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क्लास में छात्रा बेहोश, अस्पताल पहुंचाने की जगह स्कूल प्रबंधन करता रहा परिजनों का इंतजार, हालत बिगड़ी

Sagar News - बीएमसी में भी नहीं मिला स्ट्रेचर, बेटी को गोद में लेकर कैजुअल्टी तक पहुंचे पिता 9 वीं कक्षा की एक छात्रा स्कूल...

Feb 12, 2020, 09:00 AM IST
Sagar News - mp news student unconscious in class instead of reaching hospital the school management kept waiting for the family condition deteriorated
बीएमसी में भी नहीं मिला स्ट्रेचर, बेटी को गोद में लेकर कैजुअल्टी तक पहुंचे पिता

9 वीं कक्षा की एक छात्रा स्कूल में पढ़ते समय अचानक बेहोश हो गई। प्रबंधन ने छात्रा को
तुरंत अस्पताल ले जाने की जगह करीब एक घंटे तक परिजनों के आने का इंतजार किया।

फिर उन्हें बेटी सौंपकर बेफिक्र हो गए। इसके बाद छात्रा को बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां करीब 30 घंटे तक भर्ती रखने के बाद जब छात्रा को होश नहीं आया तो बीएमसी रैफर कर दिया गया। लेकिन बीएमसी तक ले जाने के िलए न तो उन्हें स्ट्रेचर दिया और न ही एबुलेंस की
व्यवस्था की। इस बात से नाराज परिजनों ने हंगामा कर दिया।

जिसके बाद उन्हें स्ट्रेचर और एबुलेंस की व्यवस्था कराई गई। अब छात्रा का इलाज बीएमसी
में चल रहा है, लेकिन देर रात तक उसे होश नहीं आया।

पिता का आरोप- छात्रा बेहोश कैसे हुई अब इस बात का भी जवाब देने तैयार नहीं प्रबंधन

मकरोनिया निवासी बाबूलाल अहिरवार ने बताया कि उनकी बेटी सुहानी नेहानगर स्थित अभ्योदय हायर सेकंडरी स्कूल में 9 वीं कक्षा में पढ़ती है। सोमवार सुबह 10 बजे स्कूल से बेटी की तबीयत अचानक खराब होने का फोन आया। लेकिन वे काम के सिलसिले में स्कूल से काफी दूर थे। ऐसे में उन्होंने अपने रिश्तेदार को स्कूल भेजा। परिजन करीब एक घंटे बाद जब स्कूल पहुंचे तो उन्हें बेटी बेहोशी की हालत मिली। जिसके वे छात्रा को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। लेकिन 30 घंटे तक भर्ती रखने के बाद यहां से भी छात्रा को रैफर कर दिया गया। बीएमसी पहुंचने पर जब डॉक्टरों ने पिता से बेहोशी का कारण पूछा तो उन्हें भी नहीं पता था कि छात्रा बेहोश कैसे हुई। इस पर उन्होंने प्रबंधन से बात करना चाही, लेकिन कोई इस बात जवाब देने तैयार नहीं है कि छात्रा कब और कैसे बेहोश हुई। इसके बाद दैनिक भास्कर टीम ने भी स्कूल प्रबंधन को फोन किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।


जिला अस्पताल से रैफर करने के बाद जब बाबूलाल अपनी बेटी को लेकर बीएमसी पहुंचे तो यहां भी उन्हें स्ट्रेचर नहीं मिला। जिसके बाद उन्हें बेटी को गोद में उठाकर कैजुअल्टी तक ले जाना पड़ा। हालांकि यहां मौजूद डॉक्टरों ने स्थिति देखकर तुरंत वार्ड बॉय को फटकार लगाई और छात्रा का इलाज शुरू किया। देर रात तक चले इलाज के बाद भी छात्रा की स्थिति गंभीर है और उसे होश नहीं आया।

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