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तालाब में गंदा पानी न मिलने देने की योजना सिर्फ कागजों में
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल : 31 मार्च की है मियाद, सागर
में एसटीपी बनकर तैयार लेकिन चालू नहीं हो पाया
शहर में चल रहे सीवरेज काम को समेटने के लिए जहां मियाद बढ़ाई जा रही है तो भोपाल से इसका काम इसी महीने में समटने को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। दरअसल, पिछले दिनों नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त पी नरहरि ने नगरीय निकाय के अफसरों को निर्देश दिए है कि 31 मार्च से पहले सीवेज ट्रीटमेंट प्लॉट बनाने काम पूरा कर लंे। सागर में एसटीपी का काम पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि पहले सीवरेज के काम को समेटने के लिए मार्च 2020 तक की मियाद तय की गई थी।
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त ने निर्देश जारी किए है कि नदी और तालाबों में सीवेज नहीं जाए। इसका पालन नहीं करने पर संबंधित नगरीय निकाय को जुर्माना भरना पड़ेगा। जबकि सागर तालाब में अभी भी कई ऐसे नाले हैं, जिनकी चैनल सीधे तालाब में ही मिलती है। जिसकी रोकथाम के लिए अभी तक केवल कागजों पर ही प्लानिंग की गई है। गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने छह माह पहले अगस्त 2019 में केंद्र और राज्यों के आदेश जारी किया था कि वे 31 मार्च 2020 तक सुनिश्चित करें कि नदियों-पेयजल स्रोतों में 100 फीसदी अनट्रीटेड सीवेज और वेस्ट वाटर का मिलना बंद कराएं। ऐसा नहीं हो पाने की स्थिति में संबंधित नगरीय निकाय या औद्योगिक ईकाई से प्रति नाला 5 लाख रुपए का हर्जाना वसूल किया जाए। एनजीटी का यह फैसला मानना इसलिए भी बाध्यकारी है क्योंकि वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी किए थे।
समय पर काम करना चुनौती: सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत काम कर रही लक्ष्मी सिविल कंपनी का काम अभी भी शहर में कई स्थानों पर चल रहा है। कंपनी फिलहाल तेजी के साथ काम कर रही है, लेकिन इस अवधि में काम समेटना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। उधर, कंपनी के द्वारा किए जा रहे काम को लेकर भी अब गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।