 8.17 लाख करोड़ रुपए से बहुत कम नहीं है। उत्पादकता में गिरावट, इलाज के खर्च और मरीज को तकलीफ का हिसाब जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 45 लाख करोड़ रुपए से अधिक होता है। दरअसल, इस बीमारी के इलाज में ही घोटाला है।

अमीर देशों में डॉक्टर फौरन लत लगाने वाली दर्दनाशक दवाइयां लिखते हैं। यह प्रक्रिया भारत, ब्राजील, चीन, ईरान, नेपाल और दूसरे देशों में भी शुरू हो चुकी है। वे सबसे पहले एमआरआई कराने की सिफारिश करते हैं। धनी देशों में बैक पेन के लिए 80% एमआरआई गैरजरूरी रहते हैं। स्लिप डिस्क तक के लिए यह स्कैन किए जाते हैं। फिर सर्जरी होती है जिसके फायदों को साबित नहीं किया जा सका है। अमेरिकी बीमा कंपनी सिगना ने पाया कि रीढ़ की डिस्क घिसने के कारण सर्जरी कराने वाले 87% लोग दो साल बाद भी भीषण दर्द से पीड़ित पाए गए। स्पाइनल इंजेक्शनों से भी बहुत फायदा नहीं होता है। मरीज भी घबराकर हर तरह का इलाज स्वीकार कर लेते हैं।

पीठ, कमर, रीढ़, गर्दन की तकलीफों के अधिकतर मामलों में एक्सरसाइज बहुत कारगर रहती हैं। विशेषज्ञ लोगों को बिस्तर में पड़े रहने या ज्यादा बैठने की बजाय सक्रिय रहने की सलाह देते हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, जर्मनी में चिकित्सकों की कई एसोसिएशन ने डॉक्टरों को सर्जरी या दवाइयों की बजाय दूसरा रास्ता अपनाने की सलाह दी है। वे मरीजों को मानसिक सलाह देने की जरूरत बताते हैं।

© 2019 The Economist Newspaper Limited. All rights reserved. From The Economist, translated by DB Corp, published under licence. The original article, in English, can be found on www.economist.com

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