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पढ़ाने का काम छोड़ सालों से ‘बाबूगिरी’ कर रहे शिक्षक, वेतन मिलने में दिक्कत फिर भी कॉलेज वापस जाने को तैयार नहीं

Sagar News - सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक के शिक्षक सालों से पढ़ाई-लिखाई का मूल काम छोड़ संचालनालय या मंत्रालय में...

Jan 16, 2020, 09:10 AM IST
Sagar News - mp news teachers who have been doing 39babugiri39 for years after giving up teaching work still have difficulty in getting salary yet not ready to go back to college
सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक के शिक्षक सालों से पढ़ाई-लिखाई का मूल काम छोड़ संचालनालय या मंत्रालय में गैर शैक्षणिक कार्य में लगे हैं। इसका नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ रहा है, जो इन संस्थानों में पढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं तकनीकी शिक्षा संचालक के पद पर प्रो. वीरेंद्र कुमार को भी तीन साल से अधिक हो गए हैं। इनके अलावा करीब 20 शिक्षक ऐसे हैं, जो 5 से लेकर 25 साल से यहीं बाबूगिरी कर रहे हैं। फिर भी इनका मोह मंत्रालय व संचालनालय से भंग नहीं हो रहा है। इसमें से करीब 10 शिक्षक तो सिर्फ एसबी पॉलिटेक्निक भोपाल से हैं, जो संचालनायल में पदस्थ हैं। वर्तमान हालात तो यह हैं कि शासन ने संचालनालय में पद से अधिक अधिकारी पदस्थ कर रखे हैं। इधर, मूलत: एसबी पॉलिटेक्निक भोपाल के व्याख्याता डॉ. मनोज सिंह, डॉ. अरविंद तोमर, सुखलाल सांगुले एवं आई के अग्रवाल बीते 8 साल से श्यामला हिल्स स्थित टैगोर हॉस्टल में संचालित काउंसलिंग सेल में अटैच हैं। वहीं शासकीय एसबी पॉलिटेक्निक भोपाल के प्रार्चाय डॉ. आशीष डोंगरे का कहना है कि जो शिक्षक संचालनालय या कहीं और पदस्थ हैं, उनकी जगह गेस्ट फैक्लटी से बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था करना पड़ती है।

1. डॉ. वायके अग्रवाल- संयुक्त संचालक हैं। संचालनालय में 2006 से। मूल पद : रीवा इंजीनियरिंग काॅलेज

2. डॉ. अभय कुमार जैन- अतिरिक्त संचालक हैं। 2009 से संचालनायल में हैं। मूल पद : रीवा इंजीनियरिंग काॅलेज

3. डॉ. लक्ष्मी नारायण रेड्‌डी- उप संचालक हैं। 2010 से गैर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। मूल पद : महिला पॉलिटेक्निक भोपाल

4. डॉ. एसके पाण्डेय- उप संचालक। 2010 से संचालनालय में हैं। शासकीय इंजीनियरिंग संवर्ग के हैं। मूल पद- आरजीपीवी यूआईटी

5. डॉ. अरुण नाहर- एडमिशन डायरेक्टर। 18 साल से पॉलिटेक्निक के बाहर सेवाएं दे रहे हैं। दो बार तीन-तीन साल के लिए संचालक के प्रभार में रह चुके हैं, जबकि इनका मूल पद प्राचार्य पॉलिटेक्निक है।

6. एसएके राव- उप संचालक हैं। 2004 से गैर शैक्षणिक कार्य में हैं। मूल पद : व्याख्याता पॉलिटेक्निक

7. डॉ. एसबी चौबे- उप संचालक हैं। 2007 से गैर शैक्षणिक कार्य में हैं। करीब 1 साल के लिए एसबी पॉलिटेक्निक गए और वापस लौट आए।

8. डॉ. एमआर धाकड़- रिसर्च ऑफिसर/अपर सचिव। 2008 से गैर शैक्षणिक कार्य में हैं। मूल पद : महिला पॉलिटेक्निक

9. डॉ.एसके गांधी- संचालनालय में 5 साल से हैं। मूल पद : एसबी पॉलिटेक्निक

10. डॉ. आरके जैन, अपर सचिव हैं। 25 साल से गैर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। एक साल के लिए उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज भेजे गए थे।

11. डॉ. एनके शर्मा, रिसर्च ऑफिसर। 10 साल से गैर शैक्षणिक कार्य में हैं। इन्हें उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज भेजा गया था।

12. डॉ. मोहन सेन- संयुक्त संचालक हैं। 15 साल से संचालनायल/आरजीपीवी में गैर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। मूल पद : इंजीनियरिंग काॅलेज सागर

13. संजय विनायक- रिसर्च आॅफिसर। 10 साल से संचालनालय में। मूल पद : एसबी पॉलिटेक्निक

14. डाॅ. अखिल सिटोके- रिसर्च ऑफिसर हैं। 10 साल से गैर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। मूल पद : महिला पॉलिटेक्निक भोपाल

मूल काम छोड़ 5-25 साल से संचालनालय में डटे हैं शिक्षक


- प्रमोद अग्रवाल, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा विभाग, मप्र

व्यवस्था... एक के आने से दूसरे का वेतन बंद हो जाता है

संयुक्त संचालक डाॅ. मोहन सेन, रिसर्च आॅफिसर डॉ. एनके शर्मा और डाॅ. अखिल सिटोके को वेतन नहीं मिल रहा हैं, फिर भी ये कॉलेज लौटने को तैयार नहीं हैं। दरअसल, इसकी शुरुआत खंडवा पॉलिटेक्निक के प्राचार्य सीबी ढब्बू को रिक्त पद पर संचालनालय में पदस्थ होने से हुई। इन्हें बाद में संयुक्त संचालक बनाया गया। इसके कारण संयुक्त संचालक पद के विरुद्ध वेतन ले रहे एसके राव का वेतन बंद हो गया। वेतन नहीं मिलने से नाराज राव ने आरटीआई आवेदन लगा दिया। इसके प्रभाव में उनका वेतन उप संचालक के पद से निकाला गया। इधर, उप संचालक पद के विरुद्ध वेतन ले रहे रिसर्च आॅफिसर डॉ. सिटोके को वेतन मिलना बंद हाे गया। इसके बाद भी डॉ. सेन और डाॅ. शर्मा को इसी पद पर पदस्थ कर दिया गया। अब इन दोनों को भी वेतन नहीं मिल रहा है। इसके बाद भी ये लोग वापस काॅलेज जाने को तैयार नहीं हैं और न ही शासन इन्हें यहां रिलीव कर रहा है।

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