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पार्षद बनने का सपना देखने वालों ने अतिक्रमण हटाने पहुंचे अमले को डंडे के जोर पर लौटा दिया

Sagar News - कैंट एरिया में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई बुधवार को भी नहीं हो पाई। कैंट का मैदानी स्टाफ जरूर डीएनसीबी स्कूल के...

Jan 16, 2020, 09:10 AM IST
Sagar News - mp news those who dreamed of becoming corporators who came to remove the encroachment returned the staff on the strength of the poles
कैंट एरिया में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई बुधवार को भी नहीं हो पाई। कैंट का मैदानी स्टाफ जरूर डीएनसीबी स्कूल के आसपास इकट्‌ठा हो गया लेकिन पुलिस व जिला प्रशासन से कार्यपालिक मजिस्ट्रेट नहीं मिले तो वे मुहिम शुरु ही नहीं हो पाई। दूसरी ओर इस स्थिति का कुछ लाेगों ने फायदा उठाने की भी कोशिश की।

सदर के विभिन्न वार्डों से पार्षद बनने का सपना पालने वाले इन लोगों ने लोगों ने अतिक्रमण हटवाने आए चतुर्थ श्रेणी के अमले को डंडे के बल पर खदेड़ने का स्टंट किया। इन लोगों में श्याम सुंदर मिश्रा, हीरालाल खटीक, बिंचू चौकसे, सौरभ केशरवानी मुख्य रूप से शामिल थे।

वोट बैंक बचाने की गरज से पार्षद भी मौके पर पहुंचे : कैंट ने जिन 42 अतिक्रमण को चिन्हित किया है। उनमे से अधिकांश वार्ड नंबर 1 से 4 के बीच हैं। इसलिए इन वार्डों के पार्षद उनके प्रतिनिधियों को अपने वोट बैंक की चिंता ज्यादा थी, नतीजतन वे भी मौके पर पहुंच गए लेकिन जनता की नाराजगी को देखते हुए एक तरफ चुपचाप खड़े रहे। इन पार्षदों में मोहम्मद जिलानी मकरानी, वीरेंद्र पटेल, प्रभुदयाल पटेल, शेखर चौधरी व पार्षद प्रतिनिधि बिंचू चौकसे, हरिओम केशरवानी शामिल थे।

चुनावी स्टंट
20 साल पहले सहमति दी थी, अब विरोध का ड्राॅमा कर रहे हैं

कैंट निवासी विश्वास केशरवानी ने कहा कि पार्षदों को अब अपने वोट कटने का डर सता रहा है। इसलिए ये लोग यहां कार्रवाई के विरोध का ड्रामा करने आए हैं। हकीकत ये है कि वर्तमान में प्रस्तावित अतिक्रमण की कार्रवाई के लिए ये लोग ही उत्तरदायी हैं। दरअसल 1999 में कैंट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए तत्कालीन पार्षदों ने लिखित में सहमति दी थी। इनमें से कुछ अभी भी पार्षद हैं, वहीं कुछेक के परिजन पार्षद हैं। गुरमीतसिंह इल्ले ने कहा कि पार्षदों की अकर्मण्यता के चलते ही एरिया के 11 हजार वोटर्स के नाम कट गए। लोगों के मकानों की लीज पूर्णत: निरस्त कर दी गई।

कार्रवाई नहीं रुकेगी, खदेड़ने वालों की पुलिस से शिकायत करेंगे

Ãअतिक्रमणरोधी कार्रवाई को लेकर कैंट बोर्ड के सीईओ राजीवकुमार का कहना है कि बुधवार को कार्यपालिक मजिस्ट्रेट नहीं मिले, इसलिए कार्रवाई नहीं हो पाई। गुरुवार को पुन: प्रयास करेंगे। वहीं जिन लाेगों ने हमारे स्टाफ को डंडे के जोर पर खदेड़ा है, उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाएगी।

इधर अलग खेल... आंख मूंदकर बनने दी डॉ. जैन की फौलादी बिल्डिंग, अब इंदौर से एक्सपर्ट बुलाने के नाम पर दिया अभयदान

सागर | नगर निगम की भवन एवं भूमि शाखा में अजीब ही खेल चल रहा है। अफसरों ने पहले आंख मूंदकर डॉक्टर मनीष जैन की फौलादी बिल्डिंग बनने दी। अब जब बिल्डिंग में हुए 18 फीट ज्यादा निर्माण को तोड़ने का समय आया तो निगम ने इंदौर से एक्सपर्ट बुलाने के नाम पर अतिक्रमण को अभयदान दे दिया। दरअसल डॉ. मनीष जैन की चार मंजिला इमारत दूसरे माले तक पहुंचते ही शिकायतों का दौर शुरू हो गया था।

परंपरा के अनुसार नगर निगम के संबंधित प्रभारी ईई रमेश चौधरी, एई राजकुमार साहू, सब इंजीनियर महादेव सोनी ने इस संबंध में कार्रवाई भी की। निगम नोटिस देता रहा और डॉक्टर 18 फीट ज्यादा जगह पर इमारत को बनवाते रहे। बीच में ज्यादा दबाव आया तो निगम का अमला मौके पर भी पहुंचा लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं की। सूत्रों की मानंे तो नगर निगम अमले के वहां पहुंचते ही जनप्रतिनिधियों का फोन घन घना जाता था। हालांकि यह सब भी इस बिल्डिंग के निर्बाध बनने की स्क्रिप्ट का एक हिस्सा था।

Âनोटिसों तक ही रहती है कार्रवाई सीमित : भवन एवं भूमि निर्माण शाखा के अनुसार बिल्डिंग का निर्माण स्वीकृत नक्शे से 18 फीट ज्यादा है। वहीं बेसमेंट की परमिशन भी नहीं है। इधर निगम डॉक्टर जैन को एक बार फिर अभयदान देने की तैयारी में है। चेन वाली हैवी जेसीबी से बिल्डिंग तोड़ने में नाकाम नगर निगम अब इंदौर से एक्सपर्ट बुलाने की बात कर रहा है। अंदर की खबर यह है यह सारा खेल अतिक्रमण मुहिम के टलने तक डॉ. जैन को राहत देने के लिए रचा गया है। वैसे तो इस बिल्डिंग की शिकायतों को लेकर निगम के पास ढेर लगा है लेकिन निगम की मुहिम केवल नोटिसों तक ही सीमित रही है।

Âजिनके अतिक्रमण टूटे, उस कार्रवाई में हुए खर्च की होगी वसूली : बीते दिनों जिन अतिक्रमणों को ध्वस्त किया गया है। उन अतिक्रमणकारियों को अब नया नोटिस देने की तैयारी कर ली है। यह नोटिस खर्च की वसूली को लेकर होगा। दरअसल नगर निगम ने अभी तक जितने भी बड़े अतिक्रमण तोड़े हैं। उनमें लगने वाली मशीनरी का डीजल व उनका किराया भी अतिक्रमणकारियों से वसूल किया जाएगा।

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