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सार्थक होली : प्रकृति पर चढ़े हरा रंग इसलिए रंगीन बाल्टियों में लगाए 1800 पौधे, पानी की बचत के साथ सुरक्षा भी

एक वर्ष पहले
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नई तकनीक के फायदे } पहले हर तीसरे दिन 5 हजार लीटर लगता था अब हर महीने में 8 टैंकर पानी बचेगा

गमलों से कम खर्च } पुनीत ने बताया बॉल्टियों का खर्च गमलों से बहुत कम आया है। जबकि पानी की वचत अधिक हुई है।उन्होंने बताया कि एक बॉल्टी पर मात्र 12 रुपए का खर्च आया है साथ ही पौधों की देखरेख के लिए 4 कमर्चारी लगे हुए हैं।

पक्षी भी बुझा रहे प्यास } बाल्टियों भरे पानी को पीने के लिए पक्षी भी मैदान में आने लगे हैं। पक्षियों के गर्मी के मौसम में ठंडक भी मिलेगी।


नहीं होगी पानी की बर्बादी } बाल्टियों को नीचे से काटा गया है। पानी डालने पर सीधा जमीन में पहुंचता है, जिससे पौधे जल्द बड़े होंगे। पहले गर्मी के दिनों में हर तीसरे दिन में 5 हजार लीटर पानी का एक टैंकर लगता था। लेकिन अब 15 दिन में एक टैंकर पानी लग रहा है। इस तकनीक से करीब 8 टैंकर पानी हर माह बचने की संभावना है। **

सागर। यह रंग-बिरंगी तस्वीर बीना के बसाहरी गांव की है। यहां के पुनीत समैया ने पथरीली जमीन को हरा भरा करने का संकल्प लिया है। वह इसके लिए नई तकनीक अपना रहे हैं। पुनीत ने पानी बचाने के लिए 1800 पौधों को रंग-बिरंगी बाल्टियों में लगाया है। यह रंगीन बाल्टियां 5 लीटर की हैं। पुनीत ने जिस जमीन पर यह रंगीन बाल्टियां लगाई हैं, उन्हें देख ऐसा लगता है मानो होली के रंग एक साथ जमीन पर उतर आए हों। पुनीत का लक्ष्य 8000 पौधों में बाल्टियां लगाकर उन्हें जीवित रखने का है।

(फोटो प्रमोद सैनी)
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