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फोटोग्राफी... 45 मंजिल की बिल्डिंग के बराबर ऊंचा है फैरीज व्हील लंदन आई, हर साल 38 लाख पर्यटक आते हैं यहां

Sagar News - यह फोटो फैरीज व्हील लंदन आई का है। इस गोलाकार झूले की कुल ऊंचाई 135 मीटर यानी 45 मंजिल के भवन के बराबर है। इसके गोले का...

Oct 22, 2019, 06:36 AM IST
यह फोटो फैरीज व्हील लंदन आई का है। इस गोलाकार झूले की कुल ऊंचाई 135 मीटर यानी 45 मंजिल के भवन के बराबर है। इसके गोले का व्यास 120 मीटर है। सन् 2000 में जनता के लिए खोला गया यह झूला उस समय दुनिया का सबसे ऊंचा झूला था। हालांकि, इसके बाद इससे बड़े तीन और झूले बन चुके हैं। इसके बावजूद इस झूले का आकर्षण सर्वाधिक है और हर साल यहां पर करीब 38 लाख पर्यटक आते हैं।
इंटरेस्टिंग... खुद अपनी सफाई करेगा टॉयलेट का डोर हैंडल

पब्लिक टायलेट या बाथरूम को इस्तेमाल करने के बाद अक्सर यह समस्या रहती है कि इससे बाहर आते समय इसके दरवाजे के हैंडल पर जमा कीटाणु व गंदगी आपके हाथों पर लग सकती है। लेकिन, अब इस समस्या का हल मिल गया है। दो छात्रों ने ऐसा डोर हैंडल तैयार किया है, जो खुद ही अपनी सफाई कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय जेम्स डायसन पुरस्कार के लिए चुने गए 20 फायनलिस्ट में से दो छात्रों को बैक्टीरिया से मुक्ति दिलाने वाले हैंडलों को बनाने के लिए सम्मानित किया गया है। लगातार सफाई के बावजूद पब्लिक टॉयलेट में दरवाजों के हैंडल स्वच्छता के लिए एक चुनौती बने रहते हैं। हांगकांग विश्वविद्यालय के दो छात्रों सुम विंग वांग और किन पोंग ली ने बाथरूम हैंडलों का ऐसा डिजायन तैयार किया है जो खुद ही अपनी सफाई करेगा और इसमें कैमिकल का इस्तेमाल भी नहीं होगा। कैमिकल के इस्तेमाल से भी अनेक बार नुकसान हो जाता है।

इन खोजकर्ताओं ने कहा कि कैमिकल से सफाई आज आम बात है, क्योंकि यह आसान होती है। लेकिन, कैमिकल से सफाई हमारे स्वास्थ्य के लिए दूसरी तरह की चुनौती पैदा कर देती है। हमारा डिजायन न केवल टिकाऊ है बल्कि प्रभावी भी है। इन छात्रों ने हैंडल बनाने के लिए ऐसा मैटेरियल इस्तेमाल किया है, जिससे एक हैंडल पर की लागत करीब 900 रुपए आई है। टाइटेनियम डाईऑक्साइड पाउडर और अल्ट्रावायलेट एलईडी लाइट का इस्तेमाल कर बने ये हैंडल खुद ही अपनी सफाई कर सकते हैं। यही नहीं इन हैडलों में एक छोटा सा गियर बॉक्स और जनरेटर भी लगा है, जिससेे यह दरवाजे को खोलने व बंद करने से उत्पन्न होने वाली कायनेटिक ऊर्जा का इस्तेमाल अपने लिए कर सकता है। इसको काम करने के लिए बाहर से बिजली की जरूरत नहीं होती है। इन हैंडलों पर लगी पतली टाइटेनियम डाईऑक्साइड की परत बैक्टीरिया को नष्ट कर देती है। अल्ट्रावायलेट किरणें पड़ने पर टाइटेनियम डाईऑक्साइड सक्रिय हो जाता है। पानी और ऑक्सीजन के सपंर्क में आने पर यह हायड्रोक्सिल रेडिकल्स पैदा करता है, जो बैक्टीरिया खत्म करने में सहायक होते हैं। लैब में हुए परीक्षण में इस तरह के हैंडल 99.8 फीसदी बैक्टीरिया मुक्त पाए गए।


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