व्यक्ति का प्रभाव दूर से और स्वभाव उसके निकट जाने से पता चलता है : विपिन बिहारी

Sagar News - संपूर्ण जगत में परमात्मा ही एकमात्र पुरुष समान है। शेष जीवात्माएं स्त्री वाचक हैं। ईश्वर भक्ति पर कभी प्रहार सहन...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:00 AM IST
Sagar News - mp news the effect of the person goes far and near by nature vipin bihari
संपूर्ण जगत में परमात्मा ही एकमात्र पुरुष समान है। शेष जीवात्माएं स्त्री वाचक हैं। ईश्वर भक्ति पर कभी प्रहार सहन नहीं करते। हनुमानजी श्रेष्ठ संदेश वाहक हैं। वह भक्तों की गलतियों को सुधार कर उन्हें ईश्वर अनुग्रह उपलब्ध कराते हैं। यह बात दादा दरबार मंदिर में रामचरित मानस-हनुमान चालीसा कथा के चाैथे दिन कथा व्यास पंडित विपिन बिहारी साथीजी ने कही।

उन्होंने कहा कि एकादशी व्रत में भगवान को केले का भोग लगाकर उसे दान कर देना चाहिए। किंतु केला स्वयं खाने से मंदबुद्धि संतानें पैदा होती हैं। एकादशी वृत अक्षय पुण्यदायी है। व्यक्ति का प्रभाव दूर से और स्वभाव उसके निकट जाने से ज्ञात होता है। साथीजी ने कहा कि माता की कोई उपमा नहीं होती। उसके सामने ब्रम्ह भी छोटे हो जाते हैं। जो माता की गोद में सिर रखता है वह कभी बड़प्पन के गरूर में नहीं आता। उसके माता पिता भी अपने को बूढ़ा महसूस नहीं करते। उप अर्थात ईश्वरीय भक्ति में वास करने वाला ही उपवास रख पाता है।

भगवान की परीक्षा नहीं उनकी प्रतीक्षा की जाती है। साथीजी ने बताया कि राम नाम में अतुलित बल है उनमें आठ गुण व स्त्रियों में आठ अवगुण बताए गए हैं। कुमति जाते हुए और सुमति आते हुए अच्छी लगती है। हनुमानजी के साथ सदैव सुमति रहती है। दवा रोग की, की जाती है। मौत की कोई दवा नहीं होती। सोने की लंका में चूंकि रावण रूपी अहंकार रहता था। इसलिए वह जलकर नष्ट हो गई। लेकिन हनुमान रूपी कुंदन में राम के वास के कारण उन्हें कुछ नहीं हुआ। कथा में यजमान जयप्रकाश शुक्ला, अनीता शुक्ला, केके गुरु, अर्चना गुरु, बसंत व्यास, माया व्यास एवं संतोष अवस्थी धर्मेंद्र मिश्रा, पंकज वैध, नितिन केशवानी, नितिन अग्निहोत्री एवं दिनेंद्र पांडेय सहित कई लाेग माैजूद थे।

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