सुअर के शिकारी दो भाइयों की जमानत अर्जी खारिज
शराब के लिए पैसे नहीं देने पर घर जा रहे व्यक्ति से मारपीट करने वाले दो युवकों को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश नवनीत कुमार वालिया ने 3 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। घटना कैंट थाने के तहत आने वाले भैंसा गांव में हुई थी।
अभियोजन के अनुसार कपूरिया गांव निवासी सतीश गुप्ता की भैंसा गांव में सोयाबीन प्लांट के पास चाय की दुकान है। 11 अप्रैल 2014 को रात करीब 8 बजे वह अपनी दुकान बंद कर साइकिल से घर जा रहा था। पुलिया के पास रात करीब 8.30 बजे कपुरिया गांव निवासी नीरज पिता बाबूलाल तथा उंगा उर्फ गुड्डा पिता दौलत मिले। आरोपियों ने उसे रास्ते में रोक लिया। गालीगलौज कर आरोपियों ने उससे शराब पीने के लिए पैसे मांगे। पैसा देने से मना करने पर आरोपियों ने उससे मारपीट की। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी और भाग गए। सतीश ने घटना की रिपोर्ट कैंट थाने में दर्ज कराई।
पुलिस ने अरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 3-3 साल के सश्रम कारावास तथा 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। पैरवी अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी शिवसंजय ने की।
मारपीट करने वाले दो युवकों को 3 साल की कैद व जुर्माना
भास्कर संवाददाता | सागर
सोमला के जंगल में जंगली सुअर का शिकार करने वाले दो भाइयों की जमानत अर्जी प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रामविलास गुप्ता ने खारिज कर दी है। आरोपियों को एक मार्च को 5 किलो मांस के साथ हनौता खेर गांव से पकड़ा गया था।
अभियोजन के अनुसार 1 मार्च 2020 को शांम करीब 5.30 बजे मुखबिर ने सोमला के जंगल में जंगली सुअरों का शिकार किए जाने की सूचना दी थी। इस पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दक्षिण एवं वन अमले ने सोमला से लगे हनौता खेर गांव में पहाड़ी पर बने कुचबदियां (पारदी) समुदाय के टपरों की तलाशी ली। टपरों के आसपास जंगली सुअरों के दो सिर, खाल, अन्य अवयव सहित करीब 5 किलो 100 ग्राम मांस और शिकार करने के हथियार पाए गए। पूछताछ करने पर मौके पर मिले आरोपी हनौता खेर निवासी आनंद पिता प्रहलाद एवं रवि पिता प्रहलाद ने भाले से दो जंगली सुअरों का शिकार करने की बात स्वीकार की।
वन विभाग के दल ने आरोपियों को गिरफ्तार कर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 39, 51 के तहत केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने, केस डायरी के अवलोकन तथा अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। वन विभाग की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक ब्रजेश दीक्षित ने की।