मंडी में चना, मसूर व गेहूं के भाव बढ़े, खरीदी केंद्रों से दूर हाेने लगे किसान

Sagar News - कृषि उपज मंडी में गेहूं, चना औैर मसूर के भाव बढ़ने से आवक बढ़ने लगी है। मंडी में 1860 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:05 AM IST
Sagar News - mp news prices of gram lentils and wheat increased in the mandi farmers who started away from the shopping centers
कृषि उपज मंडी में गेहूं, चना औैर मसूर के भाव बढ़ने से आवक बढ़ने लगी है। मंडी में 1860 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है, जबकि सरकारी खरीद केंद्र पर 1840 रुपए के भाव से गेहूं की खरीदी हो रही है। इसी तरह शुक्रवार काे चना 4350 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 5000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया। मंडी में चना, मसूर औैर गेहूं का भाव अधिक मिलने से एक तरफ सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं, चना, मसूर बेचने वाले किसानों की संख्या कम हो गई है, वहीं मंडी में आवक बढ़ गई है। मंडी में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गेहूं, चना, मसूर की खरीदी की जा रही है। हालांकि मंडी सचिव का कहना है कि गेहूं की डिमांड बढ़ने से भाव में उछाल आया है।

बता दें कि 2 अप्रैल के बाद जिले में समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीदी शुरू की गई थी। उस वक्त कृषि उपज मंडी में 1600 से 1650 प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीदा जा रहा था। चूंकि भाव कम होने से किसान समर्थन मूल्य पर ही गेहूं बेचने के लिए मजबूर थे। हालांकि उस वक्त एसएमएस न मिलने से किसान परेशान थे। कृषि उपज मंडी में मंदी की वजह से कई किसान ताे बिना एसएमएस मिले ही समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर पहुंच गए थे। यहां किसानों को एसएमएस के अलावा बारदाने की समस्या से भी जूझना पड़ रहा था। लेकिन पिछले चार दिन में गेहूं के भाव में उछाल आ गया। गेहूं का भाव 1650 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया। अचानक भाव बढ़ने का कारण गेहूं की डिमांड बताया जा रहा है। मंडी सचिव अरविंद ताम्रकार का कहना है कि भाव ऊपर से परिवर्तित हुए हैं, भाव पूरी तरह डिमांड व आपूर्ति के सिद्धांत पर तय किए जाते हैं। गेहूं की मांग बढ़ गई है, इसलिए भाव में भी तेजी आई है। शुक्रवार काे 350 ट्रॉलियां मंडी में पहुंची। गुरुवार काे 300 ट्राली अावक थी। इससे समर्थन मूल्य सरकारी खरीद केंद्रों द्वारा की जानी वाली खरीदी में गिरावट आ गई है। अधिकांश खरीद केंद्रों पर मौजूद किसान अब प्राथमिकता कृषि उपज मंडी को दे रहे हैं।

सभी मंडियों में बढ़े भाव : पिछले दिनों से ही गेहूं के भाव में तेजी आई

Ãपिछले कुछ दिनों में गेहूं के भाव में तेजी आई है। गेहूं के भाव मांग व आपूर्ति के सिद्धांत पर निर्भर करते हैं। गेहूं की डिमांड बढ़ने से व्यापारियों द्वारा अधिक भाव में गेहूं खरीदा जा रहा है। भाव बढ़ने के साथ-साथ मंडी में गेहूं की आवक भी बढ़ी है। -अरविंद ताम्रकार, सचिव कृषि उपज मंडी सागर

भास्कर संवाददाता |सागर

कृषि उपज मंडी में गेहूं, चना औैर मसूर के भाव बढ़ने से आवक बढ़ने लगी है। मंडी में 1860 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है, जबकि सरकारी खरीद केंद्र पर 1840 रुपए के भाव से गेहूं की खरीदी हो रही है। इसी तरह शुक्रवार काे चना 4350 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 5000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया। मंडी में चना, मसूर औैर गेहूं का भाव अधिक मिलने से एक तरफ सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं, चना, मसूर बेचने वाले किसानों की संख्या कम हो गई है, वहीं मंडी में आवक बढ़ गई है। मंडी में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गेहूं, चना, मसूर की खरीदी की जा रही है। हालांकि मंडी सचिव का कहना है कि गेहूं की डिमांड बढ़ने से भाव में उछाल आया है।

बता दें कि 2 अप्रैल के बाद जिले में समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद केंद्रों पर खरीदी शुरू की गई थी। उस वक्त कृषि उपज मंडी में 1600 से 1650 प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीदा जा रहा था। चूंकि भाव कम होने से किसान समर्थन मूल्य पर ही गेहूं बेचने के लिए मजबूर थे। हालांकि उस वक्त एसएमएस न मिलने से किसान परेशान थे। कृषि उपज मंडी में मंदी की वजह से कई किसान ताे बिना एसएमएस मिले ही समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर पहुंच गए थे। यहां किसानों को एसएमएस के अलावा बारदाने की समस्या से भी जूझना पड़ रहा था। लेकिन पिछले चार दिन में गेहूं के भाव में उछाल आ गया। गेहूं का भाव 1650 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया। अचानक भाव बढ़ने का कारण गेहूं की डिमांड बताया जा रहा है। मंडी सचिव अरविंद ताम्रकार का कहना है कि भाव ऊपर से परिवर्तित हुए हैं, भाव पूरी तरह डिमांड व आपूर्ति के सिद्धांत पर तय किए जाते हैं। गेहूं की मांग बढ़ गई है, इसलिए भाव में भी तेजी आई है। शुक्रवार काे 350 ट्रॉलियां मंडी में पहुंची। गुरुवार काे 300 ट्राली अावक थी। इससे समर्थन मूल्य सरकारी खरीद केंद्रों द्वारा की जानी वाली खरीदी में गिरावट आ गई है। अधिकांश खरीद केंद्रों पर मौजूद किसान अब प्राथमिकता कृषि उपज मंडी को दे रहे हैं।

सभी मंडियों में बढ़े भाव : पिछले दिनों से ही गेहूं के भाव में तेजी आई

Ãपिछले कुछ दिनों में गेहूं के भाव में तेजी आई है। गेहूं के भाव मांग व आपूर्ति के सिद्धांत पर निर्भर करते हैं। गेहूं की डिमांड बढ़ने से व्यापारियों द्वारा अधिक भाव में गेहूं खरीदा जा रहा है। भाव बढ़ने के साथ-साथ मंडी में गेहूं की आवक भी बढ़ी है। -अरविंद ताम्रकार, सचिव कृषि उपज मंडी सागर

परिवहन न होने से बढ़ी परेशानी, अब सिर्फ 8 दिन और हाेना है खरीदी

सागर | खरीदी केंद्रों में गेहूं की तुलाई के लिए अब 8 दिन शेष है। 25 मई गेहूं खरीदी का अंतिम दिन है। बूंदाबांदी की आशंका के बीच खुले आसमान के नीचे रखा गेहूं एक बार भीग चुका है। अब तेज गर्मी में बारदाने फटने लगे हैं और अभी तक कुल तुलवाई का 75प्रतिशत गेहूं ही परिवहन हो पाया है। 25 प्रतिशत गेहूं अभी खुले आसमान के नीचे रखे-रखे खराब हो रहा है। जिम्मेदार अफसर औैर परिवहन कर रहे ठेकेदार की लापरवाही के चलते गेहूं का समय पर परिवहन नहीं होने से किसानों की राशि खातों में नहीं डल पा रही है। किसान भी गेहूं का परिवहन होने का इंतजार कर रहा है ताकि उसे पैसा मिल सके। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने के लिए 123 केंद्र बनाए गए हैं। इन केद्रों में अब तक 2 लाख 72 हजार मीट्रिक टन गेहूं किसानों से खरीदा जा चुका है। इसमें 2 लाख 22हजार मीट्रिक टन गेहूं का परिवहन हो सका है। 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं खुले में पड़ा हुआ है।

Ãपरिवहन अभी पूरे गेहूं का नहीं हो पाया है । मौसम को देखते हुए परिवहन में तेजी लाने के लिए संबंधित एजेंसी से कहा गया है। शीघ्र ही समस्या हल होगी। - राजेंद्र सिंह वाइकर, खाद्य नियंत्रक सागर

30 क्विंटल चने की तुलाई में 15 किलो की चपत

सागर | सरकारी खरीदी केंद्रों पर किसानों के साथ हो रही ठगी प्रशासन भी नहीं रोक पा रहा है। जब से खरीदी शुरु हुई तब से अभी तक 250 से 400 ग्राम प्रति बोरी चना और गेहूं अधिक तौला जा रहा है। इससे किसानों को सीधे चपत लग रही है। एक अनुमान के मुताबिक किसानों को 30 क्विंटल चने की तुलाई करवाने पर 15 किलो चने की चपत लग रही है।

यह काम समिति प्रबंधकों और सर्वेयर की मिली भगत से चल रहा है। ऐसी ही स्थिति जिले में अधिकतर सरकारी खरीदी केंद्रों पर हैं जहां किसानों को साथ इस तरह की मनमानी की जा रही है। इस तरह से से किसानों को होने वाले नुकसान काे समझिए,यदि कोई किसान 30 क्विंटल चना लेकर सरकारी खरीदी केंद्र पर तुलवाने के लिए पहुंचता है। तो तुलाई में प्रति क्विंटल 500 ग्राम चना कम हो जाएगा। ऐसा प्रति 50 किलो चने की तुलाई पर होता है।

केंद्रों पर कम हो गई किसानों की संख्या, भाव बढ़ने से किसानों का दोहरा फायदा

कृषि उपज मंडी में भाव बढ़ने से किसानों को दोहरा फायदा है। समर्थन मूल्य पर किसानों को 1840 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। जबकि कृषि उपज मंडी में 1860 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। इस हिसाब से किसानों को प्रति क्विंटल पर 20 रुपए का सीधे सीधे फायदा हो रहा है। इसके अलावा जिन किसानों ने रबी सीजन में पंजीयन कराया था, और वह अपना गेहूं कृषि उपज मंडी में भी बेचते हैं। तो उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मिलने वाला 160 रुपए का बोनस अतिरिक्त दिया जाएगा। इसके अलावा खरीदी केंद्रों पर समय पर तुलाई न होने एवं कमीशन खाेरी की समस्या से किसानों को दाेचार नहीं होना पड़ेगा, इसलिए किसान समर्थन मूल्य की जगह मंडी में ही गेहूं बेच रहे हैं।

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