देश को चांद पर ले जाने की जिम्मेदारी औरतों के हिस्से

Sagar News - इसरो ने अपने मिशन चंद्रयान-2 का जिम्मा दो महिलाओं के कंधों पर धरा है। एम. वनिता इसकी प्रोजेक्ट डायरेक्टर होंगी और...

Bhaskar News Network

Jun 15, 2019, 06:35 AM IST
BAREHATA News - mp news responsibility for taking country to the moon
इसरो ने अपने मिशन चंद्रयान-2 का जिम्मा दो महिलाओं के कंधों पर धरा है। एम. वनिता इसकी प्रोजेक्ट डायरेक्टर होंगी और रितु करिधल मिशन डायरेक्टर। यह पहला मौका नहीं जब इसरो में महिला वैज्ञानिकों को कोई अहम जिम्मेदारी दी गई है। बतौर भारत की मिसाइल वुमन चर्चित हुई टेसी थॉमस ने जब अग्नि मिसाइल पर काम शुरू किया था तब कम ही महिलाएं उनके साथ काम करती थीं। लेकिन जो मुकाम उन्होंने हासिल किया वो देश में महिला वैज्ञानिकों के लिए काफी अहम है। आमतौर पर रॉकेट साइंस को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। लेकिन इसरो की महिला वैज्ञानिकों ने इस गलतफहमी को भी मिटा दिया है। 2014 की बात है इसरो कंट्रोल स्टेशन की एक तस्वीर वायरल हुई थी। उसमें सफेद फूलों का गजरा, सिल्क साड़ी पहनी महिलाएं मिशन सफल होने पर एक-दूसरे को गले लगा रहीं थी। सैटेलाइट कंट्रोल स्टेशन का यह नजारा अचरज भरा था, लेकिन बेहद सुखद भी। तब से अब तक सैटेलाइट कंट्रोल स्टेशन से जारी किसी भी फ्रेम में महिलाओं की हिस्सेदारी जरा भी कम नहीं हुई। संख्या भले कम हो लेकिन अहमियत भरपूर है। मंगलयान से लेकर अब चंद्रयान तक यह पिंक रुतबा बढ़ता चला गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 में इसरो में 20% महिलाएं हैं। जिनमें से 12% वैज्ञानिक या टेक्निकल रोल में हैं। इस कमी की अहम वजह है हमारे देश में लड़कियों का साइंस और खासकर टेक्नोलॉजी में रुचि न लेना। देश में 23 आईआईटी हैं जहां सिर्फ 8% छात्राएं पढ़ती हैं। पारंपरिक तौर पर सोचा जाता रहा है कि टेक्निकल काम औरतों के नहीं होते। साइंस में पढ़ाई कर भी लें तो आगे रिसर्च जैसे इलाके लड़कियों के हिस्से नहीं आते। देश में आज भी सिर्फ 14% लड़कियां शोध करती हैं, जबकि दुनिया में इसका प्रतिशत 28.4 है। देश में 2.8 लाख साइंटिस्ट, टेक्नोलॉजिस्ट और इंजीनियर रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए काम कर रहे हैं। जिनमें महिलाएं हैं सिर्फ 39,389। इस कठिन तस्वीर के बीच जो सकारात्मक पक्ष है वह यह कि इसरो में आज भी कई बड़े मिशन की प्रमुख या डिप्टी एक महिला है। तो यह मान लेना होगा कि देश में चल रही बराबरी की सारी होड़ के बीच विज्ञान भी अब बांहें फैलाए बेटियों का स्वागत कर रहा है। उम्मीद बस यह है कि किसी दिन देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक संस्थान इसरो की प्रमुख एक महिला होगी।

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