अब जनभागीदारी के अतिथि विद्वानों काे हटाया, एडी बोले-जुलाई में फिर रख लेंगे

Sagar News - सरकार बदलने के तुरंत बाद ही प्रदेश भर में उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों की जनभागीदारी समितियां समाप्त कर दी थीं।...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:06 AM IST
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सरकार बदलने के तुरंत बाद ही प्रदेश भर में उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों की जनभागीदारी समितियां समाप्त कर दी थीं। इसके बाद इनकी नई नियुक्तियां नहीं की गईं। अब जाकर कॉलेजों में मई अौर जून का वेतन बचाने के नाम पर जनभागीदारी से कार्यरत अतिथि विद्वानों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। हालांकि एक चर्चा यह भी है कि सरकार इन पदों पर एमपी-पीएससी द्वारा चयनित नियमित शिक्षकों को नियुक्ति करेगी। इस कारण अतिथि विद्वानों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी है। परंतु प्रदेश भर में अतिथि विद्वान करीब 5100 कार्यरत हैं, जबकि नियुक्तियां यदि हुईं भी तो भी पद इससे आधे ही भरे जा पाएंगे। क्योंकि विज्ञापन ही 2371 पदाें के लिए निकला था।

शिकायत करें, सुनवाई हाेगी: मंत्री

नियम विरुद्ध किसी भी अतिथि शिक्षक को नहीं हटाया जा सकता है। अगर ऐसा हो रहा है तो वे इसकी शिकायत करें, उनकी सुनवाई होगी। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। - जीतू पटवारी, उच्च शिक्षा मंत्री, मप्र

नए शैक्षणिक सत्र के पहले उच्च शिक्षा विभाग जुटा रहा जानकारी

भास्कर संवाददाता | सागर

नए शैक्षणिक सत्र के पहले उच्च शिक्षा विभाग तमाम तरह की जानकारी जुटा रहा है। हाल ही में सभी कॉलेजों से यह ब्यौरा मांगा गया था कि उनके यहां कितने शैक्षणिक पद हैं और उनके विरुद्ध कितने कार्यरत हैं। ऐसे में उम्मीद जगी थी कि खाली पड़े पदों के विरुद्ध जल्दी ही नियुक्तियां होंगी। परंतु विभाग ने जनभागीदारी मद से रखे गए अतिथि विद्वानों को हटाने का काम शुरू कर दिया है। इस संबंध में प्राचार्यों को इन्हें बाहर करने के मौखिक निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल सागर के सरकारी गर्ल्स कॉलेज से 43, अग्रणी काॅलेज से 9 अतिथि विद्वानों सहित जिले भर में करीब 70 अतिथि विद्वानाें काे कार्यमुक्त करने के आदेश हो गए हैं, जिसके बाद अतिथि विद्वानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मामले में अतिथि विद्वानों का तर्क है कि उनकी नियुक्ति संबंधी आदेश में 12 महीने से पहले हटाने का कोई प्रावधान नहीं है।

इसके बाद भी हटाया जा रहा है। वहीं प्राचार्यों का तर्क है कि कॉलेज में सिर्फ उन्हीं अतिथि विद्वानों को हटाया जा रहा है, जिनके वेतन का भुगतान जनभागीदारी समिति से होता है। जिन शिक्षकों का भुगतान सीधे शासन करता है, उन्हें नहीं हटाया जा रहा है। मामले में एडी उच्च शिक्षा सागर संभाग डाॅ. जीएस राेहित का कहना है कि कॉलेजों में अभी कक्षाएं नहीं लग रही हैं। एेसे में काेई वर्क लाेड नहीं है। चूंकि जनभागीदारी मद से जरूरत के मुताबिक अतिथि विद्वानों काे रखने न रखने का अधिकार प्राचार्य का है। इसीलिए जिले भर में इन्हें कार्यमुक्त किया गया है। जुलाई में जब कक्षाएं शुरू हो जाएंगी तो फिर जनभागीदारी मद से नियुक्तियां की जाएंगी। शासन ने जिनको सीधे अतिथि विद्वान के पद पर रखा है। वह काम कर ही रहे हैं।

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