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रेलवे: स्टेशन डायरेक्टर के पद पर निर्णय अटका

एक वर्ष पहले
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अभी यह है व्यवस्था

रेलवे स्टेशन पर डॉयरेक्टर के पद के नियुक्त का मामला अफसरों की कमी के कारण अटक गया है। बताया जा रहा है कि पश्चिम मध्य रेलवे मंडल ने ए श्रेणी के ऐसे स्टेशनों का चयन किया था, जहां मंडल को अच्छी आय होती है। उन स्टेशनों पर प्रबंधक की जगह स्टेशन डॉयरेक्टर की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन अभी तक इस पर फैसला नहीं हो पाया है। डॉयरेक्टर की नियुक्ति करने के पीछे का मकसद स्टेशन पर लिए जाने वाले निर्णय स्थानीय स्तर पर ही हो सके। वर्तमान में सागर स्टेशन के लिए जबलपुर मंडल पर निर्भर रहना पड़ता है।

वर्तमान में स्टेशन मास्टर को अधिकांश कामों के लिए जबलपुर मंडल पर निर्भर रहना होता है। इसके कारण कई बार कामों पूरा होने तक काफी इंतजार करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए रेल प्रबंधन द्वारा यात्रियों को स्टेशन पर ही तत्काल सुविधा मिल सकें। इसके लिए डायरेक्टर को तैनात करने की प्लानिंग की गई थी। लेकिन अभी तक इस पर निर्णय नहीं हो पाया है। जबकि रेलवे के दूसरों मंडलों में इस व्यवस्था के लिए पूरा जोर दिया जा रहा है। ताकि डॉयरेक्टर मंडल अधिकारियों से चर्चा कर सीधे निर्णय ले सके। समय की बचत हो और काम भी आसानी से हो सके।

ऐसे करेंगे काम

स्टेशन डायरेक्टर को पूरे अधिकार भी दिए जाएंगे, स्टेशन पर तैनात किसी भी विभाग के कर्मचारी पर डायरेक्टर का होगा नियंत्रण, स्टेशन पर जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी कर सकेंगे, मंडल प्रमुख से सीधे रहेंगे कनेक्ट, फंड और किसी भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।

स्टेशन मास्टर मंडल के अधीन रहकर विभाग प्रमुख को रिपोर्ट देते हैं, समस्या आने पर जबलपुर वरिष्ठ अधिकारियों पर होना पड़ता है निर्भर, स्टेशन प्रबंधक का अन्य विभागों पर नहीं रहता है नियंत्रण, यात्रियों को समस्याओं होने पर उन्हें नहीं कर पाते हैं हल

छोटे-छोटे कामों के लिए अभी भी रहना पड़ता है जबलपुर पर निर्भर, नियुक्ति से मिलेगी यात्रियों को तत्काल सुविधा
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