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तनाव से लड़ने की शक्ति मानव शरीर में लेकिन लंबे समय तक इसका बना रहना घातक : योगाचार्य भार्गव

Sagar News - विवि के योग विज्ञान विभाग में विशेषज्ञों ने बताए तनाव से निपटने के उपाय आधुनिक बदलती जीवन शैली में एवं तनाव...

Feb 17, 2020, 08:56 AM IST
Sagar News - mp news the power to fight stress in the human body but its long term survival is fatal yogacharya bhargava
विवि के योग विज्ञान विभाग में विशेषज्ञों ने बताए तनाव से निपटने के उपाय

आधुनिक बदलती जीवन शैली में एवं तनाव जनित रोगों के लिए विशेष रूप से हृदय संबंधी रोगों से बचाव के लिए योग निद्रा एवं त्राटक बेहद उपयोगी हैं। इनसे प्रत्येक व्यक्ति का समग्र विकास संभव है। योग निद्रा मनोकायिक योग विधि के रूप में परमहंस सत्यानंद द्वारा न्यास विधि से 1955 में विकसित की गई। त्राटक हठयोगिक षठकर्मों का श्रेष्ठ योगाभ्यास है, जो शैव तथा वैष्णव योगियों द्वारा प्रदत्त है।

यह बात हैदराबाद से आए योगाचार्य एनआर भार्गव ने कही। वे डाॅ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में योग निद्रा एवं त्राटक पर आधारित व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। योगाचार्य भार्गव ने कहा कि जीवन की बढ़ती जटिलता एवं परिस्थितियों का दबाव तनाव की विषम समस्या के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। तनावपूर्ण स्थिति से निपटने की व्यवस्था प्रकृति ने मनुष्य शरीर में दी है। लेकिन बार-बार लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति के बने रहने के कारण यह व्यवस्था चरमरा जाती है। इस अवस्था में हार्मोन का स्राव अनावश्यक एवं अत्यधिक मात्रा में होता है, जो शरीर के विभिन्न अंग-अवयवों पर दुष्प्रभाव डालता है। मांसपेशियों में खिचाव, पेट दर्द, कंधे व पैर में दर्द, दस्त, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब व हृदयगति की अनियमितता, थकान, सिरदर्द आदि शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं। अधिक गम्भीर होने पर इसके दुष्परिणाम आंत के फोड़े (पेप्टिक अल्सर), हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, गठिया, अनिद्रा, कोलाइटिस, कब्ज, एलर्जी, स्नायु दुर्बलता, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी जैसे रोगों के रूप में प्रकट होती है। आज का युवा किसी न किसी मानसिक रोग से ग्रस्त है। संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उन्होंने आहार-विहार एवं योगाभ्यासों का समन्वय आवश्यक बताया।

योग विभागाध्यक्ष प्रो. गणेश शंकर गिरि ने कहा कि प्राचीन काल की अपेक्षा योग की आवश्यकता आधुनिक समय में ज्यादा है। क्योंकि आज हमारी जीवन शैली विकृत हो गई है। योग हमारे शरीर व मन की रोग प्रतिरोधकता को बढ़ाता है। रोगों से लड़ने की शक्ति देता है। योग द्वारा अनेक प्रकार के मनोकायिक रोगों से बचाव कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डाॅ. अरूण साव ने किया।

इस अवसर पर सूरेश, प्रभा, चंद्रेश, रोजश, अवधेश, निधि, समीक्षा, प्रियांशी, नीति, सुमित, दिपश, उमेश, ब्रजेश ठाकुर, अजय दुबे, कोमल, ज्योति, प्रवेश, महेन्द्र, दिनेश सहित विद्यार्थी व शिक्षक मौजूद थे।

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