नौरादेही: बाघों के लिए 725 वर्ग किलोमीटर एरिया होगा सुरक्षित
बाघ-बाघिन और तीनों शावकों के लिए बनेगा कोर एरिया, इस इलाके में नहीं होगा कोई डेव्लपमेंट
नौरादेही में बाघ-बाघिन और उनके तीन शावकों को सुरक्षित और उनके अनुकूल माहौल देने के लिए वन मंडल 725 वर्ग किमी में कोर एरिया के रूप में विकसित करने जा रहा है। इस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के साथ किसी भी तरह का कोई नया डेवलपमेंट नहीं होगा। शावक 10 महीने के हो गए हैं। वे अब बाघिन के साथ शिकार पर निकलने लगे हैं, लेकिन खुद अभी शिकार नहीं कर पा रहे हैं। वन्य प्राणी विशेषज्ञों के अनुसार 18 महीने के बाद शावक शिकार करने की स्थिति में आ जाएंगे। बाघ के बढ़ते कुनबे के लिए यहां पेंच अभयारण्य से करीब 1000 चीतल लाने की प्लानिंग है। बाघ-बाघिन की यहां शिफ्टिंग के बाद करीब 280 चीतल लाए गए थे।
अप्रैल 2018 में बांधवगढ़ से बाघ और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघिन को नौरादेही लाया गया था। जून 2019 में इनसे तीन शावकों का जन्म हुआ था। नौरादेही में शावकों के जन्म के बाद पूरे देश में अभयारण्य चर्चा में आ गया। बाघों के प्राकृतिक आवास के रूप में अभयारण्य की एक अलग पहचान बनी। यहां पहले पन्ना से बाघ-बाघिन का मूवमेंट होता रहा, लेकिन शावकों का जन्म पहली बार हुआ।
अभयारण्य सागर, नरसिंहपुर और दमोह इन तीन जिलों की 1197 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। इसे प्रदेश के सबसे बड़ा अभयारण्य का माना जाता है। यह पहले भेड़िया के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां काला हिरण, चीतल, सांभर, नील गाय से लेकर दुर्लभ प्रजाति के पशु, पक्षियों का बसेरा है। बाघों की बसाहट के बाद अब यहां अफ्रीकन चीते लाने की भी तैयारी है। नौरादेही से पन्ना टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ नेशनल पार्क ज्यादा दूरी पर नहीं है। तीनों सेंचुरी को एक कॉरीडोर के रूप में भी देखा जा रहा है। यही वजह है नौरादेही को नेशनल पार्क बनाने की दिशा में भी प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव मांगा है। हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
नौरादेही के तीन शावकों में एक। फाइल फोटो
कोर एरिया के रूप में शावकों की सुरक्षा बढ़ाई है
नौरादेही डीएफओ नवीन गर्ग का कहना है कि बाघ-बाघिन के साथ ही तीनों शावकों की सुरक्षा बड़ी जिम्मेदारी है। इनके मूवमेंट वाले एरिया के अासपास के इलाको को मिलाकर करीब 725 वर्ग किमी क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा रहेगी। यहां दखल रहित भूमि के साथ नया किसी भी प्रकार का डेवलपमेंट नहीं होगा। कोर एरिया में लोगों के प्रवेश को लेकर भी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।