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भवनों से पूर्व का हटाकर वर्तमान नपाध्यक्ष का लिख दिया नाम

नगर पालिका सारनी में शिलान्यासों और भवनों पर अब नाम की लड़ाई शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की परिषद यानी...

Dainik Bhaskar

Feb 21, 2018, 05:45 AM IST
नगर पालिका सारनी में शिलान्यासों और भवनों पर अब नाम की लड़ाई शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की परिषद यानी मीनाक्षी मोहबे के अध्यक्ष कार्यकाल में हुए शिलान्यासों और भवनों पर वर्तमान अध्यक्ष का नाम लिखे जाने से पूर्व नपाध्यक्ष नाराज हो गईं। उन्होंने सीएमओ से मामले की शिकायत की है।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी मोहबे ने बताया पिछली परिषद के लोकार्पण, भूमिपूजन के शिलालेखों पर कालिख पोतकर उनका नाम हटाने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा जब नए नाम लिखे गए तो उनके कार्यकाल में बने भवनों से उनका नाम हटाकर वर्तमान अध्यक्ष का नाम लिखे जाने का षडयंत्र किया जा रहा है। वर्तमान अध्यक्ष उनके कार्यकाल के कार्यों को खुद का बताकर समाजों और जनता के बीच झूठी वाहवाही लूट रही हैं। श्रीमती मोहबे ने कहा ताजा उदाहरण कुनबी समाज के कार्यक्रम का ही है। उन्होंने सीएमओ पवन राय को इस पूरे मामले की लिखित शिकायत की है। मामले को लेकर वर्तमान अध्यक्ष आशा भारती ने कहा शिलान्यासों को आचार संहिता के कारण पोता गया था। नए नाम लिखने की जानकारी नहीं है। वे दूसरे की नहीं, बल्कि अपने ही कार्यकाल की बातें करती हैं।

सारनी। भाजपा शासनकाल में बने भवनों पर वर्तमान अध्यक्ष का नाम लिखा है।

सुधा ने जेपी को दिया 2.35 लाख का चेक, खाते में आई राशि, विवाद खत्म

सारनी| भाजपा के सारनी मंडल अध्यक्ष सुधा चंद्रा और स्थाई समिति सदस्य जेपी सिंह के बीच रुपए के लेन-देन को लेकर चल रहा विवाद खत्म हो गया। सुधा चंद्रा ने जेपी सिंह को 2.35 लाख रुपए का चेक दिया। इसकी राशि जेपी के खाते में आने के बाद मामला शांत हुआ। सोमवार को भाजपा कार्यालय में जेपी ने खुद को बंद कर फांसी लगाने तक की धमकी दे दी थी। मंडल अध्यक्ष सुधा चंद्रा और जेपी सिंह के बीच ठेकेदारी को लेकर रुपए का लेनदेन चल रहा था। करीब ढाई लाख रुपए के लेनदेन में से समझौते की बैठक के दौरान 2.35 लाख की देनदारी सुधा की ओर निकली थी। इसी को लेकर जेपी सिंह ने पुलिस थाने में शिकायत की। बाद में रिमांइडर लेटर भी दिए। रुपए नहीं मिलने की दशा में फांसी लगाने की चेतावनी दी थी, लेकिन शाम को जिलामंत्री रंजीत सिंह की समझाइश पर मामला सुलझा। मामले को लेकर सुधा चंद्रा और जेपी सिंह के बीच मंगलवार को बैठक भी हुई। जेपी सिंह ने सुधा चंद्रा के पक्ष में पत्र लिखते हुए कहा उनके बीच कोई लेनदेन नहीं बचा है, जो था उसे पूरा कर लिया है। इस व्यवहार को लेकर उन्होंने सभी से माफी भी मांगी।

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