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सिंधिया ने भरा नामांकन फॉर्म, प्रस्तावक विधायकों में उनका एक भी समर्थक नहीं

एक वर्ष पहले
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सीटें आरक्षित, कुछ पर निर्णायक भूमिका

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को राज्यसभा के लिए नामांकन भर दिया। भाजपा की ओर से सुमेर सिंह सोलंकी व कांग्रेस की तरफ से दूसरे प्रत्याशी के रूप में फूलसिंह बरैया ने भी फॉर्म भरे। भाजपा ने डमी कैंडिडेट के रूप में पूर्व मंत्री रंजना बघेल से भी नामांकन दाखिल करवाया है। इनके अलावा एक अन्य रामदास दहीवाले ने भी पर्चा भरा है। दिग्विजय सिंह गुरुवार को ही कांंग्रेस प्रत्याशी के रूप में फॉर्म जमा कर चुके हैं।

विधानसभा में भारी गहमागहमी के बीच दोपहर करीब ढाई बजे सिंधिया ने शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, गोपाल भार्गव, वीडी शर्मा, भूपेंद्र सिंह की मौजूदगी में तीन सेट में नामांकन भरा। तीनों ही सेट में एक भी सिंधिया समर्थक विधायक प्रस्तावक के रूप में नहीं है। राज्यसभा चुनाव के नामांकन के लिए शुक्रवार आखिरी दिन था। कुल छह फॉर्म भरे गए हैं।

सिंधिया के तीन फाॅर्म के प्रस्तावक

फाॅर्म एक : शिवराज सिंह, गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा, सीतासरन शर्मा, यशोधरा राजे सिंधिया, विश्वास सारंग, सीताराम आदिवासी, पंचूलाल प्रजापति, लीना जैन व राजश्री सिंह। फाॅर्म दो: नागेंद्र सिंह, अशोक रोहाणी, अजय विश्नोई, सुशील ितवारी, राकेश पाल, जालिम पटेल, विजय पाल सिंह, ठाकुरदास नागवंशी, मुनमुन राय व देवेंद्र वर्मा। फाॅर्म तीन: राजेश प्रजापति, वीरेंद्र रघुवंशी, भारत सिंह, गोपीलाल जाटव, महेश राय, केपी त्रिपाठी, पारस जैन, जगदीश देवड़ा व अनिरुद्ध मारू।

गुना, अशोकनगर, करैरा, भांडेर, डबरा, गोहद और अंबाह सीट आरक्षित हैं। मुरैना की अंबाह सीट अजजा और शेष सभी सीटें अजा के लिए आरक्षित हैं। इनमें से गुना भाजपा के पास और 6 सीटें कांग्रेस के पास हैं। भिंड व ग्वालियर पूर्व जैसी सीटों पर भी दलित वोटर निर्णायक रहे थे।

अंचल 34 में से 26 सीटें जीती थी कांग्रेस

22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद उपचुनाव की स्थिति बनेगी। याद रहे, ग्वालियर-चंबल अंचल की कुल 34 सीटों में से 26 पर कांग्रेस चुनाव जीती थी। शेष में सात पर भाजपा और एक सीट पर बसपा प्रत्याशी चुनाव जीते थे। सिंधिया के समर्थन में इस्तीफे सौंपने वाले 22 विधायकों में से 15 ग्वालियर-चंबल अंचल के हैं। दलित नेता होने के कारण कांग्रेस ने बरैया को उम्मीदवार बनाया है।

नामांकन दाखिल कराने साथ आए दिग्विजय से मीडिया ने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने यह कहते हुए बरैया को आगे कर दिया कि आज उनका दिन है।

भोपाल| दलित नेता फूलसिंह बरैया की कांग्रेस से राज्यसभा दावेदारी ज्याेतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में सेंध की तैयारी मानी जा रही है। कांग्रेस बरैया की लोकप्रियता को ग्वालियर-चंबल अंचल की दलित वोट बाहुल्य वाली सीटों पर भुनाना चाहती है। इस अंचल की 34 में से 7 सीटें आरक्षित हैं। इनमें 6 सीटें अभी कांग्रेस के कब्जे में हैं। ऐसे में सिंधिया समर्थक विधायकों द्वारा दिए इस्तीफे मंजूर होने के बाद उपचुनाव की स्थिति में इन सीटों पर बरैया फैक्टर सिंधिया खेमे को कमजोर करने में कारगर हो सकता है।

बरैया की राज्यसभा दावेदारी सिंधिया के गढ़ में सेंध की तैयारी


बरैया का दावा - ग्वालियर-चंबल के अधिकतर विधायकों को जिताया

राज्यसभा के लिए कांग्रेस प्रत्याशी बरैया ने नामांकन के बाद मीडिया से चर्चा में दावा किया कि ग्वालियर-चंबल अंचल में सिंधिया खेमे के अधिकतर विधायकों को उन्होंने प्रचार कर जिताया। 22 बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर हाेते हैं, तो उपचुनाव में सिंधिया व भाजपा मिलकर पांच को भी नहीं जिता पाएंगी। बेंगलुरु में रह रहे विधायकों के बारे में उन्होंने कहा कि वे सिंधिया को पार्टी में अच्छी जगह दिलाने के लिए दबाव बना रहे थे। उनके भाजपा में जाने से अब ये विधायक प्रायश्चित कर रहे हैं। वे सभी लौटकर कांग्रेस में आएंगे।

दिग्विजय गुरुवार को ही दाखिल कर चुके हैं पर्चा

राज्यसभा चुनाव... सिंधिया, बरैया और सोलंकी समेत पांच ने भरा नामांकन फॉर्म
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