अमेरिका में बच्चों की देखभाल पर आय का एक तिहाई तक खर्च

Sagar News - केटी रीली, बेलिंडा लुस्कॉम्ब वर्तमान अमेरिकी जनजीवन का सबसे मुश्किल काम बच्चों की अच्छे तरह से देखभाल करना हो...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:36 AM IST
BAREHATA News - mp news spending up to a third of income on child care in america
केटी रीली, बेलिंडा लुस्कॉम्ब

वर्तमान अमेरिकी जनजीवन का सबसे मुश्किल काम बच्चों की अच्छे तरह से देखभाल करना हो गया है। कुछ अमीर लोगों को छोड़कर अधिकतर लोगों के लिए बच्चों का पालन-पोषण बेहद मुश्किल होता जा रहा है। 28 राज्यों में छोटे बच्चे की देखभाल का एक साल का खर्च एक वर्ष की कॉलेज की फीस के बराबर है। चाइल्ड केयर संगठन के अनुसार बच्चों की देखभाल का राष्ट्रीय औसत खर्च 9000 से 9600 डॉलर प्रतिवर्ष है। कई माता-पिता इससे बहुत अधिक खर्च करते हैं। कई लोगों का यह खर्च आमदनी का एक तिहाई तक है। बोस्टन की 26 वर्षीय एमी डेवीयू इस साल अपने दो वर्ष के बच्चे की देखभाल पर 21000 डॉलर खर्च करेंगी। यह उनके वेतन का एक तिहाई है।

अमेरिका में चाइल्ड केयर का इंफ्रास्ट्रक्चर पेरेंट्स पर बहुत भारी पड़ता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होता है। बिजनेस एक्जीक्यूटिव की संस्था रेडी नेशन के मुताबिक हर साल 57 अरब डॉलर की आय, उत्पादकता और राजस्व की हानि होती है। चाइल्ड केयर का बोझ अर्थव्यवस्था को दो मोर्चों पर प्रभावित करता है। नागरिकों की उत्पादकता कम होती है। ज्यादा से ज्यादा लोग सरकारी सहायता कार्यक्रमों की शरण में जाते हैं। अर्थव्यवस्था के अलावा भावी पीढ़ी भी प्रभावित हो रही है। युवा अमेरिकियों के बच्चे कम हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए किए गए एक सर्वे में बताया गया कि 2018 में 32 वर्ष की आयु के लोगों के बीच जन्म दर सबसे कम रही।

अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग चाइल्ड केयर को लोगों के लिए ठीक मानता है यदि वह परिवार की आय से 7% से अधिक न हो। लेकिन, अधिकांश पेरेंट्स इस मापदंड की खिल्ली उड़ाते हैं। ब्रांडीस यूनिवर्सिटी चाइल्ड इंस्टीट्यूट की 2018 की रिपोर्ट बताती है, लगभग दो तिहाई माता-पिता बच्चे पर इससे अधिक खर्च करते हैं। केंद्र सरकार ने चाइल्ड केयर के लिए अधिक मदद देने का कार्यक्रम दो बार शुरू किया लेकिन इसे बंद करना पड़ा।

दूसरी तरफ चाइल्ड केयर होम के काम में बहुत आय नहीं है। टिपटॉन एडेप्टिव डे केयर सेंटर की डायरेक्टर डेबोराह वांडरगास्ट बताती हैं, सरकारी सब्सिडी के बिना यह बिजनेस मॉडल चलाना संभव नहीं है। वे तीन से चार वर्ष के बच्चे की देखभाल के लिए हर सप्ताह 160 डॉलर लेती हैं। फिर भी, उन्हें फायदा नहीं है।

(टाइम और टाइम लोगो टाइम के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

बीस लाख पेरेंट्स को नौकरी छोड़नी पड़ी

अमेरिकन प्रोग्रेस सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में करीब बीस लाख पेरेंट्स को बच्चे की जिम्मेदारी निभाने के लिए जॉब छोड़ना पड़ा, बदलना पड़ा या नौकरी के ऑफर से इनकार करना पड़ा। 2017 में देश में छह वर्ष से कम आयु के लगभग एक करोड़ 50 लाख बच्चे थे। इनके माता-पिता नौकरी कर रहे थे।

केटी रीली, बेलिंडा लुस्कॉम्ब

वर्तमान अमेरिकी जनजीवन का सबसे मुश्किल काम बच्चों की अच्छे तरह से देखभाल करना हो गया है। कुछ अमीर लोगों को छोड़कर अधिकतर लोगों के लिए बच्चों का पालन-पोषण बेहद मुश्किल होता जा रहा है। 28 राज्यों में छोटे बच्चे की देखभाल का एक साल का खर्च एक वर्ष की कॉलेज की फीस के बराबर है। चाइल्ड केयर संगठन के अनुसार बच्चों की देखभाल का राष्ट्रीय औसत खर्च 9000 से 9600 डॉलर प्रतिवर्ष है। कई माता-पिता इससे बहुत अधिक खर्च करते हैं। कई लोगों का यह खर्च आमदनी का एक तिहाई तक है। बोस्टन की 26 वर्षीय एमी डेवीयू इस साल अपने दो वर्ष के बच्चे की देखभाल पर 21000 डॉलर खर्च करेंगी। यह उनके वेतन का एक तिहाई है।

अमेरिका में चाइल्ड केयर का इंफ्रास्ट्रक्चर पेरेंट्स पर बहुत भारी पड़ता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होता है। बिजनेस एक्जीक्यूटिव की संस्था रेडी नेशन के मुताबिक हर साल 57 अरब डॉलर की आय, उत्पादकता और राजस्व की हानि होती है। चाइल्ड केयर का बोझ अर्थव्यवस्था को दो मोर्चों पर प्रभावित करता है। नागरिकों की उत्पादकता कम होती है। ज्यादा से ज्यादा लोग सरकारी सहायता कार्यक्रमों की शरण में जाते हैं। अर्थव्यवस्था के अलावा भावी पीढ़ी भी प्रभावित हो रही है। युवा अमेरिकियों के बच्चे कम हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए किए गए एक सर्वे में बताया गया कि 2018 में 32 वर्ष की आयु के लोगों के बीच जन्म दर सबसे कम रही।

अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग चाइल्ड केयर को लोगों के लिए ठीक मानता है यदि वह परिवार की आय से 7% से अधिक न हो। लेकिन, अधिकांश पेरेंट्स इस मापदंड की खिल्ली उड़ाते हैं। ब्रांडीस यूनिवर्सिटी चाइल्ड इंस्टीट्यूट की 2018 की रिपोर्ट बताती है, लगभग दो तिहाई माता-पिता बच्चे पर इससे अधिक खर्च करते हैं। केंद्र सरकार ने चाइल्ड केयर के लिए अधिक मदद देने का कार्यक्रम दो बार शुरू किया लेकिन इसे बंद करना पड़ा।

दूसरी तरफ चाइल्ड केयर होम के काम में बहुत आय नहीं है। टिपटॉन एडेप्टिव डे केयर सेंटर की डायरेक्टर डेबोराह वांडरगास्ट बताती हैं, सरकारी सब्सिडी के बिना यह बिजनेस मॉडल चलाना संभव नहीं है। वे तीन से चार वर्ष के बच्चे की देखभाल के लिए हर सप्ताह 160 डॉलर लेती हैं। फिर भी, उन्हें फायदा नहीं है।

(टाइम और टाइम लोगो टाइम के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)

X
BAREHATA News - mp news spending up to a third of income on child care in america
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना