अब पटवारी बोले, गवर्नर से आग्रह किया है कि कमिश्नर या प्रोफेसर को दे दें चार्ज

Sagar News - इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति का विवाद बढ़ने लगा है। राज्य सरकार का पैनल खारिज होने...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:05 AM IST
Sagar News - mp news now patwari says the governor has urged the commissioner or the professor to give the charge
इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति का विवाद बढ़ने लगा है। राज्य सरकार का पैनल खारिज होने के बाद राजभवन की ओर से उच्च शिक्षा विभाग को भेजे गए तीन नामों के पैनल की फाइल पर तो कोई निर्णय नहीं हुआ। अलबत्ता सरकार ने गवर्नर से कहा है कि वे आईएएस अधिकारी व विभाग के कमिश्नर अथवा इंदौर संभाग के कमिश्नर को कुलपति का प्रभार दे दें। यह भी संभव न हो तो विवि के सीनियर प्रोफेसर को प्रभारी कुलपति बना दें। अब गवर्नर को इस बारे में निर्णय लेना है। राज्य सरकार की इस कोशिश के मद्देनजर राजभवन ने विवि अधिनियम को सामने रखते हुए साफ कर दिया है कि कमिश्नर को कुलपति नहीं बनाया जा सकता। गौरतलब है कि इस समय विवि में धारा 52 लगी हुई है।

विवाद के बीच शनिवार को उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि उन्होंने गवर्नर से प्रभारी कुलपति बनाने का आग्रह किया है, क्योंकि इंदौर हाईकोर्ट में यह मामला चला गया है कि किसके परामर्श से कुलपति की नियुक्ति होगी। अब कोर्ट जब तक फैसला नहीं करता, तब तक अंतरिम व्यवस्था की जा सकती है। पटवारी ने कहा कि उम्मीद है गवर्नर सकारात्मक रुख अपनाएंगी। इधर, बताया जा रहा है कि राज्य सरकार की ओर से राजभवन को दलील दी गई है कि सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विवि रायसेन और राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विवि ग्वालियर में कुलपति की भूमिका में इस समय आईएएस अधिकारी पंकज राग हैं। लिहाजा इंदौर विवि का संचालन भी कमिश्नर कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दलील पर गवर्नर ने कहा है कि सांची व संगीत विवि में सीनियर व 10 साल तक प्रोफेसर रह चुके लोग नहीं हैं, लेकिन देवी अहिल्या विवि में यह दिक्कत नहीं हैं।

सागर विवि के प्रोफेसर यशवंत सिंह ठाकुर का भी नाम

प्रोफेसर रेनू जैन (जीवाजी विवि, ग्वालियर)

योग्यता: जेयू के स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स एंड एलाइड साइंस की विभागाध्यक्ष। शुरुआत फिरोजाबाद के सीएल जैन कॉलेज में लेक्चरर के रूप में मार्च 1981 से की। जेयू में मार्च 1985 में लेक्चरर बनीं। 1998 में प्रोफेसर। वर्तमान में नैक टीम की सदस्य हैं। अब तक 82 रिसर्च पेपर साइंस की विभिन्न अधिकृत पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। बतौर गाइड 23 छात्रों ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। एमफिल में 44 छात्रों की मार्गदर्शक हैं।

बीके मेहता (प्रोफेसर, विक्रम विवि, उज्जैन)

योग्यता: स्कूल आॅफ स्टडीज इन कैमिस्ट्री एंड बायो कैमिस्ट्री के हेड हैं। विक्रम विवि में लेक्चरर, रीडर रहे। 1998 से प्रोफेसर। यूनिवर्सिटी साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर के डायरेक्टर रह चुके। सेंट्रल बोर्ड आॅफ स्टडीज इन कैमिस्ट्री एमपी के चेयरमैन रहे। यंग साइंटिस्ट प्रोजेक्ट अवार्ड मिला। अंतर राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर क्रमश: 46 व 51 रिसर्च पेपर प्रकाशित।

प्राे. यशवंत सिंह ठाकुर (डीन, बिजनेस मैनेजमेंट, केंद्रीय विवि सागर)

योग्यता: 1983 से इस विवि के डिपार्टमेंट अाॅफ बिजनेस मैनेजमेंट में एडहॉक पर पढ़ाया। यहीं 1986 में असिस्टेंट प्रोफेसर बने। फिर 1996 को एसो. प्रोफेसर और 2004 में प्राेफेसर बने। 2000 से डिपार्टमेंट अाॅफ बिजनेस मैनेजमेंट के हेड हैं। 2008 से 2011 तक फैकल्टी अाॅफ मैनेजमेंट स्टडी एंड काॅमर्स के डीन रहें। इसके बाद 2014 तक स्कूल अाॅफ काॅमर्स एंड मैनेजमेंट के डीन रहे। एक साल तक विवि की कार्यपरिषद के सदस्य रहे। अब तक कुल 21 पेपर प्रकाशित हुए।

जगमोहन केलर (प्रोफेसर, रानी दुर्गावती विवि जबलपुर)

योग्यता: डीन काॅलेज डेवलपमेंट काउंसिल हैं। इस समय फिजिक्स के हेड हैं। इस विवि में डीन रह चुके। कार्यवाहक कुलपति का जिम्मा भी संभाल चुके। वर्तमान में विवि की फैकल्टी में सबसे सीनियर प्रोफेसर हैं। एक्जाम कंट्रोलर हैं। कई रिसर्च पेपर न केवल पब्लिश हुए, बल्कि शोध कार्य भी किए।

डाॅ. राजकुमार आचार्य (डीन, काॅमर्स, रानी दुर्गावती विवि जबलपुर)

योग्यता: 2000 से लगातार प्रोफेसर हैं। डेढ़ साल काॅमर्स के डीन रहे। विवि की कार्यपरिषद के सदस्य रह चुके हैं। एकेडेमिक गतिविधियों के साथ एक्जाम कराए। ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और रीवा समेत मप्र के अन्य विवि में एकेडेमिक मेंबर के तौर पर काम किया। कई पेपर व रिसर्च वर्क कर चुके हैं। खासतौर पर नरसिंहपुर जिले में जल प्रबंधन पर शोध किया। आर्थिक मामलों पर दिल्ली में प्रेजेंटेशन किया।

डाॅ. शंकरलाल गर्ग (पूर्व प्राचार्य, होल्कर काॅलेज)

योग्यता: पर्यावरण, जनसंख्या, पाॅलीमर, प्राकृतिक आपदा, ड्रग्स, केमिस्ट्री, बायो-कैमिस्ट्री समेत कई विषयों पर शोधकार्य। 65 छात्र मार्गदर्शन में पीएचडी कर चुके। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में एकेडेमिक डायरेक्टर। छह किताबें लिख चुके। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के फेलो मेंबर। पीजी काॅलेजों के 14 साल तक प्राचार्य रहे। पढ़ाने और शोध 44 साल का अनुभव।

X
Sagar News - mp news now patwari says the governor has urged the commissioner or the professor to give the charge
COMMENT