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  • Sagar News Mp News The Beginning Of Vikram Samvat 2077 Will Begin On March 25 After 19 Years In Ashwin Mahadev Will Begin 1 Month After Sarvapitra Amavasya

विक्रम संवत 2077 की शुरुआत 25 मार्च से, 19 साल बाद अश्विन में अधिकमास, सर्वपितृ अमावस्या के 1 महीने बाद शुरू होंगे शारदेय नवरात्र

एक वर्ष पहले
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नव वर्ष विक्रम संवत 2077 की शुरुआत 25 मार्च गुड़ी पड़वा पर होगी। साल के पहले दिन का सूर्योदय 6.27 बजे होगा। इसके साथ ही चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ हाे जाएगा। साथ ही गुड़ी पड़वा का पूजन भी हाेगा। इस दिन बुधवार होने से ज्योतिषियों का मत है कि नया साल देश में सुख-समृद्धि और धन-धान्य से भरपूर रहेगा। नए साल का नाम प्रमाथी है। पं. रामगोविंद शास्त्री के अनुसार नए साल के पहले दिन वेद में दिए गए संवत्सर सूक्त का पाठ करना चाहिए। ध्वज और कलश पूजन करना चाहिए। उन्होंने बताया नए साल की शुरुआत बुधवार से हो रही है, जो शुभता के प्रतीक हैं। बुध के राज में चंद्र मंत्री रहेंगे। बुध के राज में जल, धन, धान्य, समृद्धि आएगी। चंद्र के मंत्री होने से बारिश और अन्न अच्छा होगा। लोगों की भौतिक सुख-सुविधा बढ़ेगी। चंद्र-बुध पिता-पुत्र ही हैं। दोनोें प्रमुख पद एक ही परिवार में हैं। सूर्य-शनि भी पिता-पुत्र हैं जो मंत्रिमंडल में हैं। इस साल में 21 जून को सूर्यग्रहण हैं जो सुबह 10.11 बजे शुरू होगा और दोपहर 1.41 बजे समाप्त होगा। इस बार 19 साल बाद अश्विन माह में अधिकमास हाे रहा है। इसके चलते शारदेय नवरात्र सर्व पितृ अमावस्या के एक माह की देरी से शुरू हाेंगे।

जन्माष्टमी का पर्व 11 व 12 अगस्त को मनाया जाएगा

वर्ष 2020

गुड़ी पड़वा 25 मार्च

महावीर जयंती 6 अप्रैल

अक्षय तृतीया 26 अप्रैल

रथयात्रा 23 जून

देवशयनी एकादशी 1 जुलाई

नागपंचमी 25 जुलाई

रक्षाबंधन 3 अगस्त

जन्माष्टमी 11-12 अगस्त

गणेश चतुर्थी 22 अगस्त

श्राद्ध पक्ष शुरू 1 सितंबर

सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर

शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर

महाअष्टमी 24 अक्टूबर

दशहरा 25 अक्टूबर

दीपावली 14 नवंबर

देवउठनी एकादशी 26 अक्टूबर

दत्त जयंती 29 दिसंबर

वर्ष 2021

मकर संक्रांति 14 जनवरी

मौनी अमावस्या 11 फरवरी

वसंत पंचमी 16 फरवरी

महाशिवरात्रि 11 मार्च

होली पूजन 28 मार्च

रंगपंचमी 2 अप्रैल

चैत्र अमावस्या 12 अप्रैल

अधिक मास में होगी सप्त सागर
यात्रा, समापन 16 अक्टूबर को


पंडित लक्ष्मीनारायण शास्त्री मंगरा के अनुसार इस साल अधिक मास है। अश्विन का अधिकमास 18 सितंबर से शुरू होगा। इसी दिन से सप्त सागर यात्रा होगी। श्रद्धालु सप्त सागरों की यात्रा करेंगे। इसका समापन 16 अक्टूबर को होगा। उज्जैन में अधिक मास का महत्व अधिक है। सागर सहित संपूर्ण बुंदेलखंड से बड़ी संख्या में यात्री सप्त सागर यात्रा करने आएंगे। पंडित केशव महाराज के अनुसार 19 साल बाद अश्विन का अधिक मास है। यात्री सप्त सागर के साथ नौ नारायण के भी दर्शन-पूजन करेंगे। इसके पहले विक्रम संवत 2058 में अश्विन का अधिकमास था। इसके बाद 2096 में अश्विन का अधिक मास आएगा।
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