अाैषधियाें के देवता हंै चंद्रमा, इसीलिए शरद पूर्णिमा की चांदनी में खीर रखकर सेवन करते हैं लाेग

Sagar News - हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह की शुरुआत से कार्तिक महीने के अंत तक शरद ऋतु रहती है। शरद ऋतु में 2 पूर्णिमा पड़ती...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 09:01 AM IST
Sagar News - mp news the moon is the god of blessings that39s why you will eat it by keeping pudding in the moonlight of sharad purnima
हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह की शुरुआत से कार्तिक महीने के अंत तक शरद ऋतु रहती है। शरद ऋतु में 2 पूर्णिमा पड़ती है। इनमें अश्विन माह की पूर्णिमा महत्वपूर्ण मानी गई हैं। इसी पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार शरद पूर्णिमा रविवार, 13 अक्टूबर को है।पुराणों के अनुसार कुछ रातों का बहुत महत्व है जैसे नवरात्रि, शिवरात्रि और इनके अलावा शरद पूर्णिमा भी शामिल है। पंडित रामगोविंद शास्त्री के मुताबिक श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार चन्द्रमा को औषधि का देवता माना जाता है। इस दिन चांद अपनी 16 कलाओं से पूरा होकर अमृत की वर्षा करता है। मान्यताओं से अलग रसायन शास्त्रियों ने भी इस पूर्णिमा को खास बताया है, जिसके पीछे कई सैद्धांतिक और वैज्ञानिक तथ्य छिपे हुए हैं। इस पूर्णिमा पर चावल और दूध से बनी खीर को चांदनी रात में रखकर प्रात: 4 बजे सेवन किया जाता है। इससे रोग खत्म हो जाते हैं और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। शहर में सिंधी कॉलोनी स्थित झूलेलाल धर्मशाला में श्वास, दमा, खांसी और अस्थमा जैसी बीमारियों के उपचार के लिए 13 अक्टूबर को निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें अल सुबह 4 बजे से दवाई बांटी जाएगी।

वैज्ञानिक शोध के अनुसार चांदी का विशेष महत्व

डाॅ. अभिषेक जैन के मुताबिक एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। यानी की चंद्रमा की रोशनी में बैठना चाहिए। इस दिन बनने वाला वातावरण दमा के रोगियों के लिए विशेषकर लाभकारी माना गया है।

चंद्रमा से बढ़ जाता है औषधियों का प्रभाव

पंडित शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार शरद पूर्णिमा पर औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है। यानी औषधियों का प्रभाव बढ़ जाता है रसाकर्षण के कारण जब अंदर का पदार्थ सांद्र होने लगता है, तब रिक्तिकाओं से विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। पंडित लक्ष्मीनारायण शास्त्री मगरा के अनुसार लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है। सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है।

विशेष रूप से बनाई जाती है खीर, रसायनशास्त्री भी इस मत से सहमत : डाॅ. हरीसिंह गाैर विश्वविद्यालय के कैमिस्ट्री विभाग के प्राे. एपी मिश्रा के अनुसार दूध में लैक्टोज शुगर, कैल्सीन प्राेटीन, कैल्सियम सहित अन्य पाेषक तत्व होते हैं। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है। चंद्रमा की किरणाें से निकलने वाले विशेष रेडियेशन के संपर्क से यह खीर विशेष हाे जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है और इस खीर का सेवन सेहत के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इसका सेवन अायुवर्धक अाैर अाराेग्यदायक हाेता है।

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