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संविधान ने महिलाओं को दिए अधिकार, फिर भी वह हो रहीं शोषण का शिकार: महाजन

विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शुक्रवार को त्रिर| बौद्ध विहार और संघमित्रा महिला मंडल ने कार्यक्रम का आयोजन...

Dainik Bhaskar

Mar 10, 2018, 04:50 AM IST
संविधान ने महिलाओं को दिए अधिकार, फिर भी वह हो रहीं शोषण का शिकार: महाजन
विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शुक्रवार को त्रिर| बौद्ध विहार और संघमित्रा महिला मंडल ने कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें उपस्थित महिलाओं ने संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों और सामाजिक जवाबदेही पर अपने विचार व्यक्त किए। सामाजिक कार्यकर्ता सुषमा महाजन ने आज के परिवेश में महिला संगठन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। बिना संगठन के महिलाओं को अपने संवैधानिक अधिकार मिलना संभव नहीं है। भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में आज भी महिलाओं को शोषण एवं जातीय हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। महिलाओं के प्रति समाज को अच्छी सोच विकसित करनी होगी। इसके लिए सभी संगठनों को जमीनी स्तर पर संघर्ष करना होगा और उनके साथ न्याय करना होगा। सावित्री बाई फुले से लेकर रमाबाई आंबेडकर के जीवन संघर्ष पर अपने विचार व्यक्त किए। मंडल की अध्यक्ष नंदा थमके ने कहा महिलाओं को हमेशा बेटा-बेटी में भेद नहीं करना चाहिए। महिलाओं को खुद सशक्त होना होगा। मनीषा महाले ने बाबा साहब के संघर्ष के पीछे रमाबाई के त्याग और जीवन संघर्ष पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में कंचना ढोके, इंदू गोलाईत, उमा बागडे, चंद्रकला गजभिए, सीता नागले, मनोरमा हुमने, रिया चौकीकर, ममता चौकीकर, सविता सिरसाट, कंचन सातनकर, दुर्गा पाटील, सुशीला राऊत, कमला आथनकर आदि लोग उपस्थित थे।

आयोजन

त्रिर| बौद्ध विहार और संघमित्रा महिला मंडल ने महिला दिवस के तहत किया कार्यक्रम

सारनी। बौद्ध विहार में महिला दिवस पर कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं।

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