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दावा था हजारों इस्तीफों का, हीरासिंह-कैथोरिया को छोड़ सब पीछे हटे; सुरखी की चुनावी तैयारियां शुरू
ज्योतिरादित्य सिंिधया के समर्थन में मंत्री पद और विधायकी छोड़ने वाले गोविंदसिंह राजपूत के भाई हीरासिंह राजपूत ने बुधवार को जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने दावा किया था कि जिले से हजारों की संख्या में अन्य कांग्रेसी भी इस्तीफा देंगे। शनिवार को उनके इस दावे के चार दिन गुजर गए। अब तक बड़े नाम के रूप में केवल बीना से प्रत्याशी रहे शशि कैथोरिया ने इस्तीफा दिया है। इधर विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने सुरखी विस क्षेत्र को खाली घोषित कर दिया है। यानी राजपूत का इस्तीफा स्वीकार हो गया है और उनका चुनाव मैदान में जाना तय है।
जानकारों के अनुसार राजपूत बंधुओं की राजनीति इस समय संक्रमणकाल से गुजर रही है। देर-सबेर यह तय हो जाएगा कि उनका राजनीतिक भविष्य क्या है। लेकिन इन दोनों के लिए उनके करीबी अपने करियर की बलि देने को तैयार नहीं हैं। इसके अलावा एक बड़ा कारण ये भी है कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पर भी ये लोग नजर जमाए हैं। उन्हें भरोसा है कि कांग्रेस की सरकार बरकरार रहेगी।
उम्मीद की जा रही थी कि राजपूत बंधुओं के पक्ष में उनके करीबी जरूर इस्तीफा देंगे। इन लोगों में पूर्व जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष कमलेश बघेल, वकील शिवदयाल बड़ोन्या, अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष रहे सगीर खान, जिला प्रवक्ता देवेंद्र फुसकेले, राहतगढ़ से विनोद ओसवाल, दीपक जैन डैनी, पूर्व उप-महापौर संतोष पांडे, जिलाध्यक्ष रही कल्पात्री देवी, गोविंदसिंह मालथौन, वरिष्ठ वकील अनिलसिंह, कांग्रेस नेता राकेश राय, अनिल श्रीवास्तव पीपरा, अभिषेक अंकू चौरसिया, दीपक घनघोरिया समेत सुरखी विस क्षेत्र के दर्जनों ऐसे पार्टी पदाधिकारी-कार्यकर्ता शामिल हैं। लेकिन इनमें से किसी ने भी अब तक इस्तीफा नहीं दिया। इनमें से बघेल को जहां जिला योजना समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त जाना लगभग तय हो चुका था। वहीं बड़ोन्या को हाल ही में नोटरी वकील बनाया गया। घनघोरिया, अनिल सरीखे कुछेक पदाधिकारियों का राशन दुकानों के संचालन में हस्तक्षेप जग-जाहिर है। इनमें से बघेल का कहना है कि मैं राजपूत बंधुओं का पारिवारिक मित्र भले हूं लेकिन उसके पहले मैं कांग्रेसी हूं और मेरा समर्पण पार्टी के प्रति पूर्ववत है। इसलिए मैंने पार्टी नहीं छोड़ी। सरकार बनने के बाद पिछले साल गोविंदसिंह राजपूत और उनके भाई हीरासिंह राजपूत ने सुरखी विस क्षेत्र में बढ़-चढ़कर होली मनाई थी। हर दूसरे दिन इन लोगों के किसी न किसी कार्यक्रम में फाग गाते वीडियो जारी हुए थे। लेकिन इस बार स्थिति एक दम उलट है। सुरखी तो ठीक राजपूत के तहसीली स्थित ऑफिस कम बंगले में सन्नाटा पसरा हुआ है। गोविंदसिंह जहां बंगलुरू के रिसॉर्ट में हंैं वहीं हीरासिंह घर से ही नहीं निकल रहे।
इस्तीफा नहीं मिला है, दूसरा इंतजाम किया जाएगा: चंद्रप्रभाष
बगैर जिलाध्यक्ष चल रही कांग्रेस को लेकर मप्र के संगठन प्रभारी बी चंद्रप्रभाष शेखर का कहना है कि मुझे अब तक हीरासिंह राजपूत का इस्तीफा नहीं मिला है। अगर उन्होंने दे दिया है तो कोई बात नहीं। संगठन स्तर पर दूसरा इंतजाम किया जाएगा। इधर वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में तैनात वीरेंद्र गौर, प्रदेश आलाकमान की तरफ से प्रदेश व जिला संगठन के बीच में समन्वय की भूमिका निभा रहे हैं।
मंत्री बंगले में बैठक के लिए लगाया जा रहा टैंट।
हीरासिंह आज करेंगे समर्थकों की बैठक
सुरखी विधानसभा में उप-चुनाव की नौबत आते ही हीरासिंह राजपूत सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने रविवार को सुरखी क्षेत्र के समर्थक व मतदाताओं की बैठक बुलाई है। इधर राजपूत ने कांग्रेस द्वारा उन पर व उनके भाई गोविंदसिंह राजपूत पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब दिया है। हीरासिंह का कहना है कि मैंने व मेरे परिवार ने कांग्रेस को 25 साल से अपने खून-पसीने से सींचा है। आज जब हमारे नेता का अपमान किया गया तो हम लोग डंके की चोट पर पार्टी से अलग हो गए। दूसरी ओर जो लोग हम लोगों की कार्यप्रणाली पर आरोप लगा रहे हैं, वे जरा अपने गिरेबां में झांक कर देखें। अगर वे सच्चे और ईमानदार कांग्रेसी होते तो सागर विस क्षेत्र मेंं कांग्रेस लगातार 6 चुनाव नहीं हारती। दरअसल ये लोग भितरघाती हैं जो अब अपने असल रूप में आ गए हैंं।