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चरनोई भूमि पर कब्जा व खरीद-बिक्री में शुक्ला बंधु समेत 11 पर कार्रवाई का अादेश

एक वर्ष पहले
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शहर के बीचाें बीच करीब ढाई एकड़ चरनोई की जमीन पर अतिक्रमण अाैर इसकी खरीद बिक्री के चर्चित मामले में कलेक्टर प्रीति मैथिल ने अहम फैसला सुनाते हुए शहर के जाने माने शुक्ला बंधुअाें समेत 11 लाेगाें के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई का अादेश दिया है। वहीं जमीन पर अतिक्रमण अाैर इसकी खरीद-फराेख्त न राेकने पर निगम के जिम्मेदार अधिकारियाें के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की है। शहर के युवा अधिवक्ता विनयकांत सुहाने व राेहित ठाकुर ने 2015 में तत्कालीन कलेक्टर से इस मामले में शिकायत की थी। जब सुनवाई नहीं हुई ताे इस संंबंध में हाईकाेर्ट में जनहित याचिका दायिर की गई। हाईकाेर्ट के निर्देश पर कलेक्टर ने इस पूरे मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है।

फैसला अाने के बाद शिकायतकर्ता विनयकांत सुहाने ने पत्रकारवार्ता में इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्हाेंने बताया कि मैंने 15 जनवरी 2015 को एक शिकायती आवेदन कलेक्टर सागर को देकर बताया था कि खसरा नंबर 94/2,95/2,96/2,99 सहित कई और खसरा में राजस्व रिकॉर्ड में चरनोई की जमीन दर्ज़ है। इस जमीन की अवैध ताैर पर खरीद फराेख्त हो चुकी है अाैर अतिक्रमण है। इस शिकायत पर काेई कार्रवाई न होने पर मैंने अाैर मेरे साथी वकील राेहित ठाकुर ने हाइकोर्ट जबलपुर में रिट पिटीशन दायर की थी। हाईकाेर्ट के निर्देशों के तहत कलेक्टर को मय दस्तावेजों के शिकायत पुनः प्रस्तुत की गई। कलेक्टर के आदेश पर मामले सुनवाई के लिए दर्ज हुअा। इसके बाद जब हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन में देरी हुई ताे पुनः अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई, तब जाकर इस मामले की सुनवाई में तेज़ी आई। एड. सुहाने ने बताया कि इस मामले की सुनवाई के दाैरान अनावेदक शिवचंद शुक्ला एवं शिवप्रकाश शुक्ला द्वारा जरुरी दस्तावेज पेश नहीं किए गए, जबकि अावेदक की तरफ से अनावेदकों की रजिस्ट्री प्रस्तुत की गई,जो कि अहम साबित हुई।

200 कराेड़ से ज्यादा की अांकी जा रही जमीन

इस जमीन का रकबा लगभग ढाई एकड़ का है, जो कि कटरा वार्ड में है। जमीन की कीमत 200 करोड़ से ज्यादा अांकी जा रही है। तीस साल से भी अधिक समय से इस जमीन पर कब्जा है। चरनोई जमीन पर प्लाटिंग तक कर दी गई।

जानिए क्या है चरनोई भूमि

2015 से चल रहा है मामला, कलेक्टर मैथिल ने दिया निर्णय, अफसरों की भी जिम्मेदारी तय होगी

ब्रिटिशकाल में गायों के लिए जमीन आरक्षित की गई थी। इसे गोचर की भूमि भी कहा गया। जमीन आरक्षित करने के पीछे उद्देश्य गायों को पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना था। प्रशासनिक अनदेखी के कारण धीरे-धीरे चरनाेई की जमीनों पर अतिक्रमण हो गया।

फैसला अाने के बाद शिकायतकर्ता विनयकांत सुहाने ने पत्रकारवार्ता में इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्हाेंने बताया कि मैंने 15 जनवरी 2015 को एक शिकायती आवेदन कलेक्टर सागर को देकर बताया था कि खसरा नंबर 94/2,95/2,96/2,99 सहित कई और खसरा में राजस्व रिकॉर्ड में चरनोई की जमीन दर्ज़ है। इस जमीन की अवैध ताैर पर खरीद फराेख्त हो चुकी है अाैर अतिक्रमण है। इस शिकायत पर काेई कार्रवाई न होने पर मैंने अाैर मेरे साथी वकील राेहित ठाकुर ने हाइकोर्ट जबलपुर में रिट पिटीशन दायर की थी। हाईकाेर्ट के निर्देशों के तहत कलेक्टर को मय दस्तावेजों के शिकायत पुनः प्रस्तुत की गई। कलेक्टर के आदेश पर मामले सुनवाई के लिए दर्ज हुअा। इसके बाद जब हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन में देरी हुई ताे पुनः अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई, तब जाकर इस मामले की सुनवाई में तेज़ी आई। एड. सुहाने ने बताया कि इस मामले की सुनवाई के दाैरान अनावेदक शिवचंद शुक्ला एवं शिवप्रकाश शुक्ला द्वारा जरुरी दस्तावेज पेश नहीं किए गए, जबकि अावेदक की तरफ से अनावेदकों की रजिस्ट्री प्रस्तुत की गई,जो कि अहम साबित हुई।

कलेक्टर काेर्ट ने इस मामले में लीलावती शुक्ला (फौत), शिवचंद शुक्ला, शिवप्रकाश शुक्ला शुक्ला, मोहनलाल सडानी, घनश्यामदास, अशोककुमार, फगुनामल,अरविंद जैन, चक्रेश जैन, राजमल जैन, संदीप कुमार जैन के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई का अादेश दिया है। इसके साथ ही महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक भाेपाल को भी शासकीय भूमि के पंजीयन करने वालों के खिलाफ कारवाई के निर्देश दिए हैं। सुहाने ने बताया कि शिवचंद मुन्ना अाैर शिवप्रकाश गुंजन शुक्ला के नाम से भी जाने जाते हैं। उन्होंने न्याय मिलने पर कलेक्टर का आभार माना।

मेरे दादा ने जमीन की रजिस्ट्री कराई थी,अपील करेंगे- शुक्ला

Ãशिवप्रकाश शुक्ला का कहना है कि यह जमीन 1930 के करीब मेरे दादा ने रजिस्ट्री कराकर खरीदी थी। तभी से हम लाेग इस पर काबिज हैं। मुझे जानकारी लगी है कि इस मामले में कलेक्टर काेर्ट ने अादेश दिए है। अादेश की प्रति मिलने के बाद इसका अध्ययन कर अागे की काेर्ट में अपील करेंगे। वहीं इस मामले में निगम कमिश्नर अारपी अहिरवार का कहना है कि इस फैसले की काॅपी मिलने के बाद कार्रवाई करेंगे।
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