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बेटे की याद में कक्ष बनवाने 2 साल पहले पिता ने दी राशि, जिला अस्पताल उदासीन

एक वर्ष पहले
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अन्य दानदाताअाें ने हाथ खींच लिए थे, अब इस्टीमेट बनवा रहे हैं

जिला अस्पताल में अपने चिकित्सक बेटे की याद में कक्ष निर्माण के लिए एक पिता द्वारा दी गई 2.50 लाख रुपए की राशि काे प्रबंधन पिछले दाे सालाें से जमा किए हुए है। इस पर अब तक न ताे काेई कार्रवाई की गई है, न ही किसी भी प्रकार की सूचना दानदाता काे दी गई। दाे साल बाद भी जब कुछ नहीं हुअा ताे पिता ने उक्त राशि वापस मांगने के लिए प्रयास शुरू किए ताे प्रबंधन काे पैसे जमा हाेने की सुध अाई। इसके बाद एक पत्र पीडब्ल्यूडी के अधिकारी काे लिखा गया कि वे अस्पताल में अाकर यह देखें कि कक्ष कहां बन सकता है। एेसे में मामला एक बार फिर से ठंडे बस्ते में चला गया।

जानकारी के मुताबिक चिकित्सक स्वर्गीय डाॅ. रीतेश दीक्षित के पिता सागर पाेस्टल डिवीजन के प्रवर अधीक्षक केके दीक्षित ने 17 फरवरी 2018 काे 2.50 लाख रुपए राेगी कल्याण समिति काे दिए थे। वह भी एेसे समय जब वे अपने बेटे काे खाेने के गम के सदमे में थे।

इसके बाद भी जिला अस्पताल प्रबंधन अाैर राेगी कल्याण समिति के सदस्यों काे न ताे पिता के जज्बात का सम्मान करने की फिक्र हुई न ही यह साेचा कि एक कक्ष अाैर बन जाएगा ताे मरीजों के लिए जगह की सुविधा भी बढ़ जाएगी। दाे साल से अधिक समय तक यह पैसा समिति के पास जमा ही रखा है। गौरतलब है कि स्वर्गीय डाॅ. रीतेश दीक्षित की जिला अस्पताल में ही एनआरसी में पोस्टिंग थी। वे 8 माह तक यहां पदस्थ रहे।

प्ररेणा लेकर दी थी राशि, दूसरी जगह
सदुपयोग हाे इसीलिए मांग रहे वापस


केके दीक्षित ने बताया कि अपने पुत्र की याद में यह राशि मैंने समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर की प्ररेणा से दी थी। उन्होंने भी अपने परिजनों की याद में एेसा किया था। परंतु दाे साल बाद भी जब अस्पताल प्रबंधन अाैर राेगी कल्याण समिति ने जब कुछ नहीं किया ताे मैं यह राशि इसलिए वापस मांग रहा हूं ताकि इसका पैसा दूसरी जगह जरूरतमंदों के लिए लगा सकूं।

Ãप्राइवेट वार्ड के तहत कक्ष बनवाने के लिए स्वर्गीय डाॅ. रीतेश दुबे के पिताजी ने पैसे दिए थे। उस समय कुछ अाैर लाेग भी दान के लिए अागे अाए थे, लेकिन शेष लाेगाें ने राशि नहीं दी। इस कारण से यह काम अटका रहा। हालांकि हमने पीडब्ल्यूडी काे पत्र लिखा है अाैर कक्ष निर्माण के लिए इस्टीमेट बनवा रहे हैं। इसकी प्रक्रिया शुरू हाे गई है। यह बात सही है कि समय लगा है, लेकिन जल्दी ही कक्ष का निर्माण कराया जाएगा।
- डाॅ. वीएस ताेमर,
सिविल सर्जन, जिला अस्पताल
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