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समझदार ताे समझ जाता है लेकिन नासमझ कभी नहीं समझता: पं. बिपिन बिहारी

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 04:27 AM IST

Sagar News - एक कर्णकटु शब्द ने पूरा महाभारत रचकर वंश नाश कर दिया, इसलिए सदैव मृदुभाषी कर्णप्रिय बाेल तोल-मोल कर बोलना चाहिए।...

Sagar News - mp news understands understanding but never mindless p bipin bihari
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एक कर्णकटु शब्द ने पूरा महाभारत रचकर वंश नाश कर दिया, इसलिए सदैव मृदुभाषी कर्णप्रिय बाेल तोल-मोल कर बोलना चाहिए। जिस प्रकार सारी सावधानी रखने पर भी खाने में बाल निकल आता है। उसी प्रकार भक्ति करते करते बालकृष्ण मिल जाते हैं। ईश्वरीय सत्ता के अतिरिक्त पूरा संसार मिथ्या है। संतान नहीं होना, संतान का मर जाना एवं संतान का खराब होना तीन प्रमुख कष्ट है। संतान काे माता-पिता का गौरव बढाने की जगह कभी घटाना नहीं चाहिए उसके काम से पिता को गौरवान्वित होना चाहिए।

यह बात दूसरे दिन की भागवत कथा में कथा व्यास पं.विपिन बिहारी महाराज ने कही। उन्होंने बताया कि संतान काे रोग, उसके प्रारब्ध से कायर होना, वंश दोष से निर्धन होना, पिता के दोष से कुमार्गी होना। उन्होंने कहा कि बगैर कुल गोत्र के पिण्ड दान से मुक्ति प्राप्त नहीं होती जहां परमात्मा का भजन होता है वहां दुष्ट आत्माएं नहीं आती जो ऊपर वाले का नाम लेता है उसे ऊपरी बाधाएं परेशान नहीं करती कथा में अर्थ के साथ व्यर्थ भी होता है क्योंकि व्यर्थ ही अर्थ को संभाले रहता है। इसलिये कथा में आप और आपमें कथा बैठना चाहिए।

भागवत में सुधा देवलिया, धर्मेंद्र मिश्रा, धनसिंह ठाकुर, गोविंद सिंह बम्होरी बीका, रामेश्वर प्रसाद तिवारी, सुधीर शास्त्री, प्रदीप दुबे, नरेन्द्र नंदू रैकवार, संगीता पाण्डेय, नितिन अग्निहोत्री, हरिनारायण खरे, बसंत चाैरसिया, बालकिशन रैकवार अाैर अशोक रायकवार उपस्थित थे। कथा में पं आत्मदेव के पुत्र गो कर्ण एवं धंन्धकारी, भीष्म पितामह द्रोपदी की कथा सुनाते हुए कहा कि समझदार समझ जाता है किन्तु नासमझ कभी नहीं समझता और छोटे काम करने वाले को ही बडा पद प्राप्त होता है।

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