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पीएचई के ईई ने कहा-541 शिकायतें आईं, सभी हल कर दीं, कमिश्नर बोले-एक भी व्यक्ति पानी के लिए परेशान न हो

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:06 AM IST

Sagar News - पेयजल के लिए किसी व्यक्ति को परेशान न होना पड़े इस बात का ध्यान रखा जाए। जिन नलजल योजनाओं में पानी उपलब्ध है उन्हें...

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पेयजल के लिए किसी व्यक्ति को परेशान न होना पड़े इस बात का ध्यान रखा जाए। जिन नलजल योजनाओं में पानी उपलब्ध है उन्हें चालू रखा जाए। यदि कोई नलजल योजना किसी कारण से बंद है उसे दूर कर तुरंत चालू कराएं। जिन नलजल योजनाओं के जल स्त्रोत सूख गए हैं उनके बदले दूसरे स्थान पर नलकूप खनन कर पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें।

यह बात कमिश्नर मनोहर दुबे ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने कहा कि कहीं भी पेयजल की कमी दिखाई देने पर पंचायत के सरपंच एवं सचिवों से मिलकर पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें। पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री एमसी अहिरवार ने बताया कि पेयजल से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम में 541 शिकायतें आईं जिनका निराकरण समय-सीमा के भीतर कर दिया गया। कमिश्नर दुबे ने शहरी क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता के लिए नगरीय प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को साथ-साथ काम करने के लिए कहा। एसडीएम, तहसीलदार, सीईओ एवं सीएमओ को निर्देश दिए कि वे अपने कार्यालयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करेंगे। बैठक में कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक, सीईअाे जिला पंचायत चंद्रशेखर शुक्ला, निगमायुक्त अनुराग वर्मा आदि मौजूद थे।

गर्भवतियों का हो संस्थागत प्रसव, एसडीएम तहसीलदार दें ध्यान

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जिले की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने, जन्मजात विकृति से बचाने, इंफेक्शन से बचाने, कुपोषण से बचाने के लिए आवश्यक है कि लक्ष्य दंपत्तियों से निरंतर सम्पर्क रखा जाए। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एएनएम यह सुनिश्चित करें कि गर्भवती महिला को क्या-क्या आवश्यक उपचार दिए जाने हैं। शत प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का प्रसव संस्थागत होना चाहिए। लक्ष्य दंपत्तियों आदि की जानकारी पोर्टल पर अपडेट रखना सुनिश्चित करें। इसके लिए एसडीएम तहसीलदार प्रत्येक माह एक बार इस संदर्भ में समीक्षा बैठक अवश्य लें। आशा कार्यकर्ताओं की बैठक लें एवं पंजी का निरीक्षण भी करें।

भास्कर संवाददाता | सागर

पेयजल के लिए किसी व्यक्ति को परेशान न होना पड़े इस बात का ध्यान रखा जाए। जिन नलजल योजनाओं में पानी उपलब्ध है उन्हें चालू रखा जाए। यदि कोई नलजल योजना किसी कारण से बंद है उसे दूर कर तुरंत चालू कराएं। जिन नलजल योजनाओं के जल स्त्रोत सूख गए हैं उनके बदले दूसरे स्थान पर नलकूप खनन कर पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें।

यह बात कमिश्नर मनोहर दुबे ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने कहा कि कहीं भी पेयजल की कमी दिखाई देने पर पंचायत के सरपंच एवं सचिवों से मिलकर पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें। पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री एमसी अहिरवार ने बताया कि पेयजल से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम में 541 शिकायतें आईं जिनका निराकरण समय-सीमा के भीतर कर दिया गया। कमिश्नर दुबे ने शहरी क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता के लिए नगरीय प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को साथ-साथ काम करने के लिए कहा। एसडीएम, तहसीलदार, सीईओ एवं सीएमओ को निर्देश दिए कि वे अपने कार्यालयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करेंगे। बैठक में कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक, सीईअाे जिला पंचायत चंद्रशेखर शुक्ला, निगमायुक्त अनुराग वर्मा आदि मौजूद थे।

किसानों का भुगतान जारी रखें, कठिनाई अाने पर तुरंत दूर करें

कमिश्नर ने रबी फसल उपार्जन के संबंध में अधिकारियों से गेंहू, चना, मसूर आदि के उपार्जन, परिवहन, भण्डारण एवं भुगतान के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा भुगतान की प्रक्रिया को निरंतर रखा जाए। यदि भुगतान में किसी तरह की कठिनाई आ रही है तो उसे दूर करने के प्रयास करें। आधार कार्डों की शत प्रतिशत पोर्टल पर फीडिंग कराई जाए। उन्होंने राजस्व विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी राजस्व प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया जाए। सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का समय सीमा पर निराकरण करें। उन्होंने कहा कि 2 से 5 साल तक लंबित प्रकरणों पर विशेष ध्यान दिया जाए। राजस्व अधिकारी अपने न्यायालय में बैठकर उन्हें निराकृत करें। तहसील राजस्व न्यायालय में तहसीलदार शाहगढ़ को अच्छा काम करने पर बधाई दी गई।

नगर निगम
बरसात के पहले शहर के बड़े नालों की सफाई पर नगर निगम हर साल लाखों रुपए खर्च कर रहा है। इस बार भी नालों की सफाई के लिए प्लान तैयार हो चुका है। मशीनें की खरीदी भी हो गई है। बताया जा रहा है कि 25 मई के बाद नालों की सफाई अभियान शुरू किया जाएगा। लेकिन निगम अधिकारी अतिक्रमण हटाने को लेकर निर्णय नहीं ले पाए हैं। जबकि बीते दो सालों से निगम और प्रशासन के बीच अतिक्रमणों की सूची घूम रही है। अफसर अतिक्रमणों को हटाने के लिए इस बार भी रूचि नहीं दिखा रहे हैं। यह वहीं नाले हैं, जिन पर अतिक्रमण की वजह से बारिश के समय निचली बस्तियों में पानी पहुंच जाता है। जानकारों का मानना है कि जब तक नाले, चौड़े और गहरे नहीं होंगे तब तक ड्रेनेज सिस्टम सुधर नहीं सकता। लेकिन यह तभी संभव है। जब नालों से अतिक्रमण हटाया जाए।नगर निगम इस बार नालों के अतिक्रमण को हटाने की जगह उनकी सफाई को लेकर अभियान चलाएगा। शहर के नालों पर काबिज पक्के व अस्थाई अतिक्रमण हटाने के लिए जिला व निगम प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। गौरतलब है कि निगम ने नालों का सीमांकन कराकर अतिक्रमण नापा था। जबकि निगम व राजस्व विभाग के पास भी नालों पर हुए अतिक्रमण की पूरी जानकारी है। शहर के मधुकरशाह वार्ड, तिली, शिवाजीनगर, पंतनगर वार्ड, विट्‌ठलनगर, तुलसीनगर आदि वार्डों में नालों पर कब्जा है, जो अभी तक नहीं हटाए गए हैं।

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